भूकंप आए तो क्या करें, क्या न करें, आपके लिए जरूरी जानकारी

भूकंप आए तो क्या करें, क्या न करें, आपके लिए जरूरी जानकारी

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

खास बातें

  • भूकंप आने के वक्त यदि आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं
  • लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, पेंडुलम की तरह दीवार से टकरा सकती है लिफ्ट
  • भूकंप आने के वक्त ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों आदि से दूर रहें
नई दिल्‍ली:

म्‍यांमार में आए तेज भूकंप के झटके असम, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी महसूस किए गए. एक बार फिर सभी के सामने यह सवाल खड़ा है कि भूकंप आने पर क्‍या करें और क्‍या ना करें. भूकंप के बारे में पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता, और भारी तबाही मचाने वाली इस प्राकृतिक आपदा को रोकने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता. लेकिन विशेषज्ञ बीच-बीच में ऐसे कई उपाय सुझाते रहे हैं जिनसे भूकंप के बाद होने वाले खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार नुकसान को कम करने और जान बचाने के लिए कुछ तरकीबें हैं, जिनसे मदद मिल सकती है. आप भी जानिए...

भूकंप आने के वक्त यदि आप घर से बाहर हैं तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों आदि से दूर रहें. जब तक झटके खत्म न हों, बाहर ही रहें. चलती गाड़ी में होने पर जल्द गाड़ी रोक लें और गाड़ी में ही बैठे रहें. ऐसे पुल या सड़क पर जाने से बचें, जिन्हें भूकंप से नुकसान पहुंचा हो.

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भूकंप आने के वक्त यदि आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं. मज़बूत टेबल या किसी फर्नीचर के नीचे पनाह लें. टेबल न होने पर हाथ से चेहरे और सिर को ढक लें. घर के किसी कोने में चले जाएं और कांच, खिड़कियों, दरवाज़ों और दीवारों से दूर रहें. बिस्तर पर हैं तो लेटे रहें, तकिये से सिर ढक लें. आसपास भारी फर्नीचर हो तो उससे दूर रहें. लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचें, पेंडुलम की तरह हिलकर दीवार से टकरा सकती है लिफ्ट और बिजली जाने से भी रुक सकती है लिफ्ट. कमज़ोर सीढ़ियों का इस्तेमाल न करें, आमतौर पर इमारतों में बनी सीढ़ियां मज़बूत नहीं होतीं. झटके आने तक घर के अंदर ही रहें और झटके रुकने के बाद ही बाहर निकलें.

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अगर आप भूकंप के दौरान मलबे के नीचे दब जाएं तो माचिस हरगिज़ न जलाएं क्‍योंकि इस दौरान गैस लीक होने का खतरा हो सकता है. हिलें नहीं, और धूल न उड़ाएं. किसी रूमाल या कपड़े से चेहरा ज़रूर ढक लें. किसी पाइप या दीवार को ठकठकाते रहें, ताकि बचाव दल आपको तलाश सके. यदि कोई सीटी उपलब्ध हो तो बजाते रहें. यदि कोई और जरिया न हो, तो चिल्लाते रहें, हालांकि चिल्लाने से धूल मुंह के भीतर जाने का खतरा रहता है, सो, सावधान रहें.