WhatsApp जासूसी मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, याचिकाकर्ता ने NIA जांच की रखी मांग

दायर याचिका में कहा गया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी देने पर भी केस चलाया जाना चाहिए.

नई दिल्ली:

WhatsApp जासूसी मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस पूरे मामले को लेकर पूर्व RSS विचारक केएन गोविंदाचार्य ने एक याचिका दाखिल की है. उन्होंने अपनी याचिका में फेसबुक, WhatsApp समेत एनएसओ के खिलाफ मामला दर्ज कर एनआईए से जांच कराने की मांग की है. दायर याचिका में कहा गया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी देने पर भी केस चलाया जाना चाहिए. साथ ही इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि केंद्र सरकार को आदेश दिया जिया कि वह तुरंत Pegasus या अन्य किसी एप्लीकेशन के जरिए सर्विलांस बंद कराए.

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कुछ दिन पहले ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख एवं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ‘जासूसी' विवाद को लेकर केंद्र पर निशाना साधा था. उन्होंने मांग की थी कि सरकार इजराइल से पूछें कि उसकी प्रौद्योगिकी कंपनी ने भारतीयों की व्हाट्सऐप बातचीत कैसे सुनी. एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने शनिवार देर रात यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इजराइली राजदूत को तलब किया जाना चाहिए और मामले में सवाल किया जाना चाहिए.

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उन्होंने कहा, ‘‘अब यह पता चला है कि एक इजराइली कंपनी ने व्हाट्सऐप की बातचीत सुनी. इजराइली राजदूत को तलब किया जाना चाहिए और पूछा जाना चाहिए कि उनकी कंपनी ने हमारे फोन क्यों सुने? लेकिन आप (सरकार) इजराइली कंपनी से नहीं पूछ रहे हैं, इसके बजाय आप व्हाट्सऐप से सवाल कर रहे हैं. आप पूछने से डर क्यों रहे हैं.'' फेसबुक के स्वामित्व वाली व्हाट्सऐप ने बृहस्पतिवार को कहा कि इजराइली स्पाईवेयर ‘पेगासस' का इस्तेमाल करके अज्ञात इकाइयों द्वारा वैश्विक स्तर पर जासूसी की गई. भारत के कुछ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस जासूसी का शिकार बने हैं.

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व्हाट्सऐप ने कहा है कि वह एनएसओ ग्रुप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा है. यह इजराइली कंपनी है जो निगरानी करने का काम करती है. समझा जाता है कि यह कंपनी उस प्रौद्योगिकी के पीछे है, जिसके जरिये जासूसों ने करीब 1400 लोगों के फोन हैक किए हैं. इस खुलासे के बाद भारतीय सरकार ने व्हाट्सऐप से यह मामला समझाने और यह बताने के लिए भी कहा है कि उसने लाखों भारतीयों की निजता की रक्षा के लिए क्या उपाय किये हैं. 

ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि देश में गरीबी और महंगाई बढ़ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को इसकी न तो चिंता और न ही कोई परवाह है. उन्होंने भरपेट भोजन नहीं मिलने के कारण उत्पन्न भूख की स्थिति संबंधी वैश्विक सूचकांक (जीएचआई) में भारत के 102वें स्थान पर पहुंचने को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा.

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भारत 117 देशों के जीएचआई में 2018 में 95वें स्थान पर था और अब 2019 में 102वें स्थान पर पहुंच गया है. भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश की रैंकिंग उससे बेहतर है.  उन्होंने कहा, ‘‘आप (नरेंद्र मोदी) पांच वर्षों से प्रधानमंत्री हैं. आपको (लोकसभा) 300 से अधिक सीटें मिली हैं. मोदीजी हम आपसे एक सवाल पूछना चाहते हैं यह कैसे हुआ?'' ओवैसी ने कहा था कि जो राष्ट्रवाद की बातें करते हैं उन्हें कुछ शर्म आनी चाहिए. ओवैसी ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘आप भारत को एक ऐसी स्थिति में ले आये हैं. क्या यह है आपका राष्ट्रवाद. आपको शर्म आनी चाहिए. हमारे देश में 20 करोड़ लोग भूखे पेट सोते हैं और आप बड़ी बातें करते हैं. भाजपा और आरएसएस गरीबों का मजाक उड़ाते हैं.''

उन्होंने कहा था कि स्नातकोत्तर और डिग्री धारियों के बीच बेरोजगारी की दर 24 प्रतिशत है. सुस्ती है. लोग निराश हैं. लेकिन हमारे प्रधानमंत्री थाईलैंड में हैं. वह आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर कर रहे हैं.'' महाराष्ट्र में अगली सरकार गठन को लेकर भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच जारी गतिरोध को लेकर ओवैसी ने कहा था कि वे (भाजपा और शिवसेना) साथ मिलकर (चुनाव) लड़े. अब चुनाव के बाद 50:50.उन्हें महाराष्ट्र के लोगों के बारे में सोचना चाहिए.

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सतारा (जिले) में वर्षा से फसलों को नुकसान हुआ है और किसान मुश्किल में हैं लेकिन उन्हें इसकी चिंता नहीं है.''
ओवैसी ने कहा था कि एआईएमआईएम ने निर्णय किया है कि वह राज्य में सरकार गठन में न तो भाजपा न ही शिवसेना का ही समर्थन करेगी.  उद्धव ठाकरे पहले दिल्ली (केंद्र सरकार) से अपने मंत्री से इस्तीफा लें. यदि आप अपना मुख्यमंत्री चाहते हैं तब आप दो घोड़ों की सवारी नहीं कर सकते. शिवसेना, आप निर्णय करें. ऐसा लगता है कि उद्धव ठाकरे मोदी से डरते हैं.''तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) के कर्मचारियों की अनिश्चित हड़ताल पर ओवैसी ने उनसे अपील की कि वे तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की अपील स्वीकार करके अपना आंदोलन समाप्त कर दें और पांच नवम्बर मध्यरात्रि तक काम पर लौट आयें.