पंजाब में FCI का 700 करोड़ रुपये मूल्य का गेहूं खराब हुआ: कैग

देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने खुलासा किया है कि पंजाब में 31 मार्च 2016 तक 700 करोड़ रुपये मूल्य का भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का गेहूं खराब हुआ है.

पंजाब में FCI का 700 करोड़ रुपये मूल्य का गेहूं खराब हुआ: कैग

पंजाब में 31 मार्च 2016 तक 700 करोड़ रुपये मूल्य का गेहूं खराब हुआ है

नई दिल्ली:


देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने खुलासा किया है कि पंजाब में 31 मार्च 2016 तक 700 करोड़ रुपये मूल्य का भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का गेहूं खराब हुआ है. इसका कारण भंडारण की सुविधा की कमी के कारण अनाज को खुले में रखा जाना था. संसद में पेश ताजा रिपोर्ट के अनुसार खराब गेहूं का भंडार राशन की दुकानों के जरिये आपूर्ति नहीं की जा सकी.

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 2011-16 के दौरान भंडारण क्षमता सृजित करने के लिये पीईजी (प्राइवेट एंटरप्रेन्यूर गारंटी) योजना के क्रियान्वयन तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अपने कर्ज, श्रम तथा प्रोत्साहन भुगतान के प्रबंधन के तरीकों का आडिट किया है.

कैग ने यह पाया कि एफसीआई ने 2013-14 में थोक ग्राहकों को कम भाव पर गेहूं बेचने से 38.89 करोड़ रुपये की वसूली नहीं हो पायी. इसके अलावा, अधिशेष कार्यबल को युक्तिसंगत नहीं किये जाने और अपने गोदामों में महंगे श्रम की नियुक्ति से एफसीआई को 237.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय करना पड़ा. कैग के अनुसार इतना ही नहीं एफसीआई ने अधिक दर तथा वास्तिवक दूरी के बजाए लंबी दूरी तक अनाज परिवहन के बिल का भुगतान कर परिवहन ठेकेदारों को क्रमश: 14.73 लाख रुपये तथा 37.89 लाख रुपये का अधिक भुगतान किया.

पीईजी योजना के बारे में आडिटर ने कहा कि शुरूआती वर्ष में इसका क्रियान्वयन नगण्य था और सात साल बाद भी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं हो पाया. योजना का क्रियान्वयन विभिन्न खामियों के कारण प्रभावित हुआ. पंजाब में 53.56 लाख टन गेहूं चूबतरा बनाकर खुले में ढककर (कवर्ड एंड प्लिंथ-सीएपी)और मंडी में रखे गये थे. रिपोर्ट के अनुसार इसमें से 700.30 करोड़ रुपये मूल्य के 4.72 लाख टन गेहूं खराब हो गया. इस गेहूं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये नहीं बेचे जाने योग्य घोषित किया (मार्च 2016) गया. इसका कारण इसे खुले में रखा जाना था.

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कैग के अनुसार पीईजी योजना के क्रियान्वयन में देरी से बड़ी मात्रा में गेहूं खुले में रखे गये और इस प्रकार का भंडार 2011-12 में 103.36 लाख टन से बढ़कर 2012-13 में 132.68 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसके अलावा कैग ने पाया कि गोदामों के निर्माण का ठेका बहुत कम ठेकेदारों को दिया गया. इसके कारण 2012-13 से 2015-16 के बीच किराये के रूप में 21.04 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ निजी इकाइयों को दिये गये.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)