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जब एम्स के डॉक्टरों ने अटल बिहारी वाजपेयी को जेल जाने से बचाया था, जानें पूरा किस्सा

जब इमरजेंसी की घोषणा हुई तो उस दिन वाजपेयी बेंगलुरु में थे और उनके साथ सहयोगी लालकृष्ण आडवाणी भी थे. दोनों बेंगलुरु के एमएलए हॉस्टल में रुके थे.

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जब एम्स के डॉक्टरों ने अटल बिहारी वाजपेयी को जेल जाने से बचाया था, जानें पूरा किस्सा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: 25 जून 1975. इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी थी. हर तरफ विपक्षी नेताओं की धरपकड़ हो रही थी. अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे. ऐसे में यह तय था कि उनकी भी गिरफ्तारी होनी है. जब इमरजेंसी की घोषणा हुई तो उस दिन वाजपेयी बेंगलुरु में थे और उनके साथ सहयोगी लालकृष्ण आडवाणी भी थे. दोनों बेंगलुरु के एमएलए हॉस्टल में रुके थे. अगले दिन यानी 26 जून को घड़ी में करीब 8:00 बज रहे थे, जब लालकृष्ण आडवाणी ने दरवाजा खटखटाया. हड़बड़ाहट में वाजपेयी ने दरवाजा खोला. छूटते ही आडवाणी ने इमरजेंसी लगने की खबर दी और बताया कि किस तरीके से जयप्रकाश नारायण समेत तमाम नेताओं को कैद कर लिया गया है. आडवाणी बताए जा रहे थे और वाजपेयी के चेहरे पर संतुष्टि का भाव था. जब आडवाणी बोल चुके तो वाजपेयी ने कहा कि हम गिरफ्तारी देंगे.

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अटल बिहारी वाजपेयी जगे, निवृत हुए और नाश्ते के लिए पहुंचे. वह और आडवाणी नाश्ता कर ही रहे थे कि सूचना मिली कि बाहर पुलिस आ गई है. उन्होंने अपना नाश्ता किया और गिरफ्तारी दे दी. दोनों को बेंगलुरु सेंट्रल जेल ले जाया गया. जेल में रहने के दौरान कुछ ही दिनों बाद अटल बिहारी वाजपेयी को भयंकर पीठ दर्द शुरू हो गया और कुछ ही दिनों में पेट में संक्रमण हो गया. जेल में उनका इलाज चल रहा था लेकिन पीठ का दर्द ठीक होने का नाम नहीं ले रहा था.

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कुछ दिनों बाद पता चला कि उन्हें स्लिप डिस्क हो गई है. बीमारी को देखते हुए उन्हें दिल्ली में उनके घर शिफ्ट कर दिया गया. जहां वे हाउस अरेस्ट यानी नजरबंद थे. दिल्ली शिफ्ट होने के बाद भी उनकी बीमारी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही थी. और मज़बूरी में सरकार को उन्हें ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज यानी एम्स में भर्ती कराना पड़ा, जहां उनका ऑपरेशन हुआ. एम्स में रहते हुए तमाम डॉक्टर अटल बिहारी वाजपेयी के मुरीद हो चुके थे. जैसे-जैसे वाजपेयी का स्वास्थ्य ठीक हो रहा था, वैसे वैसे उनके ऊपर दोबारा जेल जाने की तलवार लटक रही थी.

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किंगसुक नाग अपनी किताब "अटल बिहारी वाजपेयी : अ मैन फॉर ऑल सीजन्स" में लिखते हैं कि इलाज के दौरान एम्स के डॉक्टरों की अटल बिहारी वाजपेयी से सहानुभूति और जुड़ाव हो गया था. डॉक्टर जानबूझकर उन्हें डिस्चार्ज करने में देरी कर रहे थे. वह लगातार हवाला दे रहे थे कि अटल जी की स्थिति अभी घर जाने लायक नहीं है. डॉक्टर नहीं चाहते थे कि वह दोबारा जेल जाएं.


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