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हाईकोर्ट में वो तारीख जेटली और जेठमलानी के बीच हुई तीखी बहस के लिए याद की जाएगी

लेकिन तारीख 17 मई साल 2017 को आखिर वह दिन आ ही गया. जब राम जेठमलानी और अरुण जेटली के बीच तीखी बहस हुई.और पूर्व वित्त मंत्री राम जेठमलानी के रवैये से नाराज हो गए.

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हाईकोर्ट में वो तारीख जेटली और जेठमलानी के बीच हुई तीखी बहस के लिए याद की जाएगी

केजरीवाल मानहानि केस में दोनों जेठमलानी और जेटली के बीच हुई थी बहस

खास बातें

  1. 95 साल की उम्र में जेठमलानी का निधन
  2. पीएम सहित बड़े नेताओं ने जताया दुख
  3. लंबे समय से थे बीमार
नई दिल्ली:

राम जेठमलानी और अरुण जेटली के देश के बड़े वकीलों में शुमार थे. कुछ साल पहले ऐसा मौका भी आया जब पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को हाईकोर्ट में राम जेठमलानी के सवालों को सामना करना पड़ा था और इस दौरान तीखी बहस की भी बात सामने आई थी. दरअसल डीसीए में घोटाले का आरोप लगाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अरुण जेटली ने मानहानि का मुकदमा किया था. अदालत में अरुण जेटली के दलीलों का सामना करने के लिए अरविंद केजरीवाल को राम जेठमलानी ही सबसे बेहतर वकील लगे. फिर क्या था कानून के जानकारों को उस दिन का इंतजार था जब अदालत में देश के इन दो बड़े वकीलों का आमना-सामना होने वाला था. आखिर वह दिन आया जब कठघरे में अरुण जेटली खड़े थे और सवाल पूछ रहे थे राम जेठमलानी 

राम - आपको केजरीवाल से कोई दुश्मनी नहीं है ?
जेटली- मुझे कोई निजी दुश्मनी नहीं है लेकिन मुझे उनका नहीं पता. एक बार वो DDCA का प्रेजीडेंट का चुनाव लड़े और हार गए. यहां तक कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने मेरे खिलाफ जमकर प्रचार किया


राम- आप अमृतसर चुनाव की बात कर रहे हैं? क्या ये सही नहीं कि पहली बार आप गुजरात के अलावा कहीं और से चुनाव लड़ना चाहते थे?
जेटली के वकीलों ने विरोध किया लेकिन जेटली : हां

राम : आप अमृतसर से चुनाव लड़ रहे थे तो भी गुजरात से राज्यसभा सदस्य थे ?
जेटली : हां

राम: क्या ये आपका पहला लोकसभा चुनाव था
जेटली : हां मैं पहली बार लड़ा था

राम : तो आप पहली बार लोकतंत्र में अपनी ग्रेट रेपूटेशन का टेस्ट कर रहे थे
जेटली : चुनावों में कई फैक्टर होते हैं सिर्फ प्रत्याशी का रेपूटेशन का सवाल नहीं होता. याद रहे कि केजरीवाल भी 2014 लोकसभा का चुनाव वाराणसी में 3.50 लाख वोटों से हारे थे.

राम : मेरी सलाह मानिए, जो पूछा जा रहा है, वही जवाब दीजिए
राम: क्या आप एक लाख से ज्यादा वोटों से हारे
जेटली : सही है

राम : आप लोकसभा चुनाव लड़े जबकि राज्यसभा में दो साल बचे हुए थे ?
जेटली : राज्यसभा के कार्यकाल में चार साल बचे थे

राम : इसकी क्या वजह है कि बिशन सिंह बेदी ने आपके खिलाफ PM को गंभीर शिकायत दी
जेटली : मैं ऐसोसिएशन का अध्यक्ष था और बेदी को चीफ कोच बनाया गया था. उनका कार्यकाल खत्म हो गया था इसके बावजूद मैं नरमी दिखाता रहा.

राम : क्या आपने बेदी की चिट्ठी देखी ?
जेटली : मुझे याद नहीं है. जब PM ने शपथ ली तो मैं BCCI और डीडीसीए दोनों से अलग हो गया.

राम : क्या पीएम ने आपको ये लैटर दिखाया था. क्या आप इसे पढ़कर बता सकते हैं कि इसमें क्या गलत लिखा है ?
जेटली : इस लैटर में मेरे बारे में लिखी बातों से मैं इनकार करता हूं. मैंने वित्त मंत्री या संसद सदस्य रहते वक्त कभी भी मंत्रालय या विभाग का सहारा नहीं लिया. मैंने कंपनी अफेयर्स का मंत्रालय संभाला लेकिन कभी भी डीडीसीए संबंधी कोई फाइल या कागजात मेरे सामने नहीं आए. ना ही मैंने इससे संबंधी कोई सवाल पूछा. इसलिए हितों के टकराव का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

राम : मिस्टर जेटली मैंने ये नहीं पूछा कि आपने लैटर के बाद क्या किया. ये जानना चाहते हैं इसमें कौन सी बात गलत है ?
जेटली : मैंने साफ जवाब दिया है कि कोई हितों का टकराव नहीं था.

राम: आप जानते हैं कि लेटर में लिखी बातें उस वक्त की हैं जब आप एसोसिएशन का हिस्सा थे ?
जेटली : जहां तक मेरी जानकारी है, ये बातें झूठी हैं. मैं BCCI और DDCA से लिंक खत्म करना चाहता था. 2014 के किसी वक्त में एसोसिएशन से जुड़ा था लेकिन वो कोई पद नहीं था बल्कि एक तरह से बिना कार्यभार वाला काम था. मेरे आग्रह पर वो भी खत्म हो गया.

राम : क्या आपके पास एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य के अधिकार थे ?
जेटली : एकदम नहीं बता सकता लेकिन मैंने कभी एग्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया

राम : आपने मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया ?
जेटली : मैं याद कर रहा हूं कि एक बार मैं मीटिंग में गया था और इसके बाद मैंने इससे अलग करने का आग्रह किया था

राम : अब आपने ये लैटर पढ़ लिया. इसमें क्या ऐसा फैक्ट है जिससे गुस्सा होकर आपने मुझ पर कारवाई शुरु की?
जेटली : नहीं

राम : क्या पीएम को आपके इरादे पता थे ? क्या आपने उन्हें बताया कि लेटर में लगे आरोपों पर आप अपनी रेपूटेशन को बनाए रखेंगे ?
जेटली : ये लैटर जनवरी 2014 का है जबकि मैंने कानूनी कार्रवाई दिसंबर 2015 में  की. मैं 2014 में सूचना प्रसारण विभाग का प्रभारी बना. मई 2014 में मैं प्रभारी नहीं था. अब मैं फाइनेंस एंड कोरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय का प्रभारी हूं.

राम : आपको पीएम ने वित्त मंत्र बने रहने दिया क्योंकि आपने ये भरोसा दिया था कि इन आरोपों पर आप न्यायिक कारवाई करेंगे ?
जेटली : मैं इस बात को नकारता हूं

राम : क्या आप पत्रकार मधु किश्वर को जानते हैं ?
जेटली : मैं ऐसा नहीं समझता
 
राम : उन्होंने एक लैटर लिखा था कि जेटली और उनके परिवार ने डीडीसीए से रुपया कंपनियों में भेजा है ?
जेटली : मुझे नहीं पता ये उन्होंने कब कहा
 
राम : ये दिसंबर 2015 का एक ट्वीट है और केजरीवाल ने सिर्फ इसे रिट्वीट किया था
जेटली : केजरीवाल ने गंभीर और दुर्भावनापूर्ण  झूठ बोलने का काम किया कि मेरी पत्नी और बेटी के लिंक फर्जी कंपनियों से हैं. ये काफी निचले दर्जे का काम था.

राम : आपने शुरुआत करने वाली किश्वर को देखने की जरूरत नहीं की
जेटली : पब्लिक लाइफ में रहने वाले लोगों के लिए सोशल मीडिया पर गैरजिम्मेदाराना बयान आते रहते हैं. लेकिन जब कोई मुख्यमंत्री ऐसे बयानों को अपनाता है तो ये गंभीर अपराध हो जाता है क्योंकि फिर ये बयान सही माने जाते हैं. बार बार इन झूठे आरोपों को लगाने पर मैं कानूनी कार्रवाई को मजबूर हो गया.  

राम : डीडीसीए और बेदी के आरोपों पर अखबार में छपी खबरों को पढा
जेटली : इनसे मेरा कोई लेना देना नहीं ये 2015 का है जबकि मैने डीडीसीए अध्यक्ष पद 2013 में छोड़ दिया.

राम ने फिर सीताराम येचुरी का ट्वीट सुनाया जो केजरीवाल ने रिट्वीट किया. मधु किश्वर का ट्वीट पढ़ा जिसे भी केजरीवाल ने रिट्वीट किया.
जेटली : ये ट्वीट काफी मानहानि वाला है और मुख्यमंत्री के रिट्विट करने से झूठी बातों को और भी बल मिलता

लेकिन तारीख 17 मई साल 2017 को आखिर वह दिन आ ही गया. जब राम जेठमलानी और अरुण जेटली के बीच तीखी बहस हुई.और पूर्व वित्त मंत्री राम जेठमलानी के रवैये से नाराज हो गए. राम जेठमलानी ने अरुण जेटली के लिए CROOK (बदमाश) शब्द का प्रयोग किया. संयुक्त रजिस्ट्रार दीपाली शर्मा के समक्ष उपस्थित वित्त मंत्री अपना आपा खो बैठे और जेठमलानी से पूछा कि क्या केजरीवाल से निर्देश लेकर उनके खिलाफ इस शब्द का इस्तेमाल किया गया. जेटली ने कहा, "अगर ऐसा है तो मैं प्रतिवादी (केजरीवाल) के खिलाफ आरोपों को बढ़ा दूंगा." उन्होंने कहा कि निजी दुर्भावना की भी एक सीमा है. जेटली का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर और संदीप सेठी ने भी कहा कि जेठमलानी अपमानजनक सवाल कर रहे हैं और उन्हें खुद को अप्रासंगिक सवाल पूछने से संयमित करना चाहिए क्योंकि "यह मामला अरूण जेटली बनाम अरविंद केजरीवाल है और यह राम जेठमलानी बनाम अरुण जेटली नहीं है." इस पर जेठमलानी ने कहा कि उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल केजरीवाल के निर्देश पर किया है.  

आप नेताओं का बचाव कर रहे जेठमलानी समेत वकीलों के एक समूह ने यह भी कहा कि जेटली अपने कथित मानहानि के लिए 10 करोड़ रुपये के दावे के हकदार नहीं हैं.  जेटली ने केजरीवाल और पांच अन्य आप नेताओं राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक बाजपेयी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करके 10 करोड़ रपये के क्षतिपूर्ति की मांग की थी. इन नेताओं ने साल 2000 से 2013 तक डीडीसीए का अध्यक्ष रहने के दौरान जेटली पर वित्तीय अनियमितताएं करने का आरोप लगाया था.

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इनपुट : भाषा से भी



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