NDTV Khabar

पढ़ें राजीव गांधी का वह बयान जो आज भी कांग्रेस को डराता है

राजीव गांधी का ही एक बयान कांग्रेस को अक्सर परेशान करता है. वह बयान जिसे विरोधी दल कांग्रेस के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं. 

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
पढ़ें राजीव गांधी का वह बयान जो आज भी कांग्रेस को डराता है

सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में दिये गए राजीव गांधी के बयान को विरोधी अक्सर कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं.

खास बातें

  1. इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजनीति में आए थे राजीव गांधी
  2. बोट क्लब में सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में दिया था बयान
  3. विरोध दल अक्सर उनके इस बयान को हथियार बनाते हैं
नई दिल्ली : आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती है. वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी स्थिति से निपटने के लिए कांग्रेस को उनके बेटे राजीव गांधी से बेहतर कोई नहीं दिखा और इसके बाद राजीव गांधी राजनीति में आए. बतौर पायलट करियर की शुरुआत करने वाले राजीव गांधी ने सियासत में क्या खोया और क्या पाया इसकी चर्चा गाहे-बगाहे होती रहती है. कांग्रेस तमाम मौकों पर राजीव गांधी के कामों का जोर-शोर से बखान करती है. एक राजनैतिक दल का यह 'धर्म' भी बनता है कि वह अपने नेता के अच्छे कामों को लोगों तक पहुंचाए, लेकिन राजीव गांधी का ही एक बयान कांग्रेस को अक्सर परेशान करता है. वह बयान जिसे विरोधी दल कांग्रेस के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं. 

राजीव गांधी जयंती: राहुल गांधी ने कहा, उनकी असामयिक मृत्यु ने मेरे जीवन में एक गहरा शून्य छोड़ा 

19 नवंबर 1984. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनका पहला जन्मदिन. दिल्ली में सिख विरोधी दंगों को शुरू हुए पंद्रह दिन भी नहीं बीते थे और राजीव गांधी ने तमाम रस्मों-रिवाज के साथ इंदिरा गांधी का जन्मदिन मनाने की घोषणा कर दी. यह वो दौर था जब इंडिया गेट के नजदीक बोट क्लब सियासत का केंद्र बिंदु हुआ करता था और इसको आज के रामलीला मैदान या जंतर-मंतर की हैसियत प्राप्त थी. इंदिरा का जन्मदिन इस रूप में भी खास था कि बतौर प्रधानमंत्री राजीव गांधी पहली बार किसी रैली को संबोधित करने जा रहे थे. कांग्रेस ने आयोजन की तैयारियों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी. 

जब राजीव गांधी की इस बड़ी 'पहल' के कारण अटल बिहारी वाजपेयी को मिला था 'जीवनदान' 

वह दिन आ गया. बोट क्लब में दिल्ली के अलावा पड़ोसी राज्यों से जुटी 'कार्यकर्तानुमा भीड़' का पूरा ध्यान राजीव गांधी की तरफ था. वह बोलने खड़े हुए और जो कहा वह करीब चार दशक बाद अब भी रह-रहकर कांग्रेस को सालता है. उस रैली में राजीव गांधी का पूरा संबोधन इंदिरा गांधी की हत्या के इर्द-गिर्द ही था. दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में सिख विरोधी दंगों पर राजीव गांधी ने कुछ खास नहीं बोला. मनोज मित्ता और एचएस फुल्का अपनी किताब 'व्हेन अ ट्री शुक डेल्ही' में लिखते हैं कि, राजीव गांधी ने बोट क्लब की रैली में कहा, 'गुस्से में उठाया गया कोई भी कदम देश के लिए घातक होता है. कई बार गुस्से में हम जाने-अनजाने ऐसे ही लोगों की मदद करते हैं जो देश को बांटना चाहते हैं'. लेकिन इसके बाद उन्होंने जो कहा वो चौंकाने वाला था. उन्होंने आगे कहा, 'हमें मालूम है कि लोगों के अंदर कितना क्रोध है, लेकिन जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास की धरती हिलती है'.  

सैक्रेड गेम्स विवाद पर बोले राहुल, ‘मेरे पिता ने देश के लिए जान दी, सच बदल नहीं सकता’  

टिप्पणियां
इस बयान के बाद सिख समुदाय में राजीव गांधी के प्रति काफी नाराजगी बढ़ी. ऐसा माना गया कि राजीव की दंगाइयों के प्रति हमदर्दी थी और उन्होंने कत्लो-गारत को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जिस रूप में लिया जाना चाहिए था. आज भी अक्सर विरोधी राजीव गांधी के इस बयान को कोट करते हैं और कांग्रेस के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं. यह बयान कांग्रेस के गले की हड्डी बन चुका है. 

VIDEO: न्यूज टाइम इंडिया : ‘क्या मुस्लिम पार्टी है कांग्रेस?’



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement