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कौन हैं राजीव कुमार? जिनके लिए ममता बनर्जी ने मोदी सरकार से लिया लोहा

सारदा चिट फंड घोटाले (Saradha Chit Fund Scam) की जांच के लिए सीबीआई ने बीते रविवार को जैसे ही कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार (Rajeev Kumar) के घर पर छापेमारी की कोशिश की, वैसे ही हंगामा मच गया.

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कौन हैं राजीव कुमार? जिनके लिए ममता बनर्जी ने मोदी सरकार से लिया लोहा

खास बातें

  1. राजीव कुमार 1989 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं
  2. चिट फंड घोटाले में सीबीआई ने उनके आवास पर छापेमारी की नाकाम कोशिश की
  3. ममता बनर्जी ने उनके समर्थन में दिया धरना
नई दिल्ली:

सारदा चिट फंड घोटाले (Saradha Chit Fund Scam) की जांच के लिए सीबीआई ने बीते रविवार को जैसे ही कोलकाता के पुलिस कमिश्नरराजीव कुमार (Rajeev Kumar)के घर पर छापेमारी की कोशिश की, वैसे ही हंगामा मच गया. सीबीआई की टीम को कोलकाता पुलिस ने  बाहर ही रोक दिया, जिसके बाद दोनों के बीच हाथापाई की खबर भी सामने आई. इस दौरान कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के पांच अधिकारियों को हिरासत में ले लिया. जब इसकी भनक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को लगी तो वो फौरन राजीव कुमार (Rajeev Kumar) के घर पहुंच गईं और उन्हें बचाने के लिए खुलकर मैदान में आ गईं. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कोलकाता के मेट्रो चैनल इलाके में धरने पर बैठ गईं और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला किया. रविवार से शुरू हुआ ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का धरना मंगलवार को जाकर खत्म हुआ, लेकिन उन्होंने मोदी सरकार के खात्मे तक जंग जारी रखने की कसम खाई. ममता बनर्जी को इस दौरान विपक्षी दलों का भरपूर समर्थन मिला. इस घटना के बाद राजीव कुमार (Rajeev Kumar) सुर्खियों में आ गए. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि राजीव कमार हैं कौन, जिसके लिए सीएम ममता बनर्जी केंद्र से लोहा लेने में भी पीछे नहीं हटीं...

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कौन हैं राजीव कुमार?
राजीव कुमार 1989 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. राजीव कुमार के पिता उत्तर प्रदेश के चंदौसी में एक कॉलेज के प्रोफेसर थे. राजीव का परिवार चंदौसी में ही रहता है. उन्होंने एसएम कॉलेज से पढ़ाई की और फिर आईएएस की परीक्षा में सफलता हासिल की. आईपीएस अधिकारी बनने के बाद राजीव पश्चिम बंगाल आ गए. फिलहाल राजीव कुमार पश्चिम बंगाल पुलिस में कोलकाता कमिश्नर के पद पर तैनात हैं. सीबीआई के सूत्रों का दावा है कि राजीव कुमार की गिनती सीएम ममता बनर्जी के करिबियों में की जाती है. राजीव कुमार ने 2013 में सारदा चिटफंड घोटाले मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी के प्रमुख थे. उनके ऊपर जांच के दौरान गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं. बतौर एसआईटी प्रमुख राजीव कुमार ने  जम्मू कश्मीर में सारदा के चीफ सुदीप्त सेन गुप्ता और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था. जिनके पास से डायरी मिली थी. ऐसा कहा जाता है कि इस डायरी में चिटफंड से रुपये लेने वाले नेताओं के नाम थे. राजीव कुमार पर इसी डायरी को गायब करने आरोप लगा है. कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने राजीव कुमार को आरोपी बनाया था. 

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कैसे बढ़ा मामला?
दरअसल, कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से सारदा चिटफंड मामले में पूछताछ के लिए सीबीआई के दर्जनों अधिकारी रविवार को उनके घर गए थे. मगर सीबीआई को पुलिस ने ऐसा नहीं करने दिया. इस मामले पर पुलिस और सीबीआई के बीच में काफी हंगामा हुआ. इसके बाद पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को हिरासत में ले लिया और फिर थाने  ले गई. इस घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 8 बजे राजीव कुमार से मिलने गईं और फिर मुलाकात के बाद धरने का ऐलान कर दिआ. करीब 8.30 बजे वह रविवार की रात धरने पर बैठ गईं जो अभी तक जारी है. ममता बनर्जी संविधान बचाने के लिए मोदी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठी हैं. उनका आरोप है कि मोदी सरकार सीबीआई का गलत  इस्मेला कर रही है. 

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क्या है सारदा चिटफंड मामले की कहानी?

कोलकाता पुलिस प्रमुख से पूछताछ की सीबीआई की नाकाम कोशिश के बाद जो राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, उसका संबंध दो कथित पोंजी घोटालों से है. इसकी कहानी सारदा समूह और रोज वैली समूह से जुड़ा हुआ है. इसका पता 2013 में चला था. दरअसल इन दोनों कंपनियों ने लाखों निवेशकों से दशकों तक हजारों करोड़ रुपये वसूले और बदले में उन्हें बड़ी रकम की वापसी का वादा किया गया लेकिन जब धन लौटाने की बारी आई तो भुगतान में खामियां होने लगी. जिसका असर राजनीतिक गलियारे तक देखने को मिला. धन जमा करने वाली योजनाएं कथित तौर पर बिना किसी नियामक से मंजूरी के 2000 से पश्चिम बंगाल और अन्य पड़ोसी राज्यों में चल रही थी. लोगों के बीच यह योजना 'चिटफंड' के नाम से मशहूर थी. इस योजना के जरिए लाखों निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जमा किए गए.

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इन दोनों समूहों ने इस धन का निवेश यात्रा एवं पर्यटन, रियल्टी, हाउसिंग, रिजॉर्ट और होटल, मनोरंजन और मीडिया क्षेत्र में व्यापक तौर पर किया था. सारदा समूह 239 निजी कंपनियों का एक संघ था और ऐसा कहा जा रहा है कि अप्रैल, 2013 में डूबने से पहले इसने 17 लाख जमाकर्ताओं से 4000 करोड़ रुपये जमा किये थे. वहीं, रोज वैली के बारे में कहा जाता है कि इसने 15000 करोड़ रुपये जमा किये थे.

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