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जानलेवा बीमारी टी.बी के खोजकर्ता को गूगल ने डूडल बना कर दी श्रद्धांजलि

रॉबर्ट कोच ने ही सबसे पहले जानलेवा बीमारी टी. बी. के इलाज का पता लगाया था.  साल 1883 में उन्होंने हैजा के जीवाणु की भी खोज की थी.

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जानलेवा बीमारी टी.बी के खोजकर्ता को गूगल ने डूडल बना कर दी श्रद्धांजलि

(फाइल फोटो)

खास बातें

  1. रॉबर्ट कोच ने ही सबसे पहले जानलेवा बीमारी टी. बी. के इलाज का पता लगाया था
  2. साल 1883 में उन्होंने हैजा के जीवाणु की भी खोज की थी
  3. कोच का जन्म 11 दिसंबर 1843 में हुआ था
नई दिल्ली:

सूक्ष्मजैविकी के क्षेत्र में युगपुरूष माने जाते वाले रॉबर्ट कोच को आज गूगल ने उनका डूडल बना कर श्रद्धांजलि अर्पित की है. जर्मन मूल के डॉक्टर और दुनिया के अग्रणी सूक्ष्मजैविकी वैज्ञानिक रॉबर्ट कोच का जन्म 11 दिसंबर 1843 में हुआ था. इन्होंने कॉलेरा, ऐन्थ्रेक्स तथा क्षय रोगो पर गहन अध्ययन किया. अंततः कोच ने यह सिद्ध कर दीया कि कई रोग सूक्ष्मजीवों के कारण होते हैं. रॉबर्ट कोच ने ही सबसे पहले जानलेवा बीमारी टी. बी. के इलाज का पता लगाया था.  साल 1883 में उन्होंने हैजा के जीवाणु की भी खोज की थी.

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उनकी असाधारण खोजों के लिए साल 1905  में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. कोच न रोगों एवं उनके कारक जीवों का पता लगाने के लिए कुछ परिकल्पनाएं की थी वह आज भी इस्तेमाल होती हैं.

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उनके सम्मान में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक मेडिकल इन्सिटीट्यूट का नाम उनके नाम पर रखा गया है. साल 1910 में 66 साल की उम्र में वो दिल का दौरा पड़ने से दुनिया को छोड़कर चले गए. आज भी दुनिया भर के तमाम रोगों का उपचार सिर्फ रॉबर्ट कोच की महान रिसर्च और खोजों के वजह से संभव हो पाया. 

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