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जींद के उपचुनाव में चौतरफा लड़ाई में फंसे रणदीप सुरजेवाला

रणदीप यहां चौतरफा लडाई में फंसे हैं और जींद का उपचुनाव भी मजेदार रंग ले चुका है.

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जींद के उपचुनाव में चौतरफा लड़ाई में फंसे रणदीप सुरजेवाला

जींद और रामगढ़ में आज वोटिंग हो रही है.

खास बातें

  1. जींद का उपचुनाव मजेदार रंग ले चुका है
  2. उपचुनाव में रणदीप चौतरफा लडाई में फंसे हैं
  3. 31 जनवरी को होगी वोटों की गिनती
नई दिल्ली :

हरियाणा की जींद और राजस्थान के रामगढ़ में आज उपचुनाव हो रहे हैं. ये दोनों उपचुनाव कई कारणों से काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं. खासकर राजस्थान की रामगढ़ सीट पर सबकी निगाहें हैं. वजह कई हैं.  भरतपुर जिले में बहुजन समाज पार्टी ने विधान सभा चुनाव में अच्छा प्रर्दशन किया है. इस इलाके की 6 में से 5 सीटों पर कब्जा किए हुए है. यहीं पर रामगढ का उपचुनाव दिलचस्प हो जाता है क्योंकि रामगढ से बीएसपी के उम्मीदवार हैं जगत सिंह, जो नटवर सिंह के बेटे हैं. जगत सिंह को कई पार्टियों में रहने का अनुभव है. वे कांग्रेस,बीजेपी से होते हुए अब बीएसपी में आए हैं. वैसे इस सीट पर चुनाव भी बीसपी के ही उम्मीदवार लक्ष्मण सिंह मृत्यु की वजह से ही हो रहा है. रामगढ़ का महत्व इसलिए भी है कि यह वही जगह है जहां कथित तौर पर गौरक्षकों ने रकबर को पीट पीट कर मार डाला था. उसके बाद बीजेपी ने अपने विधायक ज्ञानदेव आहूजा का टिकट काट दिया था, लेकिन बीजेपी अभी भी ये चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर ही लड़ रही है.

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खैर, बसपा ने यहां से जगत सिंह को टिकट दे कर एक दांव खेला है. उसे पता है कि उनका वोट प्रतिशत इन इलाकों में बढा है और वो यह भी जानते हैं कि कांग्रेस सरकार को पूर्ण बहुमत नहीं है. ऐसी स्थिति में बसपा अपने चंद विधायकों के साथ राजस्थान में निर्णायक स्थिति में रहना चाहती है. जगत सिंह के लिए 90 साल के पूर्व केन्द्रीय मंत्री नटवर सिंह वोट मांग रहे हैं और लोगों से कह रहे कि उनकी तो उम्र हो गई अब लोग उनके बेटे को जीता कर विधानसभा भेज दें. वहीं कांग्रेस ने भी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है. उसे लगता है कि यह सीट किसी भी हाल में जीतनी है क्योंकि कांग्रेस यदि यह सीट जीतती है तो वह 200 की विधानसभा में 100 के जादुई आंकडे तक पहंच जाएगी और चैन की सांस ले सकती है. कांग्रेस को लगता है कि राजस्थान में सरकार होने का उन्हें फायदा मिलेगा. दूसरा, उपचुनाव जींद में हो रहा है जहां कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला जो कैथल से भी विधायक हैं लोग उनसे यही पूछ रहे हैं कि विधायक होते हुए भी वे क्यों ये चुनाव लड रहे हैं. मगर इस चुनाव को दिलचस्प बनाया है चौटाला बंधुओं ने. जी हां... यहां से अजय चौटाला के छोटे बेटे दिग्विजय चौटाला जननायक जनता पार्टी से चुनाव मैदान में हैं. जबकि उनके खिलाफ चौटाला के दूसरे बेटे अभय चौटाला ने उमेद सिंह रेडू को इनलो से मैदान में उतारा है.

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टक्कर दोनों चौटालों के बीच है, जिनकी ये राजनैतिक लडाई अब निजी बन गई है खासकर तब जब ओमप्रकाश चौटाला की पत्नी ने यह बयान दे दिया कि उनके गुजरने के बाद दुष्यंत और दिग्विजय दोनों भाईयों में से किसी को उनकी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होने दिया जाए. चुनाव के दौरान उनके इस बयान पर लोगों में अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया हो रही है. इस सब के बीच बीजेपी के कृष्णा मिड्डा जिनके पिता दो बार से इनेलो के विधायक रह चुके हैं और जिनके गुजरने पर यहां उपचुनाव हो रहे हैं इस बार पाला बदल कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. यानि रणदीप यहां चौतरफा लड़ाई में फंसे हैं और जींद का उपचुनाव भी मजेदार रंग ले चुका है. जींद और रामगढ़ में आज वोटिंग हो रही है और 31 जनवरी को वोटों की गिनती होगी.  

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