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BJP कहीं पलट न दे बाजी, इसलिए कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को नहीं बनाया MP का सीएम!

मध्य प्रदेश में सत्ता से दूर रहने का वनवास खत्म होने के बाद बीजेपी को हराने वाली कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि आखिर वह सूबे का मुख्यमंत्री किसे बनाए?

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BJP कहीं पलट न दे बाजी, इसलिए कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को नहीं बनाया MP का सीएम!

कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. कमलनाथ को एमपी का मुख्यमंत्री चुन लिया गया है.
  2. ज्योतिरादित्य के सामने भारी पड़ा अनुभव.
  3. जीत के अंतर को ध्यान में रखकर लिया फैसला.
नई दिल्ली:

मध्य प्रदेश में सत्ता से दूर रहने का वनवास खत्म होने के बाद बीजेपी को हराने वाली कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि आखिर वह सूबे का मुख्यमंत्री किसे बनाए? मगर काफी माथापच्ची और सियासी बैठकों के बाद आखिरकार गुरुवार की रात यह फैसला हो गया कि कमलनाथ ही राज्य के मुख्यमंत्री होंगे. दरअसल, मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के दो दावेदार थे. एक कमलनाथ और दूसरे ज्योतिरादित्य सिंधिया. मगर कांग्रेस हाईकमान ने काफी सोच-समझने के बाद कमलनाथ के नाम पर मंजूरी दे दी. हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस ने यह फैसला आगे की रणनीति और बीजेपी से एक डर को भी ध्यान में रखकर लिया है. 

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ऐसी खबरें थीं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते थे और युवा की बात करने वाले राहुल गांधी उन्हें सीएम बना सकते थे, मगर ऐसा नहीं हुआ. वहीं राज्य में नवनिर्वाचित विधायक और पार्टी नेता कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे. कुर्सी एक और दावेदार दो. अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि आखिर दो दावेदारों में से किसे राज्य का मुखिया बनाया जाए, जिससे बीजेपी को किसी तरह से बाजी पलटने से रोका जा सके. इसलिए कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले की घड़ी में युवा जोश के बदले अनुभव को तरजीह दी. वैसे भी मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम पर युवा जोश बनाम अनुभव की ही लड़ाई थी. 

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ऐसा माना जा रहा है कि सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को 'अनुभव' पर भरोसा करने के लिए कहा है, क्योंकि यहां जीत काफी कम अंतर से मिली है और एक मंझा हुआ राजनेता ही उस स्थिति से अच्छी तरह निपट सकता है. इसके पीछे तर्क यह भी दिए जा रहे हैं कि जीत का अंतर कम होने की वजह से बीजेपी कभी भी बाजी को पलट सकती है. हालांकि, यह भी सच है कि बीजेपी 2019 लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जो उसकी छवि को नुकसान पहुंचाए. बावजूद इसके कांग्रेस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है. यही वजह है कि कांग्रेस ने कमलनाथ पर ज्यादा भरोसा किया, क्योंकि कमलनाथ के पास ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा अनुभव है और वह सियासत की बारीकियों को काफी करीब से समझते हैं. 

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बताया यह भी जा रहा है कि अगर कांग्रेस के भीतर बीजेपी का डर नहीं होता तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर मुहर लगा सकती थी. मगर उसे डर था कि कम अंतर से जीत के कारण बीजेपी कहीं कोई रणनीति न बनाए और कांग्रेस को सत्ता से दूर करने की कोई चाल न चले. क्योंकि कांग्रेस ऐसा मान रही है कि अगर ऐसी स्थिति राज्य में उत्पन्न होती तो फिर कमलनाथ से बेहतर शख्स कोई नहीं हो सकता जो मुश्किल हालात को आसानी में बदल दे. यही वजह है कि अनुभव के आधार पर कमलनाथ को सीएम की कुर्सी दी गई. 

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यह भी कहा जा रहा है कि कमलनाथ का सियासी करियर अब अपने अवसान पर है और ज्योतिरादित्य सिंधिया का अभी काफी बचा है. यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने कद्दावर नेता को मुख्यमंत्री बनाया. क्योंकि इस बार अगर कमलनाथ को मुख्यमंत्री नहीं बनाती कांग्रेस तो फिर एमपी में समीकरण और भी उलझ सकते थे. बता दें कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को 114 सीटें मिली हैं. मगर वहां सपा-बसपा और निर्दलीय के समर्थन से बहुमत के आंकड़े से काफी आगे हैं. 

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