NDTV Khabar

व्यभिचार के मामले में महिला के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? संविधान पीठ करेगी सुनवाई

आईपीसी के सेक्शन 497 की वैधता को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जब संविधान महिला और पुरुष दोनों को बराबर मानता है तो आपराधिक केसों में यह अलग क्यों?

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
व्यभिचार के मामले में महिला के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? संविधान पीठ करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आईपीसी के सेक्शन 497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगी.

खास बातें

  1. अपराध सहमति से किया गया हो तो महिला को सरंक्षण क्यों दिया जाए
  2. आईपीसी 497 में विवाहित महिला को दूसरे पुरुष से संबंध होने पर भी सरंक्षण
  3. केरल के जोसफ साइन ने याचिका में आईपीसी 497 की वैधता को चुनौती दी
नई दिल्ली:

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 497 के तहत व्यभिचार यानी Adultery के मामलों में क्या महिला के खिलाफ भी हो सकती है कानूनी कार्रवाई? इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ करेगी. कोर्ट ने कहा कि सामाजिक प्रगति, लैंगिक समानता और लैंगिक संवेदनशीलता को देखते हुए पहले के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर फिर से विचार करना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1954 में चार जजों की बेंच और 1985 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं जिसमें आईपीसी 497 महिलाओं से भेदभाव नहीं करता. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी के सेक्शन 497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कोर्ट ने कहा जब संविधान महिला और पुरुष दोनों को बराबर मानता है तो आपराधिक केसों में यह अलग क्यों? कोर्ट ने कहा कि जीवन के हर तौर तरीकों में महिलाओं को समान माना गया है तो इस मामले में अलग से बर्ताव क्यों? जब अपराध महिला और पुरुष दोनों की सहमति से किया गया हो तो महिला को सरंक्षण क्यों दिया गया?

यह भी पढ़ें : जीवनसाथी का व्यभिचार का आरोप लगाना बड़ा पीड़ादायक : दिल्‍ली उच्च न्यायालय


दरअसल आईपीसी का सेक्शन 497 एक विवाहित महिला को सरंक्षण देता है भले ही उसके दूसरे पुरुष से संबंध हों. यह सेक्शन महिला को पीड़ित ही मानता है भले ही अपराध को महिला और पुरुष दोनों ने किया हो. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस प्रावधान की वैधता पर सुनवाई करेगा.

VIDEO : दहेज विरोधी कानून का दुरुपयोग

टिप्पणियां

कोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में महिला के साथ अलग से बर्ताव नहीं किया जा सकता, जब दूसरे अपराध में लैंगिक भेदभाव नहीं होता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति महिला के साथ वस्तु की तरह बर्ताव नहीं कर सकता और महिला को कानूनी कार्रवाई से सरंक्षण मिलना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि यह पुराना प्रावधान लगता है जब समाज में प्रगति होती है तो पीढ़ियों की सोच बदलती है. कोर्ट ने कहा कि इस बारे में नोटिस जारी किया जाता है और आपराधिक केसों में सामान्य तटस्थता दिखानी चाहिए.

दरअसल केरल के एक्टीविस्ट जोसफ साइन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आईपीसी 497 की वैधता को चुनौती दी है. उनका कहना है कि पहले के तीन फैसलों में इसे बरकरार रखा गया और संसद को कानून में संशोधन करने की छूट दी गई.



NDTV.in पर विधानसभा चुनाव 2019 (Assembly Elections 2019) के तहत हरियाणा (Haryana) एवं महाराष्ट्र (Maharashtra) में होने जा रहे चुनाव से जुड़ी ताज़ातरीन ख़बरें (Election News in Hindi), LIVE TV कवरेज, वीडियो, फोटो गैलरी तथा अन्य हिन्दी अपडेट (Hindi News) हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement