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खाड़ी देशों में भारतीयों की जाती नौकरियों से केरल में गहराई मंदी की आशंका

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खाड़ी देशों में भारतीयों की जाती नौकरियों से केरल में गहराई मंदी की आशंका
तिरुअनंतपुरम: खाड़ी देशों में जारी श्रमिक संकट केरल को मंदी की ओर ले जा रहा है, यह बात चिंतित वाम सरकार ने कही है, जिसके सत्ता में 100 दिन पूरे हो गए हैं.

केरल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का काफी बड़ा, यानी 35 फीसदी हिस्सा उन रकमों से बनता है, जो पश्चिमी एशिया में काम करने वाले लोगों द्वारा अपने परिवारों को भेजी जाती हैं. दरअसल, इन दिनों तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद सऊदी अरब जैसे देशों में खर्च कम करने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के कारण वहां काम कर रहे बहुत-से भारतीय बेरोज़गार हो गए हैं, और उनमें केरल के निवासियों की तादाद काफी बड़ी है.

केरल के वित्तमंत्री थॉमस आईज़ैक ने NDTV से कहा, "गल्फ बूम शुरू होने के बाद इस साल पहली बार ऐसा होने के आसार हैं, जब वहां से भेजे जाने वाले धन में कमी देखने को मिल सकती है..."

उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशक में यह पहला मौका है, जब 2015-16 में केरल की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से भी नीचे रही, जिससे 'क्षेत्रीय मंदी' की आशंकाओं ने ज़ोर पकड़ लिया है.

थॉमस आईज़ैक ने बताया कि नौकरी खोने के बाद खाड़ी देशों से लौट रहे भारतीयों के लिए अब केरल की अर्थव्यवस्था में दोबारा रम जाना मुश्किल होगा, क्योंकि खाड़ी से धन आना बंद हो जाने का अर्थ है, यहां भी नौकरियों की किल्लत पैदा होगी. उदाहरण के तौर पर, रीयल एस्टेट और कन्स्ट्रक्शन के व्यवसायों में तो काफी हद तक उसी धन का योगदान रहा है, जो खाड़ी देशों से भेजा जाता था.

केरल में निवेश को बढ़ाने के लिए 20,000 करोड़ रुपये के मंदी-विरोधी तथा निवेश पैकेज की घोषणा कर चुके वित्तमंत्री ने बताया, "मैंने इन समस्याओं से निपटने के लिए बजट में कुछ कड़े कदम उठाए हैं... और हमें उम्मीद है कि इससे केरल में वृद्धि की रफ्तार को काफी सहारा मिलेगा..."

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पश्चिमी एशिया में बन रही स्थिति पर लगातार बारीक नज़र रखे हुए है, और 'सबसे बुरे हालात से निपटने की तैयारी कर रही है...'

वाम लोकतांत्रिक मोर्चा, यानी एलडीएफ इसी साल मई में कांग्रेस की ओमेन चांडी सरकार और उसके गठबंधन को हराकर सत्ता में आया था. जो पिछले पांच साल तक मामूली बहुमत के साथ सत्ता में रहे थे. मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन की सरकार को विरासत में ऐसी अर्थव्यवस्था मिली थी, जिसमें राजस्व वृद्धि लगभग 10 फीसदी थी, और वित्तमंत्री ने उसे 20 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था. लेकिन अब खाड़ी संकट ने उन योजनाओं को करारी चोट पहुंचाई है.

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वैसे, केरल के 63-वर्षीय वित्तमंत्री थॉमस आईज़ैक गद्दी पर बैठते ही उस समय सुर्खियों में आ गए थे, जब उन्होंने इसी साल जुलाई में पेश किए अपने पहले बजट में ब्रांडेड फास्टफूड चेन पर 14 फीसदी का 'फैट टैक्स' लगाया था.

उन्होंने कहा था, "यह फैट टैक्स पैसा जुटाने के लिए उठाया गया कदम नहीं था... यह एक तजुर्बा था, जिससे हम जांचना चाहते थे कि जनता का स्वास्थ्य बेहतर करने के उद्देश्य से वित्तीय नीतियों को लोगों के खाने-पीने की आदतों में बदलाव के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं..."


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