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संपादकों और पत्रकारों ने एक सुर में कहा, 'NDTV इंडिया पर से बैन हटाया जाए'

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संपादकों और पत्रकारों ने एक सुर में कहा, 'NDTV इंडिया पर से बैन हटाया जाए'

प्रतीकात्‍मक फोटो

खास बातें

  1. NDTV India को 9 नवंबर को ऑफएयर का फरमान सुनाया गया
  2. पठानकोट हमले की 'गैरजिम्‍मेदाराना कवरेज' का आरोपी बनाया गया
  3. एनडीटीवी ने आरोपों को नकारा, 'सभी विकल्‍प पर कर रहा विचार'
नई दिल्‍ली:

वरिष्‍ठ पत्रकारों और समाचार संस्‍थानों ने NDTV India पर सरकार की ओर से लगाए गए एक दिन के बैन की कड़े शब्‍दों में निंदा करते हुए इसकी तुलना इमरजेंसी की स्थिति से की है जब मूलभूत अधिकारों को खत्‍म कर दिया गया था और प्रेस की आजादी का दमन किया जा रहा था.

NDTV India को बुधवार, 9 नवंबर को प्रसारण नहीं करने का फरमान सुनाया गया है. सरकार के पैनल ने कहा है कि जनवरी में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले को कवर करते हुए इसने ऐसी जानकारी दी जो रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील थी. दूसरी ओर NDTV ने मजबूती से इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि वह 'तमाम विकल्‍पों पर विचार कर रहा है'

इसकी ओर से जारी बयान में कहा गया है आपातकाल के काले दिनों, जब प्रेस की आवाज को कुचला गय था, के बाद यह बेहद हैरानी की बात है कि NDTV के खिलाफ इस तरीके से कार्यवाही की जा रही है. बयान के मुताबिक, सभी समाचार चैनलों और अखबारों की कवरेज एक जैसी ही थी. सूचना प्रसारण मंत्रालय के एक प्रवक्‍ता ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि केवल टीवी एक्‍ट के उल्‍लंघन के लिए चैनल को ऑफ एयर होना होगा. एक एक्‍ट सुरक्षा से जुड़ी अहम घटनाओं की मीडिया रिपोर्टिंग को सीमित करता है. हालांकि सरकार ने टीवी नेटवर्क के अस्‍थायी शटडाउन का आदेश दिया है लेकिन यह पहली बार है जब एक न्‍यूज चैनल को ऑफ एयर करने के लिए विशेष कानून का उपयोग किया गया है.

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एडिटर्स एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान में बैन के आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए कहा है कि चैनल को एक दिन के लिए ऑफएयर करने का निर्णय मीडिया की स्वतंत्रता, और इस तरह से भारतीय नागरिकों की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है, जिसके ज़रिये सरकार कड़ी सेंसरशिप थोप रही है, और यह इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाता है.


करीब 2500 पत्रकारों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले मुंबई प्रेस क्‍लब ने कहा है कि सरकार के पास गैरजिम्‍मेदाराना मीडिया कवरेज के लिए किसी संस्‍थान को कोर्ट में ले जाने का विकल्‍प मौजूद है लेकिन किसी ऐसे विशेष चैनल, जो सरकार के खिलाफ मुखर हो और आज आदमी से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग करता रहा हो, के खिलाफ देश की अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के लिहाज से अच्‍छा संकेत नहीं है. गौरतलब है कि हाल ही में जारी वार्षिक वर्ल्‍ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्‍स में भारत को 180 देशों में 133वें स्‍थान पर रखा गया है.



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