साल 2020: कोरोना से लेकर किसान आंदोलन तक, जानिए वो 10 बड़ी घटनाएं जिनकी पूरे देश में उठी गूंज 

साल 2020 को इतिहास का सबसे खराब साल कहा जाए तो शायद कुछ गलत नहीं होगा. इस साल में देश ने कोरोना का भयंकर कहर, दिल्ली के दंगे समेत कई घटनाएं देखीं. आइए जानते हैं कि 2020 में घटी कुछ बड़ी घटनाओं के बारे में.

साल 2020: कोरोना से लेकर किसान आंदोलन तक, जानिए वो 10 बड़ी घटनाएं जिनकी पूरे देश में उठी गूंज 

कोरोनावायरस, दिल्ली दंगे और किसान आंदोलन के साये में बीता साल 2020

नई दिल्ली:

साल 2020 के गुजरने में अब चंद ही दिन बचे हैं. लगभग पूरा साल कोरोनावायरस (Coronavirus) और उससे उपजी चुनौतियों का वर्ष रहा. 2020 के चंद महीने गुजरने के बाद ही महामारी ने देश में दस्तक दी. कोरोना को काबू करने के लिए लॉकडाउन (Lockdown) लगाया गया, जिसने आर्थिक गतिविधियों को ठप कर दिया, प्रवासी मजदूरों को पलायन करने को मजबूर किया और लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ. सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर जाने वाले मजदूरों की तस्वीरें और दर्द बयां करती कहानियां हमेशा लोगों के ज़हन में रहेंगी.

यही नहीं, साल 2020 में देश ने दंगा भी देखा और विरोध प्रदर्शन भी झेला. किसानों का आंदोलन अब भी जारी है. आइए, 2020 में घटी बड़ी घटनाओं पर डालते हैं एक नजर...    

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1)- राम मंदिर शिलान्यास
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का रास्ता तैयार किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी. मंदिर के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. मंदिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि आने वाले कई सालों तक भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं का इस पर कोई असर न हो. राम मंदिर तैयार होने में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है.

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2)- कोरोनावायरस का कहर, तबलीगी जमात और मरकज़
कोरोनावायरस ने देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. महामारी का कहर इस कदर बरपा कि देखते ही देखते 180 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले लिया. बड़ी आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर व्यवस्था ने भारत की चिंता और बढ़ाई. देश में जल्द ही संक्रमण के मामलों की संख्या एक करोड़ पहुंच जाएगी. कोरोना को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए गए और आगे भी किए जाते रहेंगे. पूरे देश की निगाहें अब कोरोना वैक्सीन पर टिकी हुई हैं. कोरोना के कहर के बीच तबलीगी जमात का भी जिक्र हुआ.  

दिल्ली के निज़ामुद्दीन स्थित मरकज़ में मार्च में हुए तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हजारों की संख्या में देश और विदेश से लोग शामिल हुए. जब यह बात सामने आई कि बड़ी संख्या में जमाती कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन गया. कोरोनावायरस के फैलाव में तबलीगी जमात और निज़ामुद्दीन मरकज़ का नाम सामने आने के बाद इसे सियासी रंग दिया गया और राजनीतिक ध्रुवीकरण का खेल शुरू हुआ. सरकार ने संसद में बताया कि मार्च में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में भारी भीड़ लंबी अवधि तक एक परिसर में एकत्र रही, जिससे कई व्यक्तियों में संक्रमण फैला.     

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3)- किसान आंदोलन
केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन ने सर्द मौसम में दिल्ली की सियासी तपिश बढ़ा दी है. केंद्र सरकार सितंबर महीने में 3 नए कृषि विधेयक लाई, जो संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की मुहर के बाद कानून बने. किसानों को ये कानून रास नहीं आ रहे हैं. किसान 'दिल्ली चलो अभियान' के तहत राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में डेरा डाले हुए हैं और सरकार से लंबी लड़ाई को तैयार हैं. वे पर्याप्त राशन और जरूरत का सारा सामान लेकर आए हैं. कानूनों को रद्द करने से कम पर मानने को किसान तैयार नहीं हैं. किसान संगठनों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता हुई, जो बेनतीज रही. किसानों के मान-मनौव्वल का सिलसिला अब भी जारी है. किसानों को इन कानूनों से फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खत्म हो जाने का डर सता रहा है.

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4)- बिहार विधानसभा चुनाव
2020 में बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर खासी गहमागहमी रही. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमानों और एग्जिट पोल्स ने तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन की बांछे खिला दीं. विपक्ष को सत्ता में आने का भरोसा था, लेकिन तस्वीर सामने आई तो बाजी पलट चुकी थी. सभी एग्जिट पोल्स धराशायी साबित हुए. एनडीए एक बार फिर सत्ता पर काबिज होने में कामयाब रहा. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को सीटों का नुकसान जरूर हुआ, लेकिन बीजेपी के आशीर्वाद से वह सीएम की कुर्सी पाने में कामयाब रहे. एनडीए से बगावत कर अकेले लड़ने वाली लोजपा को एक सीट पर संतोष करना पड़ा. 75 सीटें जीतने वाली RJD कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की वजह से सत्ता का स्वाद चखने से महरूम रह गई.

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5)- सुशांत सिंह राजपूत की मौत
बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने न सिर्फ फिल्म जगत बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया. जून महीने में सुशांत सिंह राजपूत अपने फ्लैट में मृत पाए गए. सुशांत राजपूत की मौत ने बॉलीवुड में वंशवाद बनाम बाहरी की लड़ाई को हवा दी. कुछ दिन बाद रिया चक्रवर्ती का नाम उछला. सितंबर महीना आते-आते कहानी में ड्रग्स एंगल को लेकर जांच शुरू हुई और जांच का दायरा बढ़ता गया. एनसीबी अब तक कई जानी-मानी हस्तियों से पूछताछ कर चुकी है और कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है. सुशांत के परिवार ने रिया पर पैसे ऐंठने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. फिलहाल, सुशांत की मौत की जांच सीबीआई कर रही है और अब तक गुत्थी अनसुलझी है.  

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6)- मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन
मध्य प्रदेश में बड़ी राजनीतिक हलचल तब हुई जब राहुल गांधी के भरोसेमंद ज्योतिरादित्य सिंधिया हाथ (कांग्रेस) का साथ छोड़कर भाजपा खेमे में जा मिले. इसके बाद, शुरू हुआ कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे का सिलसिला. सप्ताह भर चले राजनीतिक रस्साकशी में कमलनाथ सरकार गिर गई. शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर मध्य प्रदेश की कमान संभाली. राज्य में उपचुनाव हुए. उपचुनाव में कांग्रेस सभी सीटें जीतकर सत्ता में फिर से काबिज होने का सपना लेकर मैदान में उतरी जबकि बीजेपी के सामने चुनौती सत्ता बचाने की थी. भाजपा ने तीन नवंबर को 28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में 19 सीटें जीतकर सत्ता बचा ली जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस मात्र नौ सीटों पर सिमट गई.

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7)- दिल्ली दंगा, सीएए के खिलाफ शाहीनबाग में विरोध-प्रदर्शन
पिछले साल के अंत में पेश नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) संसद की मंजूरी के बाद कानून तो बन गया, लेकिन इसका विरोध 2020 में भी नहीं थमा. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में पूर्वोत्तर से उठी आवाज 2020 की शुरुआत तक देशभर में विरोध प्रदर्शन की शक्ल ले चुकी थी. दिल्ली के शाहीनबाग में सीएए के खिलाफ लंबे समय तक प्रदर्शन चला और हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. इसमें अधिकांश महिलाएं धरने पर बैठी थीं. शाहीनबाग में प्रदर्शन का चेहरा बनी 82 साल की बिलकिस दादी. टाइम मैगजीन ने बिलकिस बानो को 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की अपनी सूची में शामिल किया है.

सीएए के विरोध में भड़की हिंसा फरवरी महीने के आखिर तक दंगों में तब्दील हो गई. कई इलाकों में वाहनों में तोड़ फोड़, आगजनी और पत्थरबाजी हुई. पुलिस को भी निशाना बनाया गया. कानून के समर्थक और विरोधी आपस में भिड़ गए. दिल्ली दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए. दिल्ली के दंगे तो थम गए, लेकिन इन दंगों में अपनों को खोने का मर्म हमेशा बना रहेगा.    

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8)- अर्थव्यवस्था की बदहाल स्थिति
अर्थव्यवस्था के लिहाज से साल 2020 काफी खराब रहा. अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध और अन्य वैश्विक एवं घरेलू कारकों के चलते सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था पर कोरोना महामारी की गहरी मार पड़ी. कोरोना को काबू करने के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गईं. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. हाल ही में दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के जीडीपी आंकड़े जारी हुए. अनलॉक के तहत, आर्थिक गतिविधियों के फिर से चालू होने पर अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरी है. जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में 7.5 प्रतिशत का संकुचन देखा गया. भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष (2020-21) के लिए जीडीपी में 7.5 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया है.  

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9)- गलवान में भारत-चीन झड़प
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच लंबे समय से सैन्य गतिरोध चल रहा है. विवाद पैदा करने के लिए चीन ने गलवान घाटी में सैन्य तैनाती बढ़ाई, जवाब में भारत ने भी सैनिकों का जमावड़ा मजबूत कर दिया. 15-16 जून की दरमियानी रात गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए. भारत और चीन के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई, जिसमें भारत के 20 जवान की जान कुर्बान हुई. चीन को भी जान-माल का खासा नुकसान हुआ. 16 जून को सुबह जैसे ही खबर सामने आई देश में कोहराम मच गया. दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस हल नहीं निकल सका है. गलवान घाटी भारत के लिए सामरिक रूप से काफी अहम है. 1962 के युद्ध के दौरान भी गलवान घाटी जंग का प्रमुख केंद्र था.

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10)- निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा
दिसंबर 2012 में दिल्ली में चलती बस में निर्भया से सामूहिक बलात्कार की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. निर्भया को न्याय दिलाने के लिए देश के कोने-कोने से आवाज उठी. लोग सड़कों पर उतरे. संसद में भी निर्भया केस की गूंज उठी. निर्भया कोई आम लड़की नहीं, बल्कि उस समय तक देश की बेटी बन चुकी थी. सोशल मीडिया से उठी आवाज ने जन सैलाब की शक्ल एख्तियार की. बड़ी संख्या में लोग इंडिया गेट पहुंचे और निर्भया के गुनाहगारों को फांसी पर चढ़ाने की मांग की. निर्भया के चार गुनाहगारों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय सिंह को आखिरकार सात साल बाद 20 मार्च 2020 को फांसी पर लटकाया गया. निर्भया के एक दोषी राम सिंह ने 2013 में तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी.    


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