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NRC की जगह सरकार को बेरोजगार लोगों के लिए रजिस्टर बनाना चाहिए: योगेंद्र यादव

नागरिकता कानून के विरोध को लेकर स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने एनडीटीवी से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में युवा हमारी यूनिवर्सिटी में ऐसे खड़े हुए हैं.

नई दिल्ली:

नागरिकता कानून के विरोध को लेकर स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने एनडीटीवी से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में युवा हमारी यूनिवर्सिटी में ऐसे खड़े हुए हैं. मुझे लगता है कि आज CAA के खिलाफ आंदोलन में बड़ा मोड़ आया है.आज से पहले लगता था कि यह असम या मुसलमानों की समस्या है लेकिन आज इसे लेकर पूरा देश एक साथ खड़ा है. आज जो लोग आंदोलन कर रहे हैं उन्हें अपने देश के खोने का खतरा है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मोदी सरकार के लिए एक साथ दो मुद्दे उठ रहे हैं. सिर्फ CAA का मामला नहीं है, देश में लोगों में बेरोजगारी से भी लोग परेशान है. मुझे लगता है कि आज भले ही बेरोजगारी न दिखे लेकिन कुछ समय बाद CAA और NRC की तुलना मे बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा होगा. योगेंद्र यादव के अनुसार सरकार को नेशनल रजिस्टर ऑफ अनइंप्लायड बनाना चाहिए.

लाल किला से हिरासत में लिए गए योगेंद्र यादव, ट्वीट कर लिखा- साझी विरासत, साझी शहादत, साझी नागरिकता

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के लाल किला में विरोध प्रदर्शन कर रहे स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया था. योगेंद्र यादव ने अपनी एक तस्वीर के साथ ट्विटर पर एक पोस्ट की थी. जहां उन्होंने लिखा, ''मुझे लाल किला से हिरासत में ले लिया गया. हजारों प्रदर्शनकारी पहले से ही हिरासत में है. योगेंद्र यादव के अनुसार अभी हजारों और भी बाकी है. हमें बताया जा रहा है कि हमें बवाना लेकर जाया जा रहा है. साझी विरासत, साझी शहादत, साझी नागरिकता.''

Budget 2019: 'न खाता न बही, जो निर्मला कहें वो सही ': बजट पर योगेंद्र यादव ने कसा तंज

बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) लोकसभा में 9 दिसंबर, 2019 को पास होने के बाद 11 दिसंबर, 2019 को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पेश किया जहां एक लंबी बहस के बाद यह बिल पास हो गया. इस बिल के पास होने के बाद यह नागरिकता संशोधन कानून बन गया. इस कानून के विरोध में असम, बंगाल समेत देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए. 15 दिसंबर को इस कानून के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. इस प्रदर्शन में कई छात्रों समेत पुलिस के कुछ जवान भी घायल हो गए.