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पीएम को मत घसीटिए, अपना तर्क रखिए : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू

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पीएम को मत घसीटिए, अपना तर्क रखिए : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू

खास बातें

  1. तीन तलाक मामले में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने बयान दिया है
  2. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से कहा कि पीएम को मत घसीटें, अपने तर्क रखें
  3. नायडू ने कहा है कि सरकार चाहती है इस मुद्दे पर बहस हो
नई दिल्ली:

तीन तलाक़ पर शुरू हुई बहस पर आज सरकार की ओर से सफ़ाई आई है. केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि लोग तीन तलाक़ को ख़त्म करना चाहते हैं. इस मुद्दे पर बहस होनी चाहिए, सवालनामा जारी करने के लिए लॉ कमीशन पर उठ रहे सवालों पर नायडू ने कहा कि लॉ कमीशन पर आपत्ति ग़लत है. महिलाओं को समान अधिकार दिलाना हमारा लक्ष्य है. विपक्ष पर निशाना साधते हुए नायडू ने कहा कि कुछ लोग तीन तलाक़ और यूनीफॉर्म सिविल कोड के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं. इस मामले में प्रधानमंत्री का नाम घसीटना ग़लत है.

नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री को तानाशाह बताया जा रहा है और उन पर मुद्दे को भटकाने का आरोप लग रहा है लेकिन ऐसी उम्मीद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से नहीं थी. क्यों नहीं वह सिर्फ इस मुद्दे तक सीमित रखकर अपनी राय रख रहे हैं. सरकार भी चाहती है कि इस मामले पर देश भर में चर्चा और बहस हो. केंद्रीय मंत्री ने सवाल किया कि बोर्ड इस पर राजनीतिक क्यों होता दिख रहा है. पीएम को मत घसीटिए, अपना तर्क रखिए, प्रजातंत्र में सबको अपनी राय रखने का हक़ है.

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केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि वक्त आ गया है कि सभी धर्मों की महिलाओं को समान अधिकार दिए जाएं, बगैर यह सोचे कि वह कौन से धर्म से ताल्लुक रखती है. बता दें कि पिछले हफ्ते सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि तीन तलाक़ की प्रक्रिया को खत्म हो जाना चाहिए क्योंकि यह महिलाओं की मर्यादा और बराबरी के अधिकार का हनन करता है. वहीं अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि मुसलमानों को शादी, तलाक और उत्तराधिकार वाले मामलों में शरिया कानून के मुताबिक ही चलना चाहिए.


उधर सरकार को कानूनी सुधार की सलाह देने वाले विधि आयोग ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) को लेकर आम लोगों की राय मांगी है. इसका मतलब है कि सभी धर्म और समुदाय एक ही कानून के मुताबिक चलेंगे. दूसरे शब्दों में मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक जैसे ईसाई और पारसी समुदाय अपने सिविल कोड को लागू रखने का अधिकार खो देंगे.



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