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मोदी सरकार के खिलाफ हंगामे के चलते नहीं लाया जा सका अविश्‍वास प्रस्‍ताव, YRS कांग्रेस ने कल के लिए दिया नोटिस

संसद में 12वें दिन भी गतिरोध बना रहा और इस बीच तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) व वाईएसआर कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के लिए दी गई नोटिसों पर चर्चा नहीं हो सकी.

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मोदी सरकार के खिलाफ हंगामे के चलते नहीं लाया जा सका अविश्‍वास प्रस्‍ताव, YRS कांग्रेस ने कल के लिए दिया नोटिस

फाइल फोटो

खास बातें

  1. संसद में 12वें दिन भी गतिरोध बना रहा
  2. अविश्वास प्रस्ताव के लिए दी गई नोटिसों पर चर्चा नहीं हो सकी
  3. लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे फिर शुरू होगी
नई दिल्ली:

संसद में 12वें दिन भी गतिरोध बना रहा और इस बीच तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) व वाईएसआर कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के लिए दी गई नोटिसों पर चर्चा नहीं हो सकी. वाईएसआर कांग्रेस के सांसद वाई.वी. सुब्बारेड्डी ने लोकसभा सेक्रटरी को बुधवार की कार्यवाही में अविश्वास प्रस्ताव को शामिल करने का नोटिस दिया है. इससे पहले शुक्रवार, सोमवार और मंगलवार को चर्चा के लिए नोटिस दिए गए थे. वहीं हंगामे की वजह से लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई है और बुधवार सुबह 11 बजे फिर शुरू होगी. 

अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन को लेकर अब तक कई पार्टियों का रुख साफ नहीं हैं. वाईएसआर कांग्रेस के सांसद वाईवी सुब्‍बा रेड्डी ने कहा है कि हम लोकसभा स्पीकर से निवेदन करते हैं कि हमें अविश्वास प्रस्ताव लाने दें, बजट सत्र में अविश्वास प्रस्ताव पर हो चर्चा हो. 

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बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा, कावेरी, पीएनबी समेत कई अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है. एक बार के स्थगत के बाद 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन में व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए तेलुगू देशम पार्टी के टी नरसिंहन और वाईएसआर कांग्रेस के वाई बी सुब्बारेड्डी द्वारा सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई. वहीं कांग्रेस, माकपा और राकांपा आदि दलों के सदस्यों की जोरदार नारेबाजी के चलते विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का पूरा बयान नहीं हो पाया. लोकसभा अध्यक्ष ने इस पर दुख प्रकट किया. प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए इसे कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए. 

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सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार है. राजनाथ ने कहा, "हम किसी भी तरह की चर्चा के लिए तैयार हैं. हम अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए भी तैयार हैं. मैं सभी राजनीतक दलों से सहयोग की अपील करता हूं."

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले संवाददाताओं को बताया, "हम अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि सदन में हमारे पास समर्थन है. हम आश्वस्त हैं." तेदेपा के सांसद थोटा नरसिम्हन ने कहा कि पार्टी सदस्य पहले सदन में प्रस्ताव पेश करने पर जोर देंगे. उन्होंने कहा कि तेदेपा ने तृणमूल, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों से बात कर ली है.

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तेदेपा के एक अन्य सांसद आर.एम.नायडू ने कहा कि वे संसद में यथासंभव विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, यह जानते हुए कि सरकार के पास पर्याप्त संख्या होने की वजह से यह अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा. नायडू ने कहा, "सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे हमारा समर्थन करें. हम इस पर यथासंभव समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इस पर चर्चा हो सके. हम सरकार गिराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं."

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मौजूदा समय में लोकसभा में 539 सदस्य हैं, जिसमें से भाजपा के 274 सांसद हैं, जो अविश्वास प्रस्ताव गिराने के लिए आवश्यक 270 से अधिक है. भाजपा के पास शिवसेना और अकाली दल जैसी सहयोगी पार्टियों का भी समर्थन है. शिवसेना ने अभी अविश्वास प्रस्ताव पर अपने पत्ते नहीं खोलने का फैसला किया है.
 



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