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आईपीएल फाइनल : पुणे की 1 रन से हार के पीछे 3 सबसे बड़ी वजह

2016 में जब पहली बार राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में आईपीएल में प्रवेश किया था तब सभी यही उम्मीद कर रहे थे कि धोनी पुणे को एक नई ऊंचाई तक ले जाएंगे, लेकिन 2016 में धोनी की कप्तानी में पुणे कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाया था.

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आईपीएल फाइनल : पुणे की 1 रन से हार के पीछे 3 सबसे बड़ी वजह

मुंबई ने पुणे को 1 रन से हराया

खास बातें

  1. मुंबई को पहले बल्लेबाजी का फायदा
  2. धीमी बल्लेबाजी के कारण पुणे को नुकसान
  3. मुंबई के अनुभवी गेंदबाज भी पड़े भारी
नई दिल्ली: 2016 में जब पहली बार राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में आईपीएल में प्रवेश किया था तब सभी यही उम्मीद कर रहे थे कि धोनी पुणे को एक नई ऊंचाई तक ले जाएंगे, लेकिन 2016 में धोनी की कप्तानी में पुणे कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाया था. 14 में से सिर्फ पांच मैच जीत पाया था और प्ले ऑफ तक का रास्ता तय नहीं कर पाया था. 2017 में धोनी की जगह ऑस्ट्रेलिया के स्टीवन स्मिथ को पुणे का कप्तान बनाया गया. शुरुआती मैचों में स्मिथ की कप्तानी में पुणे कुछ खास नहीं कर पाया लेकिन आखिर लीग मैचों में पुणे शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए अंक तालिका में 18 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और प्ले ऑफ पहुंचा. पहले क्वालीफायर में मुंबई इंडियंस को 20 रन से मात देकर फाइनल में अपनी जगह को पक्का किया.

इस बार फाइनल से पहले पुणे और मुंबई तीन बार भीड़ चुके थे और तीनों बार पुणे ने मुंबई को हराया था. रविवार को हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम पर फाइनल मैच शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा क्रिकेट प्रेमी पुणे की जीत की उम्मीद लगा बैठे थे, लेकिन पुणे का पहली बार चैंपियन बनने का सपना सपना ही रह गया. एक रोमांचक और कम स्कोरिंग मैच में मुंबई ने पुणे को सिर्फ एक रन से हराकर इतिहास रचा. आईपीएल के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब कोई टीम तीसरी बार खिताब जीतने में कामयाब हुई.

टॉस हारना पुणे के लिए महंगा पड़ा 
फाइनल जैसे दबाव भरे मैच में हर टीम यही कोशिश रहती है कि टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की जाए. कल के मैच में मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया. पुणे के कप्तान स्टीव स्मिथ ने भी बताया था कि अगर वह भी टॉस जीते होते तो वह भी बल्लेबाजी का निर्णय लेते. इस बार राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम पर फाइनल मैच से पहले सात बार मैच खेला गया था और पांच बार वे टीम जीती थीं, जिन्होंने पहले बल्लेबाजी की थी. फाइनल मैच से पहले इस मैदान पर खेले गए सात मैचों में छह मैचों में सनराइज़र्स हैदराबाद ने जीत हासिल की थी, जिस में चार बार पहली बल्लेबाजी करते हुए और दो बार लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत हासिल की थी. इस मैदान पर पहला मैच रॉयल चैलेंजर बैंगलोर और सन राइज़र्स हैदराबाद के बीच खेला गया था और हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बैंगलोर को 35 रन से हराया था. 

हैदराबाद ने दिल्ली को इस मैदान पर 15 रन से, पंजाब को 5 रन से, कोलकाता नाइट राइडर्स 48 रन से हराया था और लक्ष्य का पीछा करते हुए गुजरात लायंस ने 9 विकेट से और मुंबई इंडियंस को 7 विकेट से हराया था. फाइनल से पहले राइजिंग पुणे ने भी इस मैदान पर पहले बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद को 12 रन से हराया था. ऐसे में फाइनल मैच में टॉस हारना पुणे के लिए महंगा पड़ा. 

धीमी बल्लेबाजी भी हार का कारण
मुंबई की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में सिर्फ 129 रन बना पाई थी. पुणे के युवा गेंदबाज़ों ने मुंबई के सभी बड़े बल्लेबाज़ों को बड़ी पारी खेलने का मौक़ा नहीं दिया.सिर्फ क्रुणाल पांड्या और रोहित शर्मा को छोड़कर मुंबई के कोई भी बल्लेबाज 20 से ज्यादा रन नहीं बना पाए थे. क्रुणाल पांड्या ने सबसे ज्यादा 47 रन बनाए थे जबकि रोहित शर्मा ने सिर्फ 24 रन. पुणे के सामने कोई बड़ा लक्ष्य नहीं था. पुणे ने संभलकर खेलने की कोशिश की और सफल भी हुए.  आखिरी चार ओवर में पुणे को जीतने के लिए सिर्फ 33 रन की जरूरत थी और हाथ में आठ विकेट थे. मैदान पर खुद कप्तान स्मिथ और धोनी मौजूद थे, लेकिन धोनी और स्मिथ जैसे अनुभवी बल्लेबाज मुंबई के गेंदबाज़ों के सामने घुटने टेकते हुए नज़र आए. आखिरी चार ओवर में पुणे के बल्लेबाज़ों ने 31 रन बनाए और पुणे एक रन से मैच हार गया. पुणे के लिए जो हार का कारण बनी वह थी धीमी बल्लेबाजी. राहुल त्रिपाठी ने आठ गेंदों का सामना करते हुए तीन रन बनाए. महेंद्र सिंह धोनी ने 13 गेंदों का सामना करते हुए सिर्फ 10 रन बनाए.  कप्तान स्मिथ ने अच्छी पारी तो खेली, लेकिन स्ट्राइक रेट के मामले में पीछे रह गए. स्मिथ ने 50 गेंदों का सामना करते हुए 51 रन बनाए जो टी-20 में धीमी पारी मानी जाती है. 

मुंबई के अनुभवी गेंदबाज़ पुणे के बल्लेबाज़ों पर भरी पड़े
पुणे के सामने बहुत बड़ा लक्ष्य नहीं था, लेकिन फिर भी पुणे हार गया और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रही मुंबई के अनुभवी गेंदबाज़ों की शानदार गेंदबाज़ी. मुंबई की तरफ से मिचेल जॉनसन, लसिथ मलिंगा, जसप्रीत बुमराह और कर्ण शर्मा ने शानदार गेंदबाज़ी की. जॉनसन ने चार ओवर गेंदबाज़ी करते हुए 26 रन पर तीन विकेट लिए. आखिरी ओवर में जॉनसन का अनुभव मुंबई के काम आया. पुणे को आखिरी ओवर में जीतने के लिए 11 रन की जरूरत थी. मनोज तिवारी ने पहली गेंद पर एक चौका लगाते हुए पुणे के कैंप में ख़ुशी की लहर फैला दी थी, लेकिन जॉनसन ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए अगली दो गेंद पर मनोज तिवारी और कप्तान स्टीवन स्मिथ को पवेलियन लौटा दिया. आखिरी तीन गेंदों में जॉनसन ने सिर्फ पांच रन दिए. इस तरह मुंबई ने इस मैच को एक रन से जीत लिया. डेथ ओवरों में मुंबई के सभी गेंदबाज़ों ने शानदार गेंदबाज़ी की. लसिथ मलिंगा ने चार ओवर में सिर्फ 21 रन दिए. जसप्रीत बुमराह ने चार ओवरों में 26 रन देकर दो विकेट लिए जिसमें महेंद्र सिंह धोनी का विकेट भी शामिल था. 
 


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