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IPL Finals : मुंबई इंडियन्स अनुभव में, तो राइजिंग पुणे रिकॉर्ड में है भारी...

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 10) के इस सीजन का फाइनल मुकाबला तय हो गया है. अब 21 मई को रात 8 बजे से हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और राइजिंग पुणे सुपरजायंट की टीमें खिताब के लिए जोर लगाएंगी.

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IPL Finals : मुंबई इंडियन्स अनुभव में, तो राइजिंग पुणे रिकॉर्ड में है भारी...

IPL Finals : आईपीएल रिकॉर्ड में पुणे की टीम मुंबई पर भारी नजर आती है....

खास बातें

  1. मुंबई इंडियन्स ने 4 फाइनल खेले और दो जीते हैं
  2. इस सीजन में पुणे ने मुंबई को हर बार हराया है
  3. पुणे के पास पहली बार खिताब जीतने का मौका है
नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 10) के इस सीजन का फाइनल मुकाबला तय हो गया है. अब 21 मई को रात 8 बजे से हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और राइजिंग पुणे सुपरजायंट की टीमें खिताब के लिए जोर लगाएंगी. मुंबई की टीम चौथी बार फाइनल खेलेगी और तीसरी बार टूर्नामेंट जीतने की कोशिश करेगी, जबकि पुणे टीम अपना पहला खिताब जीतना चाहेगी. गौरतलब है कि पुणे टीम मुंबई को ही हराकर फाइनल में पहुंची थी. ऐसे में उसके पास मनोवैज्ञानिक बढ़त रहेगी.

आईपीएल 10 के लीग राउंड में दोनों ही टीमें दो बार भिड़ीं थी, जिनमें दोनों ही मैच पुणे के नाम रहे थे. फिर क्वालिफायर मुकाबले में भी मुंबई को हार का मुंह देखना पड़ा था. पिछले तीन मुकाबलो में हारने के बाद मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा पर फाइनल मैच में टीम को जीत दिलाने का दबाव होगा. पिछले सीजन यानी साल 2016 में पुणे और मुंबई के बीच दो मैच हुए थे. मुंबई के होमग्राउंड पर 9 अप्रैल को हुए पहले मैच में पुणे ने 9 विकेट से जीत हासिल की थी जबकि दूसरे मैच में पुणे को उसके होम ग्राउंड पर मुंबई इंडियंस ने 8 विकेट से शिकस्‍त दी थी.
 
ओवऑल प्रदर्शन की बात करें, तो मुंबई इंडियंस लीग राउंड में 20 अंकों के साथ टॉप पर रही थी, जबकि राइजिंग पुणे सुपरजायंट टीम 18 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर रही थी. मुंबई ने 14 मैचों में 10 मैचों में जीत दर्ज की, जबकि स्टीव स्मिथ की कप्तानी में पुणे ने 14 मैचों में 9 मैच जीते थे.

मुंबई के इससे पहले के तीन फाइनल
मुंबई की टीम दो बार वर्ष  2113 और 2015 में आईपीएल चैंपियन रही थी जबकि 2010 में उसे चेन्‍नई सुपरकिंग्‍स से हारकर रनर अप रहना पड़ा था. आईपीएल के अपने दोनों फाइनल में मुंबई ने चेन्‍नई सुपर किंग्‍स को शिकस्‍त दी थी.  2013 में टीम ने चेन्‍नई को 23 रन से और 2015 में 41 रन से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था.

पुणे का पहला सीजन
2016 के सीजन में राइजिंग पुणे सुपरजाइंट की एंट्री धमाकेदार रही थी. इसने मौजूदा चैंपियन मुंबई इंडियंस को 9 विकेट से पहले मैच में ही मात दी थी, लेकिन वह आगे अपनी लय को बरकरार नहीं कर सकी. अगले चार मैचों में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. हार जीत का यह सिलसिला चलता रहा था और पूरे सीजन में टीम केवल 14 में से 5 मैच ही जीत सकी थी.
 
मुंबई का मजबूत पक्ष
मुंबई का मजबूत पक्ष यह है कि उसे एक-दो खिलाड़ियों के बाहर होने से फर्क नहीं पड़ता. जैसा कि हमने आखिरी लीग मैच में कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ देखा था. मुंबई ने इस मैच में अब तक नहीं खेले खिलाड़ियों को मौका दिया था और केकेआर को हराकर शीर्ष स्थान पर कब्जा कर लिया था. पूरे सीजन में मुंबई इंडियन्स के बल्लेबाजों खासतौर से नीतीश राणा, लेन्डल सिमंस, कीरन पोलार्ड, पार्थिव पटेल ने शानदार खेल दिखाया है, वहीं  हार्दिक पांड्या और उनके भाई क्रुणाल पांड्या टीम के लिए ट्रंप कार्ड साबित हुए हैं. डेथ ओवरों में जसप्रीत बुमराह का प्रदर्शन अच्छा रहा है . हार्दिक और वह मिलकर पुणे के बल्लेबाजों पर अंकुश लगा सकते हैं .

मुंबई का कमजोर पक्ष
मुंबई के लिए कप्तान रोहित शर्मा का फॉर्म में नहीं होना कमजोर कड़ी साबित हो सकता है. उन पर कप्तानी के साथ अच्छी पारी खेलने का भी दबाव होगा. रोहित लीग मैचों और पहले क्वालिफायर में में पुणे के खिलाफ अच्छी रणनीति नहीं बना पाए थे. गेंदबाजी भी बेहतर करनी होगी, क्योंकि उन्होंने पिछले मैच में 200 से अधिक रन लुटा दिए थे. श्रीलंका के लसिथ मलिंगा नई गेंद से महंगे साबित हुए हैं. उनका फॉर्म में आना जरूरी है. वैसे भी वानखेड़े स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों की ऐशगाह है लिहाजा बड़ा स्कोर बनने की उम्मीद है.

पुणे का मजबूत पक्ष
पुणे के लिए बल्लेबाजी में राहुल त्रिपाठी, कप्तान स्टीव स्मिथ और एमएस धोनी शानदार फॉर्म में हैं. उसके तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट (22 विकेट), शार्दुल ठाकुर (11 विकेट) और डैनियल क्रिश्चियन (9 विकेट) ने अच्छा प्रदर्शन किया है, वहीं स्पिन में ऑस्ट्रेलिया के एडम जम्पा पिछले कुछ मैचों से अच्छा खेल रहे हैं.

पुणे का कमजोर पक्ष : रहाणे का आउट ऑफ फॉर्म होना
पुणे की ओर से ओपनर अजिंक्य रहाणे का नहीं चलना चिंता का विषय है. ऑलराउंडर बेन स्टोक्स स्वदेश लौट गए हैं. ऐसे में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों पर फर्क पड़ेगा. वैसे क्वालिफायर एक में स्टोक्स का असर नहीं दिखा था. अब देखने वाली बात होगी कि फाइनल में उनकी कमी खलती है या नहीं.


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