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राहुल द्रविड़ की सलाह ने वाशिंगटन सुंदर को दी यह नई पहचान...

IPL के पिछले सीजन में अपनी ऑफ स्पिन से सभी को प्रभावित करने वाले वॉशिंगटन सुंदर करियर के शुरुआती दौर में बल्लेबाज के रूप में अपने करियर को परवान चढ़ते देखना चाहते थे.

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राहुल द्रविड़ की सलाह ने वाशिंगटन सुंदर को दी यह नई पहचान...

वाशिंगटन सुंदर ने आईपीएल के पिछले सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन किया था (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पिछले सीजन में अपनी ऑफ स्पिन से सभी को प्रभावित करने वाले वॉशिंगटन सुंदर करियर के शुरुआती दौर में बल्लेबाज के रूप में अपने करियर को परवान चढ़ते देखना चाहते थे, लेकिन साथी खिलाड़ियों और फिर राहुल द्रविड़ की सलाह के बाद उन्होंने गेंदबाजी को गंभीरता से लिया. यह वाशिंगटन सुंदर की गेंदबाजी में की गई मेहनत का कमाल है कि उन्‍हें अब देश के दमदार स्पिनरों में गिना जाने लगा है. सुंदर ने एक इंटरव्‍यू में अपने करियर के लिए बदलाव के दौर के बारे में बात की. वाशिंगटन सुंदर ने कहा कि उनकी ख्वाहिश बल्लेबाज बनने की थी, लेकिन वो बने ऑफ स्पिनर.सुंदर ने कहा, "मैं हमेशा से बल्लेबाज बनना चाहता था. लेकिन मेरे आसपास के जो लोग थे वो मेरे बारे में जानते थे और मेरी गेंदबाजी योग्यता की बातें करते थे. मैं इस पर विश्वास नहीं करता था, लेकिन कई बार मैंने मैचों में गेंदबाजी की और अच्छा प्रदर्शन किया और वहां से मुझे विश्वास आया. सुंदर ने कहा कि असल बदलाव तब आया जब अंडर-19 टीम में राहुल (द्रविड़) सर ने मेरी गेंदबाजी की तारीफ की फिर मैंने वहां से मैंने गेंदबाजी को अधिक गंभीरता से लेना शुरू किया." आईपीएल में हर टीम के स्पिनरों की अहम भूमिका रहती है. इस लीग में आज के दौर में स्पिनर हर टीम की जीत के लिए ट्रंप कार्ड हैं. हालांकि शुरुआत में ऐसा नहीं था और खेल के छोटे प्रारूप में स्पिनर सफल नहीं रहते थे. इस बदलाव के बारे में जब सुंदर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि स्पिनरों ने अपनी योग्यता में बदलाव किया है. उन्होंने कहा, "अगर आप टी-20 की शुरुआत देखेंगे तो स्पिनरों को काफी दिक्कत होती थी, लेकिन समय के साथ स्पिनरों की योग्यता में इजाफा हुआ है. उन्होंने अपने लिए नए रास्ते तलाश लिए हैं. स्पिनरों की लाइन-लेंग्‍थ काफी मायने रखती है हालांकि इसमें मैच-दर-मैच अंतर होता है. यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप उस समय कैसी गेंदबाजी करते हो." सुंदर आईपीएल के 11वें संस्करण में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू की ओर से खेल रहे हैं. उस टीम में भारत की राष्ट्रीय टीम के अहम सदस्य लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल हैं. चहल के साथ तालमेल के जबाव में सुंदर ने कहा कि वह चहल के साथ काफी कुछ सीख रहे हैं और दोनों की जोड़ी टीम के लिए असरदार साबित हो सकती है. बकौल सुंदर, "उनके साथ गेंदबाजी करना मेरे लिए काफी शानदार अनुभव रहा है. वह मेरे साथ अपने अनुभव साझा करते हैं. एक ऐसे शख्स के साथ गेंदबाजी करना जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी कम समय में काफी कुछ हासिल कर लिया हो उसके साथ गेंदबाजी करने से बेशक लाभ होता है. हम दोनों के बीच अच्छा तालमेल है जो मुझे लगता है कि टीम के लिए अच्छा होगा." गेंदबाजी के दौरान दोनों क्या बात करते हैं, इसके जवाब में  सुंदर ने कहा, "बल्लेबाज को लेकर, टीम को लेकर हम चर्चा करते हैं कि कैसे अलग-अलग बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजी करनी है और कैसे, किस विकेट पर गेंदबाजी करनी है." सीमित ओवरों में चहल और कुलदीप यादव भारतीय टीम का अहम हिस्सा हैं. ऐसे में सुंदर से जब पूछा गया कि क्या इन दोनों के रहते उनको टीम में जा पाना नामुमकिन लगता है तो उन्होंने इससे साफ इनकार किया. 18 साल के सुंदर ने कहा, "मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे जो भी मौके मिलते हैं उनमें मैंने अच्छा किया है. मुझे लगता है कि यह मुझ पर निर्भर है कि मैं कैसे अपने आप को और बेहतर करता हूं. कुछ चीजें मेरे नियंत्रण में नहीं हैं इसलिए मैं उन बातों पर ध्यान देता हूं जो मेरे नियंत्रण में हैं." आरसीबी टीम में ब्रेंडन मैक्‍कुलम, डिविलियर्स जैसे विश्व स्तरीय खिलाड़ी हैं, इनके साथ रहने से क्या सीखने को मिलता है, इस पर सुंदर ने कहा, "जो माहौल उनके रहने से बनता है जो आत्मविश्वास वो लेकर आते हैं मुझे लगता है कि उससे मैं काफी कुछ सीख सकता हूं. वे जिस मानसिकता के साथ मैच में जाते हैं उससे भी काफी कुछ सीखने को मिलता है. मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं इतने बड़े स्टार खिलाड़ियों से सजी टीम का हिस्सा हूं."

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टी-20, आईपीएल में बल्लेबाज स्पिनरों के खिलाफ ज्यादा आक्रामक होते हैं. इस स्थिति से निपटना कितना मुश्किल होता है? इसके जबाव में सुंदर ने कहा कि यह काफी मुश्किल होता है. उन्होंने कहा, "यह काफी मुश्किल होता है. इस आईपीएल में हर स्पिनर रन दे रहा है. विकेट भी काफी हद तक बल्लेबाजों के मुफीद होती हैं. लेकिन फिर भी यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस तरह से अपनी रणनीति को लागू करते हैं और किस बल्लेबाज के खिलाफ किस रणनीति को अपनाते हो और उसका पालन करते हो. यह काफी मायने रखता है. यह टूर्नामेंट काफी लंबा है और जैसे-जैसे समय बीतता जाता है विकेट धीमी होती जाएंगी तो स्पिनरों के लिए मददगार होती जाएंगी."

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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