जयपुर के सरकारी सेंटर में दस दिनों में मानसिक कमजोर 7 बच्चों सहित 11 की मौत

जयपुर के सरकारी सेंटर में दस दिनों में मानसिक कमजोर 7 बच्चों सहित 11 की मौत

अस्पताल में भर्ती एक मरीज।

जयपुर:

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक सरकारी सेंटर में 11 लोगों की मौत हो गई है। इन सभी लोगों की मौत पिछले कुछ दिनों में हुई है। एक डॉक्टर के मुताबिक इन सभी लोगों की इन्फेक्शन से मौत हुई है। सभी लोग मानसिक रूप से कमजोर थे। इस मामले में सरकार ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। तीन बच्चे आईसीयू में भर्ती हैं, जिनकी हालत नाजुक है।

आठ से 16 साल के सात बच्चों की मौत
इस मामले में पहली मौत 18 अप्रैल को हुई थी और 27 अप्रैल तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। भर्ती कराए जाने के 24 घंटों के भीतर ही पहली मौत हो गई थी। बाकी लोगों की मौत 23, 25, 27 तारीख को हो गई। मरने वालों में दो लड़कियां भी हैं जिनमें से एक की उम्र मात्र आठ वर्ष थी। मरने वालों में पांच लड़के भी थे जिनकी उम्र 16,15 और 10 वर्ष थी। इनमें से 4 ऐसे हैं जिनकी अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर ही मौत हो गई। तीन बच्चे अभी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। जबकि एक अन्य वार्ड में भर्ती है। सात को चिकित्सा के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।

गंदे पानी के कारण हुए बीमार
जयपुर शहर से 18 किलोमीटर दूर जामडोली में मानसिक विमंदित महिला एवं बाल पुनर्वास केंद्र में मानसिक रूप से कमजोर (मतिमंद) करीब 200 लोगों को रखा जाता है। इन सभी लोगों को कथित तौर पर गंदा पानी पीने के बाद उल्टी और दस्त की शिकायत हुई और तबियत बिगड़ने पर सभी को जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि सभी के लक्षण एक जैसे थे। जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अशोक गुप्ता ने बताया कि " सभी बच्चों को उल्टी दस्त हो रहे थे और पानी की कमी भी थी। कुछ बच्चों का ब्लड प्रेशर कम था। यह कोई बैक्टीरियल डिसीज थी जिसके कारण सेप्टिक शॉक हुआ है।"

सरकार घटना का कारण जानने की कवायद में जुटी
यह मामला प्रकाश में आने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल का दौरा किया है। जयपुर के अस्पताल से एक टीम बच्चों को देखने गई है। साथ ही सेंटर से पानी का सेंपल भी एकत्र किया गया है जिसकी जांच की जाएगी। सेंटर  में बाकी बच्चों की जांच के लिए भी एक टीम गई है। सरकार अब पता करने की कोशिश कर रही है कि आखिरकार ऐसा हुआ कैसे। सरकार मानती है कि वहां बच्चों और स्टाफ के लिए आरओ  नहीं है और सभी बोरिंग का पानी पीते हैं। टेस्टिंग के लिए पानी के सैंपल भी लिए गए हैं। समाज कल्याण और न्याय मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि "मैं किसी को क्लीनचिट नहीं दे रहा। कोई भी व्यक्ति किसी भी स्तर पर लापरवाही करेगा तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।"

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मानवाधिकार ने दिया सरकार को नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार को इन मौतों को लेकर नोटिस भेजा है  और 15 दिन में जवाब मांगा है। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है।

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सचिन पायलट ने सरकार को लताड़ा
अस्पताल पहुंचे कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि " यह आम बच्चे नहीं थे। यह विशेष बच्चे थे जिनको प्यार से रखरखाव की ज़रूरत होती है। उनके साथ ऐसी लापरवाही अपराधिक अनदेखी है।" इस केंद्र पर दो डॉक्टर हमेशा ड्यूटी पर होने चाहिए, लेकिन तमाम इंतज़ामों के बावजूद यहां के कर्मियों को कैसे पता नहीं चला कि एक के बाद एक बच्चे बीमार हो रहे हैं? यह जांच का विषय है।