जयपुर : चिट्ठी लिखकर पति ने दे दिया तलाक, पत्नी ने लगाई सुप्रीम कोर्ट में गुहार

जयपुर : चिट्ठी लिखकर पति ने दे दिया तलाक, पत्नी ने लगाई सुप्रीम कोर्ट में गुहार

अशर वारसी के साथ आफरीन (फाइल फोटो)

जयपुर:

एक 28 साल की मुस्लिम महिला ने तीन बार तलाक कहकर तलाक देने की प्रथा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह कदम उसने तब उठाया जब उसके पति ने उससे स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक कह डाला।

वर्ष 2014 में इंदौर में हुआ था निकाह
आफरीन का निकाह 2014  में इंदौर के एक वकील के साथ हुआ। एक साल के ही अंदर उसके पति ने उसे तलाक दे दिया और वह भी स्पीड पोस्ट के जरिए। आफरीन कहती है कि यह नाइंसाफी है। उसकी तलाक की इच्छा थी या नहीं, यह उससे एक बार भी नहीं पूछा गया। इस तरह चिट्ठी के जरिए तलाक अपने आप में क्रूरता है।

 
अशर और आफरीन की शादी की तस्वीर।

प्रताड़ना का आरोप
आफरीन रहमान की शादी इंदौर के एक वकील अशर वारसी से हुई थी। शादी के कुछ महीने बाद ही कथित रूप से उसकी प्रताड़ना शुरू हो गई। दहेज की मांग और आए दिने मारपीट ने उसके वैवाहिक जीवन में जहर घोल दिया। शादी के एक साल के अंदर जब आफरीन अपने मायके गई थीं तो पति ने उनसे संपर्क बंद कर दिया। तीन महीने बाद उन्हें एक चिट्ठी भेज दी।

स्पीड पोस्ट से भेजी चिट्ठी के जरिए दिया तलाक
आफरीन ने बताया कि "मुझे डायवोर्स का लेटर आया था,  27 जनवरी 2016 को। मुझे स्पीड पोस्ट भेजा गया। इसमें लिखा था मेरा और तुम्हारा रिश्ता मुस्लिम कानून में अब नहीं रहा।" उन्होंने कहा कि "आप अंदाज नहीं लगा सकते मेरे दिल पर क्या बीती है। जिस तरह से लेटर आया, कभी आपने सुना है कि किसी को स्पीड पोस्ट से तलाक आया हो? "

 
आफरीन और अशर वारसी।

गुजारे के लिए नियमित राशि की मांग
आफरीन ने अब इस तलाक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि वे अपने पति से समझौता करना चाहती थीं, लेकिन इस तरह के तलाक में महिलाओं के अधिकारों, इच्छाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है। वे चाहती हैं कि एक टाइम मैहर की रकम के आलावा उन्हें रेगुलर मेंटेनेंस भी मिले।

नेशनल वूमेन सोसायटी कर रही मदद
नेशनल वूमेन वेलफेयर सोसायटी से जुड़ीं नसीम अख्तर आफरीन की मदद कर रही हैं। उन्होंने बताया कि "हमने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, ताकि इसी को नहीं बल्कि दूसरी मुस्लिम महिलाओं को भी न्याय मिले।" मुस्लिम महिला संगठन लम्बे समय से मांग कर रहा है कि इस तरह का तलाक गैरकानूनी किया जाए। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

 
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