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जयपुर : डॉक्‍टरों ने समय पर नहीं किया इलाज, महिला ने मजबूरन सड़क पर दिया बच्‍चे को जन्‍म

अशोक की रिश्‍तेदार केसुअल, जोकि उनके साथ मौजूद थीं, 'लेबर रूम में आधे घंटे तक बैठे होने के बावजूद डॉक्‍टरों ने अशोक को नहीं देखा. इसके बाद उनकी सड़क पर डिलीवरी हुई और राहगीरों ने उनकी मदद की.

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जयपुर : डॉक्‍टरों ने समय पर नहीं किया इलाज, महिला ने मजबूरन सड़क पर दिया बच्‍चे को जन्‍म

खास बातें

  1. आरोप है कि डॉक्‍टरों ने लापरवाही बरतते हुए महिला का समय पर इलाज नहीं किया
  2. जयपुरिया हॉस्पिटल के डॉक्‍टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप.
  3. यह मल्टी स्पेशलिटी इकाइयों वाला एक सरकारी अस्पताल हैं.
जयपुर: जयपुर में मल्‍टी स्‍पेशलिटी जयपुरिया हॉस्पिटल के बाहर शुक्रवार रात एक महिला को सड़क पर ही अपने बच्‍चे को जन्‍म देना पड़ा. आरोप है कि डॉक्‍टरों ने लापरवाही बरतते हुए महिला का समय पर इलाज नहीं किया.

दरअसल, अशोक बाई, जोकि एक निर्माण श्रमिक के रूप में काम करती हैं, को उनके पांचवें बच्चे की डिलीवरी के लिए जयपुर के संगनेर क्षेत्र के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी में एडमिट कराया गया. 

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यहां प्रसव पीड़ा के दौरान उन्‍हें हाई ब्‍लड प्रेशर और अन्य उच्च जोखिम वाले लक्षणों के चलते डॉक्‍टरों ने नजदीकी जयपुरिया हॉस्पिटल में रेफर कर दिया. यह मल्टी स्पेशलिटी इकाइयों वाला एक सरकारी अस्पताल हैं. लेकिन अशोक का कहना है कि 'जब उन्‍हें लेबर रूम ले जाया गया तो डॉक्‍टरों ने उन्‍हें अटेंड नहीं किया. वे उन्‍हें इंतजार करने को कहते रहे. लेकिन जब उनकी प्रसव पीड़ा और तेज होने लगी तो डॉक्‍टरों ने उनसे कहा कि अगर आपको ज्‍यादा जल्‍दी है तो वह किसी अन्‍य बेहतर अस्‍पताल में चली जाएं, जिसके बाद उन्‍हें अपने परिवार के सदस्‍यों के साथ यहां से जाने को मजबूर होना पड़ा'.

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अशोक की रिश्‍तेदार केसुअल, जोकि उनके साथ मौजूद थीं, 'लेबर रूम में आधे घंटे तक बैठे होने के बावजूद डॉक्‍टरों ने अशोक को नहीं देखा. इसके बाद उनकी सड़क पर डिलीवरी हुई और राहगीरों ने उनकी मदद की. किसी ने कॉल कर एंबुलेंस बुलाई, जिसके बाद अशोक को वापस प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्‍टरों ने उनका उपचार किया'.

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सीएचसी सांगनेर इंचार्ज डॉक्‍टर राजेंद्र पटनी ने कहा कि 'जब महिला यहां वापस आईं, तो उनका बच्‍चा गर्भनाल से जुड़ा हुआ था. हमने उनका तुरंत उपचार करते हुए उन्‍हें ऑक्सीटोसिन दी. अब वह ठीक हैं और उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है'.

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वहीं, जयपुरिया अस्‍पताल के डॉक्‍टर अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि महिला स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी जोशी उनका उपचार कर रही थीं. 



अस्‍पताल की चिकित्‍सक डॉ. राधा अग्रवाल ने कहा, 'जब मैंने सुना कि महिला ने सड़क पर बच्‍चे को जन्‍म दिया है तो मैं एक नर्स के साथ बाहर आई, लेकिन महिला के परिजनों ने मुझसे हाथापाई की और उन्‍होंने मरीज़ को अस्‍पताल के अंदर ले जाने से इनकार कर दिया'.

महिला आयोग अब इस मामले की जांच कर रहा है. राजस्‍थान राज्‍य महिला आयोग की चेयरपर्सन सुमन शर्मा ने कहा, एक तरफ सरकार कहती है कि हमें अस्‍पताल में डिलीवरी करानी चाहिए और दूसरी तरह जयपुर के बेहतर अस्पतालों में ऐसा होता है... लिहाजा, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच करने जा रहे हैं. एक पांच सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी.


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