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इस्तीफे के बाद बोलीं महबूबा मुफ्ती, BJP के साथ गठबंधन पावर के लिए नहीं था

पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम कश्मीर में संवाद और सुलह - समझौता के लिए प्रयासरत रहेंगे.

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इस्तीफे के बाद बोलीं महबूबा मुफ्ती, BJP के साथ गठबंधन पावर के लिए नहीं था

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पत्रकारों को संबोधित किया.

खास बातें

  1. मुफ्ती साहब ने बड़े मकसद से हाथ मिलाया था
  2. सोचा था गठबंधन अच्छा चलेगा: महबूबा
  3. 'ज़ोर-ज़बरदस्ती की नीति नहीं चल सकती'
श्रीनगर: महबूबा मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद प्रेस कांफ्रेंस की. उन्होंने कहा कि मैंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया है. हमने एक बड़े वीजन के तहत गठबंधन किया था. मुफ्ती साहब ने बीजेपी के साथ बड़े मकसद से हाथ मिलाया था. मुफ्ती साहब ने सोचा था कि पीएम को एक बहुत बड़ा जनादेश मिला है और वह जम्मू कश्मीर के हालात के लिए कुछ काम करेंगे. हमें कई महीने लगे आपस में तालमेल बिठाने में. हमने सोचा था कि गठबंधन अच्छा चलेगा. उन्होंने कहा कि हम चाहते थे कि संवद हो. रमजान के दौरान संघर्ष विराम से लोग काफी खुश थे. पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम कश्मीर में संवाद और सुलह - समझौता के लिए प्रयासरत रहेंगे.
 
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उन्होंने कहा कि हमने यह गठबंधन पावर के लिए नहीं किया था. हमने 11 हजार नौजवानों के खिलाफ केस वापस करवाई. महबूबा ने कहा कि जोर जबर्दस्ती से जम्मू-कश्मीर में कोई नीति नहीं लागू हो सकती है. महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमने राज्यपाल से कहा है कि हम किसी और पार्टी को समर्थन नहीं देगें. उन्होंने कहा कि हमने यहां धारा 370 को महफूज रखा है.

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गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार में शामिल बीजेपी ने गठबंधन तोड़ दिया है. सीजफायर सहित कई मुद्दों पर  दोनों ही पार्टियों में काफी दिनों से टकराव चल रहा था. आज ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने महबूबा मुफ्ती सरकार में शामिल बीजेपी कोटे के सभी मंत्रियों और राज्य के सभी बड़े नेताओं को दिल्ली में आपात बैठक के लिये बुलाया था. इसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया. बीजेपी की ओर से समर्थन वापसी की चिट्ठी जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को सौंप दिया गया है. वहीं महबूबा मुफ्ती ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. मिल रही है जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने पीडीपी को इस बात की भनक तक लगने नहीं दी और सरकार से समर्थन वापस ले लिया. माना जा रहा है कि रमजान के बाद सीजफायर का फैसला वापस लेने के बाद से पीडीपी और बीजेपी के बीच गहरे मतभेद थे.

इससे पहले जम्मू कश्मीर में पीडीपी बीजेपी गठबंधन टूटने के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने श्रीनगर में राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात की. इसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में सरकार बनाने के लिए हमारी पार्टी किसी के साथ नहीं जाएगी. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि यहां राष्ट्रपति शासन ही लगे. उमर अबदुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमारे पास न तो 2014 जनादेश था और न ही 2018 में है. हम किसी के साथ गठबंधन नहीं करने जा रहे हैं. मैंने राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन ही लगे. 

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बता दें कि जम्मू एवं कश्मीर की 87-सदस्यीय विधानसभा के लिए वर्ष 2014 में 25 नवंबर और 20 दिसंबर के बीच पांच चरणों में चुनाव करवाए गए थे, जिनमें तत्कालीन सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस की हार हुई, और कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार चला रही पार्टी को सिर्फ 15 सीटों से संतोष करना पड़ा. दूसरी ओर, वर्ष 2008 में सिर्फ 11 सीटों पर जीती BJP ने इस बार 'मोदी लहर' में 25 सीटें जीतीं, और 52 दिन के गवर्नर शासन के बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की PDP को समर्थन देकर सरकार बनवा दी.

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टिप्पणियां 1 मार्च, 2015 को सत्तासीन हुए सईद का जनवरी, 2016 में देहावसान होने के कारण सरकार फिर संकट में आ गई, और राज्य में एक बार फिर गवर्नर शासन लगाना पड़ा. इस बार 88 दिन तक गवर्नर शासन लगा रहने के बाद सईद की पुत्री महबूबा मुफ्ती को समर्थन देकर BJP ने फिर सरकार बनवाई, जो मंगलवार को समर्थन वापसी के ऐलान के साथ ही गिर गई है.


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