जम्मू-कश्मीर में नेता और अलगाववादी नजरबंद, उधर गृहमंत्री अमित शाह का 'खास प्लान' शुरू

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर बड़ा दांव चलने वाली मोदी सरकार अब राज्य की जनता का विश्वास जीतने के लिए कई मोर्चे पर एक साथ काम कर रही है और मुख्य सचिव राजीव कंसल का दावा है कि 90 फीसदी पाबंदियां हटा ली गई हैं और स्थिति सामान्य हो रही है.

जम्मू-कश्मीर में नेता और अलगाववादी नजरबंद, उधर गृहमंत्री अमित शाह का 'खास प्लान' शुरू

गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के पंचों और सरपंचों के मुलाकात की थी

खास बातें

  • जनता से सीधे जुड़ने की कोशिश
  • पंचों और सरपंचों को साधने की कवायद
  • पंचों-सरपंचों को बीमा और पुलिस सुरक्षा मिलेगी
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर बड़ा दांव चलने वाली मोदी सरकार अब राज्य की जनता का विश्वास जीतने के लिए कई मोर्चे पर एक साथ काम कर रही है और मुख्य सचिव राजीव कंसल का दावा है कि 90 फीसदी पाबंदियां हटा ली गई हैं और स्थिति सामान्य हो रही है. लेकिन उनके दावे से उलट श्रीनगर के मेयर जुनैद आजिम मट्टू (Junaid Azim Mattu) ने कहा है कि भले ही कश्मीर की सड़कों पर लाशें ना दिख रही हों लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सब सामान्य है. इन बयानबाजी से अलग केंद्र सरकार अपने प्लान के मुताबिक काम कर रही है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जहां पाकिस्तान को कूटनीतिक स्तर पर जवाब दिया जा रहा है. वहीं गृहमंत्री अमित शाह एक खास प्लान पर काम कर रहे हैं. दरअसल मोदी सरकार की कोशिश है कि राज्य के क्षत्रपों और अलगाववादी नेताओं से बिना किसी संवाद के सीधे यहां की गांवों की जनता से जुड़ा जाए और पंचायत स्तर पर पैठ बनाई जाए. इसे अगर अमित शाह का प्लान 'बी' भी कहा जाए तो गलत न होगा. इसी प्लान के तहत सोमवार को गृहमंत्री शाह ने जम्मू कश्मीर के सरपंचों और पंचों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और आश्वान दिया कि  आतंकवादियों से खतरे का सामना करने वाले सभी पंचों और सरपंचों को पुलिस सुरक्षा के साथ ही दो-दो लाख रुपये का बीमा कवरेज दिया जाएगा.

यहां एक बात गौर करने वाली है कि बीते कई सालों से पंच और सरंपच आतंकवादियों की गोली शिकार हुए हैं. दरअसल आतंकावादी नहीं चाहते हैं कि राज्य में लोग मुख्य धारा में सरकार या सिस्टम का हिस्सा बनें. इससे आतंकवादी गतिविधियों की धक्का पहुंचता है. लेकिन सरकार की भी कोशिश है कि पंच और सरपंच जो समाज की सबसे निचली इकाई से आते हैं और जिनकी पकड़ जमीन स्तर पर होती है, के माध्यम से आम लोगों का विश्वास जीता जाए.  सोमवार को अमित शाह से मिले प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के अनुसार शाह ने कहा कि मानदेय बढ़ाने की पंचों और सरपंचों की मांग पर विचार किया जाएगा. गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार सरपंचों द्वारा मोबाइल कनेक्टिविटी बहाल करने के विषय पर गृह मंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में बहुत जल्द मोबाइल कनेक्टिविटी बहाल हो जाएगी.

शाह ने तीन प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की. उन्होंने जम्मू कश्मीर के विभिन्न जिलों के सरपंचों, फल उत्पादकों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की. श्रीनगर जिले के हरवन के एक ग्राम प्रधान जुबेर निषाद भट्ट ने संवाददाताओं को बताया कि गृह मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य में मोबाइल फोन सेवाएं अगले 15-20 दिनों में बहाल कर दी जाएंगी और उन सभी को दो दो लाख रुपये का बीमा कवरेज प्रदान किया जाएगा. साथ ही स्थितियां सामान्य होते ही जम्मू कश्मीर का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा होगी. शाह ने प्रतिनिधियों से कहा कि वे किसी अफवाह पर विश्वास नहीं करें.  प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि किसी की जमीन नहीं ली जाएगी और उद्योगों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के लिए सरकारी भूमि का उपयोग किया जाएगा. इससे न केवल स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि राज्य के लिए कर राजस्व भी बढ़ेगा. उसका उपयोग लोगों के कल्याण के लिए किया जाएगा.    

शाह ने जल्द ही विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती शुरू करने का वादा किया और कहा कि सरकार प्रत्येक गांव से कम से कम पांच उम्मीदवारों की मेरिट के आधार पर भर्ती सुनिश्चित करेगी. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह पंचायत सदस्यों की बैठक में मौजूद थे. उन्होंने बाद में संवाददाताओं से कहा कि योग्यता के आधार पर प्रत्येक गांव के कम से कम पांच युवाओं को नौकरियां दी जाएंगी.  कुपवाड़ा के एक सरपंच मीर जुनैद ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री से सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध किया और उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि प्रशासन हमें सुरक्षा प्रदान करेगा. उन्होंने कहा कि लोग अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के कारण खुश हैं क्योंकि उन्हें विगत में ‘‘मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवारों'' द्वारा डराया गया था.

मंत्री सिंह ने कहा कि किसी भी परिवार से मुक्त एक नया नेतृत्व जमीनी स्तर पर उभर रहा है और वे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने से खुश हैं. अब केंद्रीय कोष सीधे उन तक पहुंच जाएगा. गांदरबल जिले के एक सरपंच नजीर अहमद ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्थिति पूरी तरह से सामान्य है.    पुलवामा के एक सरपंच मनोज पंडित ने कहा कि गृह मंत्री ने उनसे कहा कि उन्हें प्रत्येक गांव और प्रत्येक घर का दौरा करना चाहिए और लोगों को अनुच्छेद 370 को हटाने के लाभों से अवगत कराना चाहिए.    

(इनपुट : भाषा से भी)

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