माकपा नेता यूसुफ़ तारिगामी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- सरकार जम्मू-कश्मीर को केंद्रीय जेल में क्यों नहीं तब्दील कर देती

यूसुफ़ तारिगामी (Yousuf Tarigami) ने कश्मीर के सभी बड़े नेताओं को जेलों में बंद रखने पर केंद्र पर निशाना साधा है.

माकपा नेता यूसुफ़ तारिगामी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- सरकार जम्मू-कश्मीर को केंद्रीय जेल में क्यों नहीं तब्दील कर देती

माकपा नेता यूसुफ़ तारिगामी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना है.

खास बातें

  • तारिगामी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
  • जम्मू-कश्मीर के नेताओं पर पीएसए लगाया गया है
  • दिल्ली चुनाव नतीजों पर दिल्ली की जनता को सराहा
नई दिल्ली:

वरिष्ठ माकपा (CPI(M)) नेता और जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) विधानसभा के पूर्व सदस्य यूसुफ़ तारिगामी (Yousuf Tarigami) ने कश्मीर के सभी बड़े नेताओं को जेलों में बंद रखने पर बुधवार को तंज कसते हुए कहा कि सरकार राज्य को केंद्रीय जेल के रूप में अधिसूचित क्यों नहीं कर देती. तारिगामी ने बुधवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में सरकारी दमनचक्र को देखते हुए केन्द्र सरकार पूरे राज्य को केंद्रीय जेल में तब्दील क्यों नहीं कर देती है, ऐसा करने से ना तो जनसुरक्षा क़ानून (PSA) लगाना पड़ेगा और ना ही अन्य दमनकारी क़ानूनों का सरकार को सहारा लेना पड़ेगा.

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उन्होंने जम्मू कश्मीर में पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाये जाने के बाद उत्पन्न हालात को मानवीय त्रासदी करार देते हुये कहा, ‘‘सरकार जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य होने के बार-बार दावे कर रही है, अगर राज्य में हालात सामान्य हैं तो सरकार वहां चुनाव क्यों नहीं कराती है.'

येचुरी (Sitaram Yechuri) और तारीगामी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव (DelhiElections2020) में आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत सुनिश्चित करने के लिये दिल्ली वालों का शुक्रिया अदा करते हुये कहा कि अंधेरे में उजाले की राह दिखाने के लिये दिल्ली की जनता बधाई की पात्र है.

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इस दौरान येचुरी ने जम्मू कश्मीर गए विदेशी राजनयिकों के प्रतिनिधिमंडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस तरह की क़वायद का कोई फ़ायदा नहीं है, क्योंकि जम्मू कश्मीर में पिछले साल पांच अगस्त के बाद से अब तक हालात नहीं सुधरे हैं.

उन्होंने जम्मू कश्मीर में स्थानीय प्रशासन द्वारा जमीनों के आवंटन पर सवाल उठाते हुये कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाये जाने का मुद्दा अभी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में इस मामले पर अदालत का फैसला आने तक सरकार को भू-आवंटन जैसे कामों से बचना चाहिये. 

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