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15 देशों के राजनयिक कश्मीर में, सेना से ली जानकारी, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों से मिले

विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने कश्मीर के दौरे के लिए 15 विदेशी राजनयिकों को भेजने की व्यवस्था की जिसका मकसद यह था कि वे हालात को सामान्य बनाने के प्रयासों का जमीनी स्तर पर अनुभव कर सकें.

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15 देशों के राजनयिक कश्मीर में, सेना से ली जानकारी, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों से मिले

15 देशों के राजनयिक मौजूदा स्थिति का जायजा लेने श्रीनगर पहुंचे.

खास बातें

  1. 15 देशों के राजनयिक कश्मीर पहुंचे
  2. कश्मीर के हालात से परिचय कराना मकसद- विदेश मंत्रालय
  3. यूरोपीय संघ इस दौरे से रहा दूर
श्रीनगर:

जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और उसे दो केंद्र शासित क्षेत्रों में विभाजित किये जाने के बाद भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ आई जस्टर समेत 15 देशों के राजनयिक मौजूदा स्थिति का जायजा लेने दो दिवसीय दौरे पर गुरुवार को श्रीनगर पहुंचे. राजनयिकों को विशेष विमान से श्रीनगर ले जाया गया. प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों ने राजनयिकों की अगवानी की. अधिकारियों ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल को सैन्य अधिकारियों के एक दल ने जानकारी दी. अधिकारियों ने कहा कि इस दौरान पाकिस्तान की तरफ से खड़ी की जाने वाली परेशानियों और कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति को अस्थिर करने के उनके प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई. राजनयिकों ने घाटी की नागरिक संस्थाओं के सदस्यों से मुलाकात की.

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इन राजनयिकों ने बाद में पूर्व मंत्री अलताफ बुखारी के नेतृत्व में आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल समेत राजनेताओं से भी मुलाकात की. इस दौरान स्थानीय नेताओं ने उन्हें अनुच्छेद 370 के रद्द होने के बाद के हालात के बारे में जानकारी दी. 
राजनयिकों के इस दौरे को लेकर विपक्षी दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं.

कांग्रेस ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह विदेशी राजदूतों के लिये “निर्देशित दौरा” तो करा सकती है लेकिन भारतीय राजनेताओं को वहां जाने की इजाजत नहीं दे रही. पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी आपत्ति राजनयिकों के इस दौरे के विषय में नहीं है. हमारी आपत्ति यह है कि जब हमारे नेता और सांसद जम्मू-कश्मीर में नहीं जा सकते तो फिर दूसरे देशों के राजदूतों को ले जाने का क्या मतलब है.'' 

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नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि जिस तरह से केंद्र सरकार के दावों की पुष्टि के लिये विदेशी राजदूतों का यहां दौरा कराया गया उससे वह निराश हैं. बयान में कहा गया, “पार्टी इन राजनयिकों से पूछना चाहती है कि अगर स्थिति सामान्य है तो पूर्व मुख्यमंत्रियों फारुक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत बहुत से लोग बीते 160 दिनों से हिरासत में क्यों हैं.” 

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने कहा कि विभिन्न देशों के दूतों का जम्मू-कश्मीर दौरा घाटी में सरकार द्वारा किए गए बंद को सामान्य दिखाने का प्रयास है. पीडीपी ने केंद्र को चुनौती दी कि वह राजनयिकों को हिरासत में रखे गए राजनीतिक नेताओं से मुलाकात करने की इजाजत दे. पीडीपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘‘आज प्रधानमंत्री कार्यालय राजनयिकों के दूसरे जत्थे को कश्मीर में हालात ‘दिखाने' लाया, यह सरकार द्वारा किए गए बंद को सामान्य दिखाने का प्रयास लगता है. प्रधानमंत्री कार्यालय को चुनौती देते हैं कि क्या वे इन विदेशी दूतों को 160 दिन से जेल में बंद राजनीतिक बंदियों से मुलाकात करने देंगे?'' 

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विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने कश्मीर के दौरे के लिए 15 विदेशी राजनयिकों को भेजने की व्यवस्था की जिसका मकसद यह था कि वे हालात को सामान्य बनाने के प्रयासों का जमीनी स्तर पर अनुभव कर सकें. उन्होंने कहा कि कश्मीर की यात्रा के लिये ऐसा ही एक आयोजन भविष्य में यूरोपीय संघ के राजनयिकों के संदर्भ में हो सकता है. 

राजनयिकों के इस प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका के अलावा बांग्लादेश, वियतनाम, नॉर्वे,मालदीव, दक्षिण कोरिया, मोरक्को और नाइजीरिया के राजनयिक भी शामिल हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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