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जमात-ए-इस्लामी पर बैन के बाद एक्शन: नेताओं के घर, संपत्तियां और दफ्तर सील, 4 दिन में 200 गिरफ्तार

जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर बैन लगाने के बाद सरकार ने बडी़ कार्रवाई की है और उनके नेताओं के कई घरों, दफ्तरों और संपत्तियों को सील कर दिया है.

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जमात-ए-इस्लामी पर बैन के बाद एक्शन: नेताओं के घर, संपत्तियां और दफ्तर सील, 4 दिन में 200 गिरफ्तार

Jamaat-e-Islami Jammu and Kashmir: जमात-ए-इस्लामी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई

खास बातें

  1. जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर लगा बैन.
  2. जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के नेताओं के घरों को सील किया गया.
  3. करीब 200 नेताओं को गिरफ्तार किया गया है.
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद अब भारत सरकार ने अलगाववादी समूह जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर (Jamaat-e-Islami Jammu and Kashmir) को कथित रूप से राष्ट्र विरोधी और विध्वंसकारी गतिविधियों के लिये गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत को प्रतिबंधित कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिबंध को लेकर अधिसूचना जारी की गई. जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर देश में राष्ट्र विरोधी और विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवादी संगठनों के साथ संपर्क में होने का आरोप है. जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर बैन लगाने के बाद सरकार ने बडी़ कार्रवाई की है और उनके नेताओं के कई घरों, दफ्तरों और संपत्तियों को सील कर दिया है.

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शनिवार को कश्मीर में कई जगहों पर अधिकारियों ने जमात-ए-इस्लामी  के कार्यकर्ताओं के घरों और संपत्तियों को सील किया. मजिस्ट्रेट ने जमात-ए-इस्लामी से जुड़े घरों और संस्थानों को सील करने का आदेश दिया था. इससे पहले सुरक्षा बलों ने पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले के बाद अलगाववादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी तथा जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं और समर्थकों को गिरफ्तार किया था. 

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माना जा रहा है कि बीते चार दिनों में करीब 200 से अधिक जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी पर पाबंदी लगाने के केंद्र के फैसले की शुक्रवार को निंदा की और कहा कि यह राज्य के राजनीतिक मुद्दे से बाहुबल से निपटने की केंद्र सरकार की पहल का एक अन्य उदाहरण है. 

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सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी (जेईएल) ही जम्मू कश्मीर राज्य के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन और हुर्रियत कांफ्रेंस के गठन के लिए जिम्मेदार है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह संगठन दशकों से अपने अलगाववाद एवं पाकिस्तान समर्थन एजेंडे के तहत राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए राज्य में अलगाववादी एवं आतंकवादी तत्वों को वैचारिक और साजो-सामान संबंधी सहयोग प्रदान कर रहा है. एक अधिकारी ने कहा, ‘जेईल (जेएंडके) जम्मू कश्मीर में सक्रिय सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के गठन के लिए जिम्मेदार है. पाकिस्तान के सहयोग से ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के गठन के पीछे भी जेएल का ही दिमाग है.'

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