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Exclusive:जम्मू-कश्मीर में न सरकार बनाएंगे और न ही बनने देंगे- बीजेपी की बैठक में लिखी गई घाटी की सियासी स्क्रिप्ट !

जम्मू-कश्मीर में में पीडीपी की अगुवाई में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच गठबंध की खिचड़ी पकने की आहट पाते ही बीजेपी ने पहले से मीटिंग कर रणनीति तय कर ली थी. जानिए पूरा वाकया.

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Exclusive:जम्मू-कश्मीर में न सरकार बनाएंगे और न ही बनने देंगे- बीजेपी की बैठक में लिखी गई घाटी की सियासी स्क्रिप्ट !

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के महासचिव राम माधव दोबारा बीजेपी के समर्थन से सरकार चाहते थे- सूत्र.

नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में जब पीडीपी की अगुवाई में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच गठबंधन की खिचड़ी पकने लगी, तभी बीजेपी में बेचैनी शुरू हो गई थी. घाटी के बदलते राजनीतिक हालात पर शीर्ष नेतृत्व की एक बैठक हुई. जिसमें हर पहलुओं पर विचारकर हाथ से फिसलती बाजी पर फिर पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनी. इस बैठक में बीजेपी की ओर से जम्मू-कश्मीर मसले के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव राम माधव भी शामिल रहे. भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक राम माधव चाहते थे कि बीजेपी के समर्थन से दोबारा घाटी में सरकार बनाकर महबूबा की अगुवाई वाले गठबंधन को करारा जवाब दिया जाए. राम माधव पीपुल्स कांफ्रेंस के लीडर सज्जाद लोन को समर्थन देकर बीजेपी के सपोर्ट से सरकार बनाना चाहते थे. मगर पार्टी आलाकमान ने किसी भी तरीके से जोड़-तोड़ करने से हाथ खड़े कर दिए.

उस बैठक में यह भी तय हुआ कि न तो खुद जोड़-तोड़ कर सरकार बनाएंगे और न ही किसी दूसरे को बनाने देंगे. कहा जा रहा है कि उस बैठक की परिणति आखिरकार जम्मू-कश्मीर विधानसभा के भंग होने के रूप में सामने आई. विधानसभा भंग होने की बात उसी मीटिंग में ही तय हो गई थी. सूत्र बताते हैं कि तीन दिन पूर्व ही राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. वहीं जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग होने से एक दिन पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी उनकी मुलाकात हुई थी. उसी दौरान गठबंधन के जरिए सरकार बनाने का दावा पेश होने की स्थिति में विधानसभा भंग का दांव चलने की बात तय हो चुकी थी.


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कैसे भंग हुई विधानसभा
जम्मू-कश्मीर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा करने वाला पत्र फैक्स से राज्यपाल को भेजा. हालांकि राजभवन ने ऐसा कोई फैक्स मिलने से इन्कार कर दिया. महबूबा के बाद पीपुल्स कांफ्रेंस के लीडर सज्जाद लोन (Sajad Lone) ने भी बीजेपी (BJP) के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया.दोनों ओर से दावेदारी की खबरें आने के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग कर दी. राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) ने कहा कि जम्मू कश्मीर के संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है. एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है.

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इससे पहले महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक को लिखे पत्र में कहा था कि राज्य विधानसभा में पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके 29 सदस्य हैं. उन्होंने लिखा, 'आपको मीडिया की खबरों में पता चला होगा कि कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस ने भी राज्य में सरकार बनाने के लिए हमारी पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है. नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों की संख्या 15 है और कांग्रेस के 12 विधायक हैं. अत: हमारी सामूहिक संख्या 56 हो जाती है.'

उधर, महबूबा के दावे के कुछ देर बाद ही पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के लीडर सज्जाद लोन ने भी राज्यपाल को चिट्ठी भेजने की बात कही. सज्जाद लोन का दावा है कि उन्हें बीजेपी के 26 विधायकों के अलावा 18 अन्य विधायक भी समर्थन कर रहे हैं और यह आंकड़ा बहुमत का है. जम्मू कश्मीर में 87 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 44 है. सज्जाद लोन ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक को एक पत्र लिखकर कहा था कि उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ें से अधिक विधायकों का समर्थन है.उन्होंने कहा, 'जम्मू कश्मीर में सरकार गठन के लिए फोन पर हुई हमारी बातचीत के बाद मैं जम्मू कश्मीर राज्य विधानसभा में भाजपा और 18 अन्य निर्वाचित सदस्यों के समर्थन से सरकार बनाने का औपचारिक रूप से दावा पेश करता हूं....' लोन ने कहा था कि जब उनसे कहा जाएगा तब वह भाजपा विधायक दल तथा अन्य सदस्यों के समर्थन का पत्र पेश करेंगे.

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