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फारूक अब्दुल्ला का बड़ा आरोप: सज्जाद लोन के पिता लेकर आए 'घाटी में बंदूक'

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने सज्जाद लोन के पिता, अब्दुल गनी लोन पर घाटी में आतंकवाद को लाने और बंदूक की संस्कृति विकसित करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है.

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फारूक अब्दुल्ला का बड़ा आरोप: सज्जाद लोन के पिता लेकर आए 'घाटी में बंदूक'

फारूक अब्दुल्ला (फाइल फोटो)

श्रीनगर :

जम्मू कश्मीर की सियासत अब भी गरम है. विधानसभा भंग को लेकर जम्मू-कश्मीर में चल रहे सियासी घमासान के बीच अब पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने सज्जाद लोन के पिता, अब्दुल गनी लोन पर घाटी में आतंकवाद को लाने और बंदूक की संस्कृति विकसित करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सज्जाद लोन के पिता अब्दुल गनी लोन कश्मीर में बंदूक लाने के जिम्मेदार थे. आगे उन्होंने खुलासा किया कि हालांकि, उन्होंने सज्जाद लोन के पिता को यह विचार त्यागने का अनुरोध भी किया था, मगर वो नहीं माने.

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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बारामुला में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि, जब पूर्व राज्यपाल जगमोहन ने मुझे निलंबित किया था, तब सज्जाद लोन के वालिद मेरे पास आए थे और कहा था, 'मैं पाकिस्तान जा रहा हूं. मैं बंदूक लाने वाला हूं. मैंने उसे कहा, बंदूक मत लाइए. मगर वो लाए. बंदूक नहीं लानी चाहिए. इसका जवाब दें वो.'


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एनआई ने ट्वीट किया है- '' उसके (सज्जाद लोन) वालिद मेरे पास आए थे, जब मुझे डिसमिस किया ता जगमोहन ने. ' मैं पाकिस्तान जा रहा हूं, मैं बंदूक लाने वाला हूं.' मैंने उसे कहा बंदूक मतल लाइए. मगर वो लाए. बंदूक नहीं लानी चाहिए थी. इसका जवाब दें वो.'' 


बता दें कि फारूक अब्दुल्ला का यह बयान उस समय आया है, जब पीपल्स कॉन्फ्रेंस के लीडर सज्जाद लोन ने फारूक पर 'वंशवादी राजनीति' करने का आरोप लगाया. इतना ही नहीं, लोन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर रियासत की विशेष पहचान को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया था. 
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दरअसल, सज्जाद लोन जम्मू-कश्मीर के सियासी घटनाक्रम में उस वक्त सुर्खियों में आ गए, जब राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने के बाद बयान दिया दिल्ली सज्जाद लोने को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी, इसलिए उन्होंने विधानसभा भंग कर दिया. राज्यपाल ने अपने बयान में कहा था कि वह सज्जाद लोन को मुख्यमंत्री बनाकर सूबे के लोगों के साथ बईमानी नहीं करना चाहते थे और वह इतिहास में एक बेईमान के नाम से नहीं पहचाना जाना चाहते थे. 
 
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