सुरक्षाबलों की नई मुसीबत: घाटी में विदेशी आतंकियों के बदले स्थानीय आतंकियों की बढ़ रही है तादाद

इस साल जिस तरह से कश्मीर में आतंकी मारे जा रहे हैं उससे सुरक्षाबलों को नई तरह की चिंता पैदा हो रही है.

सुरक्षाबलों की नई मुसीबत: घाटी में विदेशी आतंकियों के बदले स्थानीय आतंकियों की बढ़ रही है तादाद

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

इस साल जिस तरह से कश्मीर में आतंकी मारे जा रहे हैं उससे सुरक्षाबलों को नई तरह की चिंता पैदा हो रही है. वजह है कि मुठभेड़ में अब विदेशी आतंकियों की बजाय स्थानीय आतंकी बड़ी तदाद में मारे जा रहे हैं. अभी तक मरने वाले विदेशी और स्थानीय आतकियों का अनुपात 10:1 का होता था जो अब 2:10 में बदल गया है.

दबे स्वर में ये भी कहा जाने लगा है स्थानीय आतंकी अब कश्मीर में ही ट्रेनिंग पाने लगे हैं. हालांकि ये कैंप पीओके में चलने वाले ट्रेनिंग कैंप की तरह नहीं होते हैं बल्कि उनसे काफी छोटे होते हैं और कम संख्या में आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है. इस साल पहली जनवरी से लेकर अभी तक मारे गए 12 के करीब आतंकियों में 10 स्थानीय आतंकी थे. पिछले साल इसी अवधि में मरने वाले 12 में से 10 विदेशी आतंकी थे और दोनों की मौतों में अंतर यह था कि इस बार सारे कश्मीर के भीतर मारे गए हैं जबकि पिछले साल मरने वालों को एलओसी पर मार गिराया गया था.

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इस बारे में जब हमने सेना के बड़े अधिकारी से पूछा तो उन्होंने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि ये कोई बड़ी चिंता वाली बात नहीं है. इस बार सेना ने जो घुसपैठ रोकने के प्रयास किये हैं वो काफी हद तक तक सफल रहे हैं. इसलिेए सीमा पार बैठे आतंकियों के आका स्थानीय आतंकियों को कार्रवाई करने के लिए उकसा रहे हैं और वही मारे भी गए हैं. वैसे 2016 में जब हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद बड़ी तादाद में स्थानीय युवकों ने आतंक का दामन थामा था.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बुरहान वानी की मौत के बाद 190 से अधिक युवा आतंकवादियों के साथ हो लिए. सुरक्षाबलों के लिए स्थानीय युवक का आतंकी बनना और फिर यहीं ट्रेनिंग पाना एक खतरनाक संकेत की ओर इशारा करता है. इन युवकों को ट्रेनिंग पुराने आतंकी दे रहे हैं. कई बार इसके वीडियो भी समय समय पर आते रहते हैं.

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