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अनंतनाग आतंकी हमला : सफर के बीच में खरीददारी बस यात्रियों के लिए मंहगी पड़ी

राज्य सरकार की जो रिपोर्ट : आतंकियों का निशाना बनी बस का अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन हुआ था

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अनंतनाग आतंकी हमला : सफर के बीच में खरीददारी बस यात्रियों के लिए मंहगी पड़ी

अनंतनाग में आतंकी हमले की शिकार हुई गुजरात की बस का अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन हुआ था.

खास बातें

  1. पैंपोर में खबर फैली कि गुजराती यात्रियों का एक जत्था अलग है काफिले से
  2. इस्माइल के इलाके में कुछ ओवर ग्राउंड वर्करों ने आतंकियों की मदद की
  3. सड़क खोलने वाली पार्टी लौट गई थी, निगरानी के लिए दस्ता देर से पहुंचा
नई दिल्ली:

अमरनाथ यात्रियों की बस पर सोमवार की शाम को हुए हमले को लेकर धीरे-धीरे तस्वीर साफ हो रही है. इस मामले में कुछ कमी सुरक्षा में रही तो कुछ मुसाफिरों की ओर से. वे यात्रा के समय को लेकर लापरवाह रहे. यात्रियों ने श्रीनगर घूमने और फिर सफर के बीच खरीददारी करने में काफी समय बर्बाद किया. हालांकि यह बात गलत निकली है कि इस बस का रजिस्ट्रेशन नहीं था.

राज्य सरकार की जो रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय पहुंची है उसके मुताबिक अगर यह बस तय समय पर चली होती तो शायद आतंकियों की गोलियों से बच निकलती. एक अधिकारी ने बताया कि "इस बस ने जम्मू के रिसेप्शन सेंटर में खुद को सात जून को रजिस्टर करवाया. वह काफिले का हिस्सा बनकर बालटाल तक पहुंची."

इसके बाद आठ तारीख को बस के मुसाफिरों ने अमरनाथ गुफा में दर्शन किए. लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे सफर बदल गया. उसी रात बस में सवार लोग श्रीनगर वापस आ गए और वहां साइटसीइंग के लिए रुक गए. उसके बाद 10 जुलाई को वे फिर जम्मू जाने के लिए तैयार हुए.


आम तौर पर अमरनाथ यात्रियों की बसें सुबह छह बजे बालटाल से निकलती हैं और दो बजे तक बनिहाल सुरंग पार कर जाती हैं. यह बस 10 जुलाई को शाम 4.40 बजे श्रीनगर से निकली. यही नहीं, बस पैंपोर में रुक भी गई. वहां भी यात्रियों ने खरीददारी की. वहां से केसर खरीदा. शाम 6.30 के आसपास खानबल के पास बस पंचर हो गई. वहीं यात्रियों ने बस से उतरकर खाना खाया. बस जब संगम चौक से बटिंगु पहुंची तो उस पर फायरिंग हुई.

बताया जा रहा है कि पैंपोर में ही यह खबर फैली कि गुजराती यात्रियों का एक जत्था काफिले से अलग खरीददारी में लगा है. यह इलाका इस्माइल का माना जाता है. राज्य सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक "कुछ ओवर ग्राउंड वर्करों ने भी इन आतंकियों की मदद की."

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यह भी अब साफ हो चला है कि इस दौरान सुरक्षा में कसर इसलिए रह गई क्योंकि सड़क खोलने वाली पार्टी चार बजे के बाद लौट जाती है. बंकरों की निगरानी के लिए आने वाला दस्ता देर से पहुंचा. गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने एनडीटीवी इंडिया से कहा "पहले रोड ओपनिंग पार्टी करीब छह बजे शाम को विड्रॉ हो जाती थी लेकिन अब तय किया गया है कि कुछ घंटे वह और हाईवे की सुरक्षा करेगी."  

जाहिर है इतनी बड़ी यात्रा से पहले एक हल्की चूक सबको भारी पड़ी. सात यात्री मारे गए और करीब दो दर्जन घायल हुए.



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