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सरकार बनाने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस किसी के साथ नहीं जाएगी : उमर अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने पत्रकारों से कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में सरकार बनाने के लिए हमारी पार्टी किसी के साथ नहीं जाएगी.

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सरकार बनाने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस किसी के साथ नहीं जाएगी : उमर अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्लाह ने पत्रकारों से बात की.

खास बातें

  1. जम्मू कश्मीर में गिरी सरकार
  2. पीडीपी-बीजेपी गठबंधन टूटा
  3. उमर अबदुल्ला किसी के साथ नहीं जाएंगे
श्रीनगर: जम्मू कश्मीर में पीडीपी बीजेपी गठबंधन टूटने के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने श्रीनगर में राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात की. इसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में सरकार बनाने के लिए हमारी पार्टी किसी के साथ नहीं जाएगी. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि यहां राष्ट्रपति शासन ही लगे. उमर अबदुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमारे पास न तो 2014 जनादेश था और न ही 2018 में है. हम किसी के साथ गठबंधन नहीं करने जा रहे हैं. मैंने राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन ही लगे. 

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नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अबदुल्ला ने कहा कि हमें कोशिश करनी होगी की राज्य के जो हालात हैं वह दुरुस्त हो. उन्होंने कहा, हमने राज्यपाल से कहा है कि हमारी पार्टी राज्यपाल को पूरा समर्थन देगी. उन्होंने कहा कि राज्य में ज्यादा समय तक राज्यपाल शासन नहीं रहना चाहिए. हमारी पूरी कोशिश रहेगी की जम्मू कश्मीर में हालात जल्द से जल्द शांतिपूर्ण बनाए जाए. उमर अबदुल्ला ने कहा कि मैं राज्य के राजनीति हालात से खुश नहीं हूं. नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कहा कि बेहतर होता कि पैरों के नीचे से कालीन खींच लेने के बजाय महबूबा मुफ्ती की गरिमापूर्ण विदाई होती. 

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गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार में शामिल बीजेपी ने गठबंधन तोड़ दिया है. सीजफायर सहित कई मुद्दों पर  दोनों ही पार्टियों में काफी दिनों से टकराव चल रहा था. आज ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने महबूबा मुफ्ती सरकार में शामिल बीजेपी कोटे के सभी मंत्रियों और राज्य के सभी बड़े नेताओं को दिल्ली में आपात बैठक के लिये बुलाया था. इसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया. बीजेपी की ओर से समर्थन वापसी की चिट्ठी जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को सौंप दिया गया है. वहीं महबूबा मुफ्ती ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. मिल रही है जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने पीडीपी को इस बात की भनक तक लगने नहीं दी और सरकार से समर्थन वापस ले लिया. माना जा रहा है कि रमजान के बाद सीजफायर का फैसला वापस लेने के बाद से पीडीपी और बीजेपी के बीच गहरे मतभेद थे.

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बता दें कि जम्मू एवं कश्मीर की 87-सदस्यीय विधानसभा के लिए वर्ष 2014 में 25 नवंबर और 20 दिसंबर के बीच पांच चरणों में चुनाव करवाए गए थे, जिनमें तत्कालीन सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस की हार हुई, और कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार चला रही पार्टी को सिर्फ 15 सीटों से संतोष करना पड़ा. दूसरी ओर, वर्ष 2008 में सिर्फ 11 सीटों पर जीती BJP ने इस बार 'मोदी लहर' में 25 सीटें जीतीं, और 52 दिन के गवर्नर शासन के बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की PDP को समर्थन देकर सरकार बनवा दी.

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टिप्पणियां 1 मार्च, 2015 को सत्तासीन हुए सईद का जनवरी, 2016 में देहावसान होने के कारण सरकार फिर संकट में आ गई, और राज्य में एक बार फिर गवर्नर शासन लगाना पड़ा. इस बार 88 दिन तक गवर्नर शासन लगा रहने के बाद सईद की पुत्री महबूबा मुफ्ती को समर्थन देकर BJP ने फिर सरकार बनवाई, जो मंगलवार को समर्थन वापसी के ऐलान के साथ ही गिर गई है.


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