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जम्मू-कश्मीर में सियासी संकट के बीच सरकार गठन के लिए अब क्या हैं विकल्प?

भारतीय जनता पार्टी का पीडीपी से अलग होते ही और सरकार से समर्तन वापस लेते ही जम्मू-कश्मीर में अब राजनीतिक संकट का दौर शुरू हो गया है.

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जम्मू-कश्मीर में सियासी संकट के बीच सरकार गठन के लिए अब क्या हैं विकल्प?

महबूबा मुफ्ती और अमित शाह (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी का पीडीपी से अलग होते ही और सरकार से समर्थन वापस लेते ही जम्मू-कश्मीर में अब राजनीतिक संकट का दौर शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार और उसके बीच के रिश्तों पर आकलन करते हुए गठबंधन को तोड़ दिया है और इतना ही नहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन सभी वजहों को गिनाया है, जिसके चलते सरकार से बाय-बाय कहना पड़ा. हालांकि, बीजेपी ने खुद राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है. अब सबकी नजर इस बात को पर अटकी हुई है सियासी दलों के साथ जोड़-तोड़ कर अब जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की फिर से किसी तरह की कवायद शुरू होगी या फिर राष्ट्रपति शासन लागू होगा और दोबारा कुछ समय बाद चुनाव कराए जाएंगे. जम्मू-कश्मीर के सियासी हालात में अब क्या हैं विकल्प?

1. राज्य में राष्ट्रपति शासन 
अगर विकल्पों की बात करें तो सबसे अधिक कायास इसी बात पर लगाए जा रहे हैं कि राज्य में अब राष्ट्रपति शासन लगना लगभग तय है, क्योंकि भारतीय जतना पार्टी ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है. हालांकि, यह देखना होगा कि राष्ट्रपति शासन अगर लागू होता है तो क्या चुनाव इसी साल के अंत में कराए जाएंगे या फिर 2019 लोकसभा चुनाव के साथ?

2. कांग्रेस-एनसी-पीडीपी का गठबंधऩ
बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन जब हुआ था, तब भी लोगों ने आश्चर्य जताया था. अब जब दोनों अलग हो गई हैं तो इसमें किसी कोई आश्चर्य नहीं होगा जब कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस मिलकर पीडीपी के साथ सरकार बना ले और महबूबा मुफ्ती की सरकार को गिरने से बचा ले. यानी अब विकल्प है कि पीडीपी की सरकार तभी भी बचेगी जब कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन पीडीपी के साथ आए और सरकार बना ले. हालांकि, अभी फौरी तौर पर कांग्रेस पीडीपी को समर्थन से इनकार कर रही है.  

3. पीडीपी की सरकार को कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का बाहर से समर्थन 
सियासी संकट के बीच अब यह भी हो सकता है कि पीडीपी की सरकार को कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस बाहर से समर्थन दे, मगर किसी तरह का गठबंधन न करे. अगर आंकड़ों में बात करें तो बीजेपी के पास 25 सीटें हैं और कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिला ले तो यह आंकड़ा 27 हो जाएगा. इसका मतलब है कि पीडीपी की सरकार को कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गिरने से बचा सकती है. हालांकि, राजनीति में कुछ भी हो सकता है इसका ध्यान रखना होगा. 

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4. समर्थन के बदले उमर अब्दुल्ला को सीएम पद
राजनीति में कुछ भी संभव है. इसलिए देखा जाए तो बीजेपी के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस आ जाए तो इसमें किसी तरह की हैरानी नहीं होगी. बीजेपी के पास 25 सीटे हैं वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 सीटें हैं और निर्दलीय के पास 2 सीटे हैं. अगर जोड़ तोड़ की राजनीति हो तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन से वहां बीजेपी गठबंधन की सरकार बन सकती है, मगर ऐसी स्थिति में सीएम पद की मांग उमर अब्दुल्ला जरूर करेंगे. 
 
pdp


जम्मू एवं कश्मीर की 87-सदस्यीय विधानसभा के लिए वर्ष 2014 में 25 नवंबर और 20 दिसंबर के बीच पांच चरणों में चुनाव करवाए गए थे, जिनमें तत्कालीन सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस की हार हुई, और कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार चला रही पार्टी को सिर्फ 15 सीटों से संतोष करना पड़ा. दूसरी ओर, वर्ष 2008 में सिर्फ 11 सीटों पर जीती BJP ने इस बार 'मोदी लहर' में 25 सीटें जीतीं, और 52 दिन के गवर्नर शासन के बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की PDP को समर्थन देकर सरकार बनवा दी.

1 मार्च, 2015 को सत्तासीन हुए सईद का जनवरी, 2016 में देहावसान होने के कारण सरकार फिर संकट में आ गई, और राज्य में एक बार फिर गवर्नर शासन लगाना पड़ा. इस बार 88 दिन तक गवर्नर शासन लगा रहने के बाद सईद की पुत्री महबूबा मुफ्ती को समर्थन देकर BJP ने फिर सरकार बनवाई, जो मंगलवार को समर्थन वापसी के ऐलान के साथ ही गिर गई है.


VIDEO: बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लिया


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