NDTV Khabar

आजादी के 71 साल : सरकारें बदलती रहीं और घोटाले होते रहे, ये हैं भारत के 10 बड़े स्कैम

भ्रष्टाचार से निपटने के लिये आंदोलन भी हुये लेकिन शायद ही कोई सरकार रही है जिसके राज में घोटाला न हुआ हो

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
आजादी के 71 साल : सरकारें बदलती रहीं और घोटाले होते रहे, ये हैं भारत के 10 बड़े स्कैम

Independence Day 2018 : कब मिलेगी घोटालों से आजादी

नई दिल्ली: भारत बुधवार को 72वां स्वतंत्रता दिवस मनायेगा. आजादी के 71 साल बीत जाने के बाद आज हम गर्व कह सकते हैं कि देश ने विकास की एक लंबी यात्रा तय की है. ले​किन इस दौरान भारत को भ्रष्टाचार और घोटालों की लंबी मार पड़ी है. व्यवस्था में काबिज कुछ लोगों की वजह से अब तक देश के खजाने को अरबों रुपये का चूना लगाया है. भ्रष्टाचार से निपटने के लिये आंदोलन भी हुये लेकिन शायद ही कोई सरकार रही है जिसके राज में घोटाला न हुआ हो. कई लोग इस बात का भी दोष देते हैं कि जब से भारत उदारीकरण की राह पर चला है भ्रष्टाचार भी बढ़ा है. लेकिन सिर्फ इस बात को दोष नहीं ठीक नहीं है. देश की अर्थव्यवस्था जब सरकारी नियंत्रण में थी तब भी रिश्वत का खेल चरम पर था. सरकारी अधिकारियों को बिना पैसे दिये घर में फोन तक नहीं लगते थे. ऐसे ही कुछ बड़े घोटाले हुये हैं जो देश के सीने में खंजर की तरह धंसे हुये हैं. 

राफेल पर वीडियो वॉर: BJP ने कहा- सरकार ने 12 हजार करोड़ बचाए, कांग्रेस ने कहा- सोचा समझा घोटाला

1- पीएनबी घोटाला
इस साल पंजाब नेशनल बैंक में एक ऐसा घोटाला सामने आया जिसकी वजह से पूरी बैंक तबाही के कगार पर खड़ी हो गई. हीरा व्यापारी नीरव मोदी को करोड़ों रुपये का लोन दे दिया गया. इसमें बैंक के बड़े अधिकारी भी शामिल थे. लेकिन जब उससे लोन की रिकवरी शुरू हुई तो वह देश छोड़कर भाग गया और हमारी एजेंसियां मुंह ताकती रह गईं बीजेपी-कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे लेकिन देश के खजाने का पैसा लूट लिया गया. 

PNB घोटाला: इलाहाबाद बैंक की MD उषा अनंत को कार्यकाल के अंतिम दिन किया बर्ख़ास्त

2- विजय माल्या का घोटाला  
किंगफिशर के मालिक विजय माल्या ने भी बैंकों से 9 हजार करोड़ रुपये ले रखा था. लेकिन जब रिकवरी शुरू हुई तो वह भी रातो-रात देश छोड़कर भाग गया. अब उसके प्रत्यर्पण की कोशिश की जा रही है. 

राफेल विमान सौदे को लेकर PM पर राहुल का निशाना, बोले- मुझसे आंख नहीं मिला पाए मोदीजी, इधर-उधर देख रहे थे

3- जीप कांड ( 1948)
भारत सरकार ने लंदन की एक कंपनी से 2000 जीपों को सौदा किया था. सौदा 80 लाख रुपये का था. लेकिन केवल 144 जीपें ही आईं. घोटाले में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वीके कृष्ण मेनन का हाथ होने की बात सामने आई, लेकिन बाद में केस बंद कर दिया गया और मेनन को नेहरू कैबिनेट में शामिल कर लिया गया.

मोदी सरकार पर बरसे पूर्व मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा, कहा- बोफोर्स से बड़ा है राफेल घोटाला

4- बोफोर्स कांड
इस कांड के बाद राजीव गांधी की 'मिस्टर क्लीन' की छवि को गहरा धक्का लगा था. इसमें स्वीडन की कंपनी बोफोर्स से रिश्वत लेने की बात सामने आई थी. मामला था कि बोफोर्स तोपों के सौदों में नेताओं ने करीब 64 करोड़ रुपये का घपला किया था. इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सहित कई नेताओं पर आरोप लगा था कि इस डील को पक्का करने के लिए स्वीडन की कंपनी से रिश्वत ली थी.

CM केजरीवाल का फिर हमला, कहा- मोदी सरकार कर रही देश के साथ गद्दारी, CBI ने चोकसी के भागने में मदद की


5- सिक्योरिटी स्कैम (हर्षद मेहता कांड) (1992)
1992 में शेयर दलाल हर्षद मेहता ने धोखाधाड़ी करके बैंकों का पैसा शेयर बाजार में निवेश कर दिया था और जिससे बाजार को 5 हजार करोड़ का नुकसान हो गया था.

बिहार : शिवानंद तिवारी का सवाल, जब सरकार ही कटघरे में तो उसकी जांच एजेंसी पर कैसे भरोसा करें?

6- चारा घोटाला (1996)
यह देश के सबसे चर्चित घोटालों में से एक था. 1996 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई नेताओं पर आरोप लगा था कि राज्य के पशु पालन विभाग से धोखाबाजी से लिए गए 150 करोड़ रुपये कथित रुपये दबा लिए थे. इस घोटाले में लालू प्रसाद यादव को निचली अदालत दोषी भी ठहरा चुकी है.

IRCTC घोटाला : लालू यादव, राबड़ी और तेजस्वी को समन, 31 अगस्त को अदालत में पेश होने का निर्देश

7- ताबूत घोटाला (1999)
कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के शवों को उनके घर भेजने के लिए ताबूत खरीददारी में भी दलाली और रिश्वत की बात सामने आई थी. इस मामले में वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज को इस्तीफा देना पड़ा था हालांकि बाद में उनको क्लीनचिट दे दी गई. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं था. 


... तो इस वजह से भगोड़ा हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी ने ली एंटीगुआ की नागरिकता


8- कोयला घोटाला 
इस घोटाले को कोलगेट घोटाला भी कहा जाता है. इस घोटाले का खुलासा सीएजी की रिपोर्ट में हुआ था. जिसमें कहा गया था कि इसमें देश के खजाने को 1.86 लाख करोड़ का घोटाला हुआ है. इसमें केंद्र की तत्कालीन मनमोहन सरकार पर आरोप लगा था कि कोल ब्लॉक के आबंटन में गड़बड़ की गई है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट  ने मामले की सुनवाई के दौरान 1993 से लेकर 2010 तक आबंटित किए गए सभी कोल ब्लॉकों को रद्द कर दिया.


IRCTC घोटाला: लालू, राबड़ी और तेजस्‍वी को आरोपी के तौर पर समन किया जाए या नहीं, कोर्ट का फैसला 30 जुलाई को

9- 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला (2010)
यह घोटाला यूपीए-2 के कार्यकाल में सामने आया था जिसमें आरोप लगा था कि 2 स्पेक्ट्रम की नीलामी में गड़बड़ की गई है और रिश्ववत लेकर इसमें कंपनियों को स्पेक्ट्रम दिया गया है. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि 1,76, 645 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. इस मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा जिनके आरोप था कि 3 हजार करोड़ की रिश्वत ली है, और तमिलनाडु के पूर्व सीएम एम करुणानिधि के बेटी कनिमोझी को गिरफ्तार कर लिया गया था.

टिप्पणियां
प्राइम टाइम: क्या नियमों को तोड़कर राफेल डील में बदलाव?


कॉमनवेल्थ घोटाला
साल 2012 में इस घोटाले की वजह से देश की छवि धूमिल हुई थी. कॉमनवेल्थ खेल कराने के लिये मिले फंड में भारी अनियमितता बरती गई थीं. जांच में भी ये बातें सामने आई हैं और कई लोगों को सजा भी दी जा चुकी है. इसके अलावा और भी कई बड़े घोटाले हुए हैं जैसे यूरिया घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाला, सत्यम घोटाला, साइकिल आयात घोटाला, बीएचयू फंड घोटाला सहित कई कांड ऐसे हुए हैं देश की छवि पर दाग लगाते रहे हैं. सवाल इस बात का है जहां एक वर्ग ऐसा जो 2 जून की रोटी की मोहताज है वहीं लाखों-करोड़ों रुपए के होेने वाले ये घपले कब रुकेंगे.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement