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जश्न-ए-आज़ादी

  • भारत को गढ़ने वाले सात जननायक
    आजादी से पहले स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्र भारत में राष्ट्र निर्माण की चुनौती को पूरा करने में वेसै तो देश के सैकड़ों नेताओं ने अपना योगदान दिया लेकिन कुछ नेता ऐसे हुए जो न होते तो शायद भारत आज ऐसा नहीं होता जेसा कि आज है. स्वतंत्रता से पहले के गुलाम और पिछड़े भारत को आज के विकसित लोकतंत्र में रूपांतरित करने वाले इन नेताओं में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, इंदिरा गांधी, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया और अटलबिहारी वाजपेयी के नाम सबसे ऊपर आते हैं. ये वे नेता हैं जो जनता की आशाओं पर खरे उतरे और जिन्होंने देश को मजबूत नेतृत्व दिया.
  • अनाज हो या दूध उत्पादन, कृषि क्षेत्र में भारत का लोहा मानती है पूरी दुनिया
    हरित क्रांति से शुरू हुए कृषि के विकास का सफर श्वेत क्रांति, नीली, पीली क्रांति की ओर बढ़ता हुआ अग्रसर है. आज शायद ही कृषि का कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां दुनिया हमारा लोहा न मानती हो.
  • सात क्षेत्र, जिनमें हिन्दुस्तान ने लिखी विकास की नई इबारत...
    15 अगस्त 1947 के बाद देश ने विकास की अपनी नई इबारत लिखनी शुरू की. देश को आजादी के बाद अपने लिए एकदम नए रास्ते खोजने थे और नए तरीके से देश का समुचित विकास करना था.
  • सात कंपनियां, जिन्होंने सफलता के परचम फहराए...
    आजादी के बाद देश में बहुत कुछ बदला. तरक्की के नए कीर्तिमान गढ़े गए और देश ने अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त होकर धीरे धीरे अपने पैरों पर न सिर्फ खड़े होना सीखा बल्कि आज वर्तमान में युवाओं के लिए नए उदाहरण भी गढ़ दिए.
  • आज़ादी से अब तक कितनी बदलीं जनता की सवारियां
    15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ. पूरा देश जश्न के माहौल डूबा और देश ने तरक्की के नए नए पायदान चढ़ना आरंभ कर दिया. तमाम क्षेत्रों में देश ने 1947 से लेकर अब नए नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं. अगर सवारियों की बात की जाए तब आजादी के समय भारतीय समाज में धीमें धीमें साइकिल का चलन आया. गांव देहात में कुछ एक लोगों के पास ही साइकिल हुआ करती थी.
  • सात भयावह त्रासदियां, जिनसे दहल उठा था देश...
    आजादी के बाद देश ने काफी तरक्की की है. कृषि, विज्ञान से लेकर अंतरिक्ष तक अपना प्रभुत्व जमा लिया है, और एक से बढ़कर एक नई तकनीक भी विकसित की हैं, लेकिन कुछ त्रासदियों का भी सामना किया, जिन्होंने हमारी रफ्तार को थामने की कोशिश की.
  • जब हिंदी साहित्य में छलका भारत-पाकिस्तान विभाजन का दर्द
    भारत और पाकिस्तान बंटवारे पर आधारित हिंदी साहित्य से सात चुनिंदा किताबें और कहानियां...जिन्हें पढ़कर इस विभीषिका को समझा जा सकेगा...
  • 70 साल की 70 उपलब्धियों ने देश का तिरंगा किया बुलंद
    70 सालों में भारत को कभी आपातकाल ने घेरा तो कभी आतंकवाद के खूनी पंजों का सामना करना पड़ा, बावजूद इसके देश ने कई उपलब्धियां हासिल कर अपने तिरंगा को बुलंद किया.
  • इन 7 राजनेताओं की हत्याओं से सहम गया था देश
    अब्राह्म लिंकन, जॉन एफ कैनेडी, बेनजीर भुट्टो की हत्या उस समय की गई जब वे राजनीतिक जीवन के शीर्ष दौर में थे. आजादी के बाद भारत ने कई बड़ी राजनीतिक हत्याओं की पीड़ा सही हैं. भारत को आजादी मिले छह महीने भी नहीं हुए थे कि महात्मा गांधी की हत्या ने दुनिया को हिला दिया था. ये क्रम यहीं नहीं रुका और कई अन्य हस्तियों की असामयिक मौत का कारण बना.
  • जब इन 7 बड़े आतंकी हमलों से दहल उठा था हिन्दुस्तान
    आतंकवाद से आज पूरी दुनिया झुलस रही है. पिछले कुछ वर्षों में भारत आतंकियों के निशाने पर सबसे ज्यादा रहा है लेकिन हर बार की तरह देश इससे संभला और फिर प्रगति की नई दिशा में आगे बढ़ा. चलिए एक नजर देश में हुए 7 बड़े आतंकी हमलों पर डाल लेते हैं :
  • 7 विज्ञापन, जो बन गए समूचे देश की धड़कन
    भारतीय विज्ञापनों की दुनिया अब सिर्फ मनोरंजन या प्रमोशन से आगे निकल गई है. अब कोशिश अपने उत्पाद को बेचने के साथ ही संदेश देने की भी रही है.
  • सैटेलाइट चैनलों ने बदली TV की दुनिया, 'तारा' से 'Bigg Boss' तक का सफर
    सैटेलाइट चैनलों ने टीवी के दर्शकों की दुनिया ही बदल दी, सास बहू के सीरियल से गुजरता हुआ यह सफर रियलिटी शो और इंफोटेनमेंट तक पहुंच चुका है.
  • फ्यूजन फूड की प्रयोगशाला बन गया है किचन
    आज खान-पान अपनी सारी सीमाओं को तोड़ चुका है. यह विदेश से भारत पहुंच रहा है और भारत से विदेश. सात दशक में बदल गया है खानपान का संसार
  • आज़ादी के बाद का साहित्य और 7 यादगार किताबें
    जिस तरह जीवन बदला है, उसी तरह साहित्य भी बदला है. वह भूमंडलीकरण के दौर में आधुनिकता से परे नहीं है, लेकिन कुछ किताबें जो आज भी हमारे जेहन में बसी हैं
  • दूरदर्शन के 7 शो, जिन्‍हें कभी नहीं भूल पाएंगे आप
    आजादी के 70 वर्षों में देश में काफी कुछ बदला है. पहले जहां घरों में एंटरटेनमेंट के नाम पर सिर्फ 'दूरदर्शन' ही होता था, वहीं आज हमारे पास हजारों चैनल्‍स हो गए हैं. लेकिन फिर भी दूरदर्शन के जमाने में कुछ ऐसे सीरियल्‍स थे, जिनकी कमी हमें आज भी महसूस होती है.
  • वे 7 फिल्में, जो सिनेमाघर पर चिपकीं, तो उतरने का नाम नहीं लिया
    आज अगर कोई फिल्म 50 दिन या 100 कर ले तो बड़ा जश्न हो जाता है, लेकिन एक समय था जब फिल्में 25-50 हफ्ते यूं ही कर जाती थीं.
  • स्‍वतंत्रता से लेकर आज तक की भारत की विकास यात्रा
    अब इन दोनों देशों को आजाद हुए सात दशक हो चले हैं और भारत विकास के कई पड़ाव पार कर चुका है. इसमें भारत ने बैलगाड़ी से लेकर एयर इंडिया तक का सफर तय किया है.
  • खेल जगत में इन 7 खिलाड़‍ियों ने किया तिरंगा बुलंद
    बैडमिंटन, कुश्‍ती, टेनिस शतरंज और बॉक्सिंग जैसे खेलों में देश के खिलाड़ि‍यों ने अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है. यह सही है कि देश में अन्‍य खेलों के मुकाबले क्रिकेट को बहुत ज्‍यादा अहमियत दी जाती है लेकिन क्रिकेट से इतर कई खिलाड़ि‍यों ने अपने प्रदर्शन से खेलप्रेमियों का दिल पर राज किया है.
  • ओलिंपिक में भारत ने इन उपलब्धियों के जरिये दिखाई ताकत
    खेलों के महाकुंभ ओलिंपिक खेलों में भारत का अब तक का प्रदर्शन बहुत अच्‍छा नहीं रहा है. हॉकी की टीम स्‍पर्धा को छोड़ दें तो भारत के पास व्‍यक्तिगत स्‍पर्धा का केवल एक स्‍वर्ण है. यह स्‍वर्ण अभिनव बिंद्रा ने 2008 के बीजिंग ओलिंपिक निशानेबाजी इवेंट में जीता था. कई वर्षों तक भारतीय दल के ओलिंपिक खेलों में जाने और बिना पदक या एकाध पदक के साथ आने का सिलसिला चलता रहा.
  • स्वतंत्र भारत के वे 7 आंदोलन, जिन्होंने देश को दी नई दिशा
    भारत को अंग्रेजों से भगाने और देश को आजाद कराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने कई तरह के आंदोलनों चलाए. आवाज उठाने और अपनी मांग को मनवाने के लिए आजादी के समय आंदोलन करने की प्रथा अभी भी जारी है. प्रतिदिन देश में ब्लॉक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों आंदोलन होते हैं.
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