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झारखंड में गरीबों को 'फर्जी' बताकर राशन कार्ड रद्द कर रही है सरकार...

2 मई 2017 को  झारखण्ड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने लिखित आदेश दिया दिया था कि आधार नहीं होने की वजह से राशन कार्ड रद्द नहीं होगा. लेकिन बावजूद इसके आधार नंबर  नहीं जुड़ने के कारण राशन कार्ड रद्द कर दिया गया. सवाल यह है कि अगर अधिकारी मंत्री की नहीं

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झारखंड में गरीबों को 'फर्जी' बताकर राशन कार्ड रद्द कर रही है सरकार...

बीते दिनों झारखंड में भूख से एक बच्ची की मौत हो गई थी.

खास बातें

  1. झारखंड में गरीबों को 'फर्जी' बताकर राशन कार्ड रद्द कर रही है सरकार
  2. बीते दिनों झारखंड में भूख से एक बच्ची की मौत हो गई थी
  3. पीड़ित परिवार को इसलिए राशन नहीं मिला क्योंकि उनके पास आधार नहीं था
रांची:

आधार नहीं था इसलिए जीवन का आधार भी गया, बच्ची को सियासत की समझ कहां थी, कहां पता था कि राशन के लिए आंखों की पुतलियों और उंगलियों के छाप सरकार को चाहिए. चाहे तुम्हारी आंखें ही क्यों न पथरा जाएं, इससे भी उन्हें परहेज न होगा. वैसे तुम्हारी मौत को मलेरिया, टाइफाइड या ना जाने क्या क्या कारण से हुई बताने को पूरा अमला लग गया है. यह सिस्टम का एक भद्दा मजाक ही  है कि जिस पीड़ित मां को सरकारी राशन दुकानदार पहचान रहा था, उनका राशन कार्ड भी है, वह गरीब भी हैं, गांव के लोग भी उसे पहचान रहे हैं लेकिन सिर्फ एक मशीन उसे नहीं पहचान पा रही है, इसके बाद एक मां राशन से वंचित हो जाती है और उसकी बेटी भूख से मर जाती है.

दिनांक 22 मई 2017 को झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा द्वारा सरकार के पदाधिकारियों के साथ एक वीडियो कांफ्रेंसिंग की गयी, जिसमें जिले के जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को आदेश दे दिया गया कि जिनके राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं  हैं उनके नाम राशन कार्ड की सूची से हटा दिए जाएं. आदेश के बाद झारखंड सरकार द्वारा 11.64 लाख राशन कार्ड को सिर्फ इसलिए खत्म कर दिया गया क्योंकि वह आधार से लिंक नहीं था. 1000 दिन की उपलब्धि गिनाते हुए खाद्य आपूर्ति विभाग ने यह तो बतला दिया कि 11.64 लाख “फर्जी” एवं “ अयोग्य” लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं, लेकिन यह नही बताया कि कितने भ्रष्ट डीलरों के लाइसेंस रद्द हुए कितने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कारवाई हुई. जबकि आये दिन भ्रष्ट डीलरों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होते रहते  हैं.


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2 मई 2017 को  झारखण्ड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने लिखित आदेश दिया दिया था कि आधार नहीं होने की वजह से राशन कार्ड रद्द नहीं होगा. लेकिन बावजूद इसके आधार नंबर नहीं जुड़ने के कारण राशन कार्ड रद्द कर दिया गया. सवाल यह है कि अगर अधिकारी मंत्री की नहीं  सुन रहे तो खाद्य आपूर्ति विभाग किसके कहने पर चल रहा है? लेकिन सच्चाई यह है की राशन कार्ड रद्द होने के कई ऐसे मामले आये हैं जिसमे स्पष्ट है कि  मेहनतकश इमानदार लोगों को  "फर्जी" एवं "अयोग्य" बतलाकर उनका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया है. जमीनी हकीकत जानने के लिए हम निकल पड़े  रांची से करीब 70 किलोमीटर दूर  झारखण्ड के खूंटी  ज़िले के बारूडीह गांव.   
 

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इस गांव  में करीब 60 घर है और यहां करीब 300 परिवार रहते है. यहां मुझे मिले 40 वर्षीय  नारदे  मुंडू, इनके परिवार में 6 लोग हैं पेशे से मजदूर हैं और महीनें  में करीब 5 से 6 हज़ार रुपये कमा लेते है. इनके पास राशन कार्ड है और इनको पहले राशन भी मिलता था, लेकिन आधार के ना  होने के कारण  इनका राशन कार्ड सरकार के सिस्टम से काट दिया गया और बताया गया कि आप अपना और अपने परिवार का आधार कार्ड बनाकर, राशन कार्ड से लिंक करा लें. नारदे  मुंडू अपना और अपने परिवार का आधार कार्ड बनवाकर कई महीनों से सरकारी दफ्तर का चक्कर काट रहे है, लेकिन अभी तक उनका राशन कार्ड नहीं बना है.

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उसी गांव  के ये है पिताई  रुण्डा उम्र करीब 50 साल, परिवार में कुल 8 लोग है और खेती बारी कर के घर का गुजारा  होता है. ये कहते है की जब कंप्यूटर नहीं था, उस समय मुझे राशन मिलता था लेकिन जब से कंप्यूटर आया है तब से राशन नहीं मिलता है. वजह बताते है की हमलोगों के पास आधार कार्ड नहीं है. अब नया आधार कार्ड बनाने के बाद ही राशन कार्ड में नाम जुड़ेगा तब जाकर राशन मिल सकता है और साथ ही वे कहते है की घर का गुजारा  बहुत मुश्किल से हो रहा है. कारण राशन हमलोगों का बंद कर दिया गया है.

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इसी गांव में मुझे मिले मुंदरा रुण्डा, उम्र करीब 35 साल, पेशे से मजदूर है. महीने में करीब 5000 हज़ार रुपये कमा लेते है, इनके परिवार  में 6 लोग है. पुरे परिवार में सिर्फ मुदरा रुण्डा के पास ही आधार कार्ड है.  बाकि घर के सदस्यों के पास आधार कार्ड नहीं है जिसके कारण राशन  कार्ड से मुंदरा रुण्डा को छोड़ घर के 5 लोगों  का नाम काट दिया गया.अब ये करीब 7 महीनों से सरकारी दफ्तर का चक्कर काट रहे  है. ये मात्र चंद नाम हैं. झारखण्ड  में ऐसे कई  जरूरतमंद लोग मिल जायेंगे, जिनका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया है.

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खूंटी में जब राशन कार्ड रद्द होने की शिकायत प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से की गयी तो  बताया गया कि आधार कार्ड जमा नहीं करने की वजह से राशन कार्ड रद्द कर दिया गया होगा, लेकिन हम जांच कर जल्द ही सभी को राशन कार्ड निर्गत कराएंगे. व्यवस्था की ऐसी नाकामी किसी भी किमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती. एक मां के कोख में पसरे सन्नाटे, उसकी वेदना को हम सभी को समझना होगा.



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