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दिल्‍ली की तीन बच्चियों के बाद अब झारखंड में ‘भूख’ से आदिवासी की मौत

झारखंड के रामगढ़ जिले में 40 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति की पत्नी ने दावा किया कि भूख के चलते उसके पति की मौत हो गई. महिला के अनुसार उसके पास राशन कार्ड नहीं था.

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दिल्‍ली की तीन बच्चियों के बाद अब झारखंड में ‘भूख’ से आदिवासी की मौत

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. पत्नी का दावा, भूख के चलते पति की हुई मौत
  2. जिला अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है
  3. अधिकारियों ने कहा, बिरहोर की मौत ‘बीमारी’ के चलते हुई
रांची :

झारखंड के रामगढ़ जिले में 40 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति की पत्नी ने दावा किया कि भूख के चलते उसके पति की मौत हो गई. महिला के अनुसार उसके पास राशन कार्ड नहीं था. आपको बता दें कि दिल्‍ली में भूख से आठ साल की मानसी, चार साल की शिखा और दो साल की पारुल की मौत हुई थी. इन तीनों बच्चियों का शव मंडावली में एक कमरे से बरामद हुआ था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि तीनों की मौत मंगलवार को तड़के कुपोषण के चलते हुई. बच्चियों के शव के पोस्टमार्टम में खाने का एक भी अंश नहीं मिला था. डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें सात-आठ दिन से खाना नहीं मिला था.

 

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झारखंड के रामगढ़ के आदिम बिरहोर आदिवासी से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र बिरहोर की गुरुवार को मांडू खंड के नवाडीह गांव में मौत हो गई. नवाडीह गांव यहां से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बहरहाल, जिला अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है और कहा कि बिरहोर की मौत ‘बीमारी’ के चलते हुई. बिरहोर की पत्नी शांति देवी (35) ने बताया कि उसके पति को पीलिया था और उसके परिवार के पास इतना पैसा नहीं था कि वे उसके लिये डॉक्टर द्वारा बताया गया खाद्य पदार्थ और दवाई खरीद सकें. शांति ने बताया कि उसके परिवार के पास राशन कार्ड नहीं था जिससे वे राज्य सरकार की सार्वजनिक वितरण योजना के तहत सब्सिडी वाले अनाज प्राप्त कर पाते. 

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छह बच्चों का पिता बिरहोर परिवार में एकमात्र कमाने वाले सदस्य था. उसे हाल में यहां के राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेंज में भर्ती कराया गया था लेकिन उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी थी. मांडू के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मनोज कुमार गुप्ता ने आदिवासी व्यक्ति की भूख से मौत की बात से इनकार किया है. उन्होंने गुरुवार को बिरहोर के घर का दौरा किया और दावा किया कि बिरहोर की मौत बीमारी के चलते हुई. बीडीओ ने स्वीकार किया कि परिवार के पास राशन कार्ड नहीं था. उन्होंने शांति देवी को अनाज और परिवार के लिये 10,000 रुपये दिये. उन्होंने कहा, ‘हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि उनके परिवार का नाम सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी युक्त राशन पाने वालों की सूची में क्यों नहीं दर्ज था.’    

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