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झारखंड में सरकार का सर्वे, लोगों ने कहा कैश के बजाय सरकारी दुकानों से चाहिए सस्ता राशन

झारखंड के खाद्य मंत्री सरयू राय ने एनडीटीवी इंडिया से कहा कि हमें पता चल रहा है कि लोग डीबीटी से खुश नहीं हैं.

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झारखंड में सरकार का सर्वे, लोगों ने कहा कैश के बजाय सरकारी दुकानों से चाहिए सस्ता राशन

एक प्रज्ञा केंद्र में डीबीटी का पैसा निकालने के लिए लगी लोगों की लाइन

खास बातें

  1. रांची में कराया गया सर्वे
  2. राज्य सरकार केंद्र सरकार को लिखेगी पत्र
  3. लोग चाहते हैं सस्ता राशन
नई दिल्ली:

झारखंड की राजधानी रांची के एक ब्लॉक में कराए गए सर्वे में जनता ने सस्ते राशन की जगह लाई गई डीबीटी यानी डायरेक्ट बैनेफिट ट्रांसफर स्कीम को नकार दिया है. ये सर्वे रांची के नगरी ब्लॉक में कराया गया है. झारखंड सरकार के सोशल ऑडिट यूनिट द्वारा कराए गए इस सर्वे में  8 हजार से ज्यादा लोगों से राय पूछी गई. वैसे झारखंड सरकार दावा कर रही है कि वो 100 प्रतिशत लोगों से उनकी राय जानेगी. हालांकि अभी तक सर्वे के आखिरी नतीजे नहीं आए हैं लेकिन झारखंड के खाद्य मंत्री सरयू राय ने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि परिणाम वही हैं जिसकी उन्हें आशंका थी. सरयू राय ने एनडीटीवी इंडिया से कहा कि हमें पता चल रहा है कि लोग डीबीटी से खुश नहीं हैं. हम सारी जानकारी केंद्र सरकार को भेजेंगे और इस बारे में उचित कदम उठाने को कहेंगे. गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में झारखंड के नगरी ब्लॉक में ये प्रयोग शुरू किया जिसमें पीडीएस के तहत दिए जाने वाले सस्ते राशन की जगह सीधे लोगों के खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाता है ताकि वो राशन की दुकान से अनाज़ खरीद सकें. पहले लोग राशन की दुकान से 1 रुपये प्रति किलो के हिसाब से राशन लेते थे.

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अब सरकार ने 31 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करना शुरू किया है. लेकिन डीबीटी स्कीम पर कई सवाल खड़े हुए. सरकार के सर्वे के दौरान नगरी के लोगों ने डीबीटी स्कीम को लेकर कई परेशानियां गिनाईं. एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के हिसाब से लोगों ने कई समस्याएं गिनाई हैं जिनमें खाते में वक्त पर पैसा न आना, मृत व्यक्ति के खाते में डीबीटी का पैसा आना, बुज़र्गों के खाते में पैसा आने पर बैंक तक जाने की दिक्कत, डीबीटी राशि बैंक से न मिलकर प्रज्ञा केंद्र से मिलना और ई पॉश मशीन तथा आधार से जुड़ी समस्याओं को गिनाया गया है.

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खाद्य मंत्री सरयू राय ने कहा कि इस योजना में ज़मीनी हक़ीक़त को देखना होगा. साफ है कि लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार डीबीटी के राजनीतिक नुकसान से भी अनजान नहीं है. महत्वपूर्ण है कि अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज की निगरानी में छात्रों ने भी एक सर्वे किया जिसमें 97% लोगों ने डीबीटी के मुकाबले सरकारी दुकान से सस्ता राशन लेने को पसंद बताया. अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने एनडीटीवी इंडिया से कहा कि नगरी ब्लॉक में किया गया डीबीटी प्रयोग तर्कहीन, गैरकानूनी और अमानवीय है.

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अब सरकार के अपने सोशल ऑडिट में इसके इसके विनाशकारी असर की पुष्टि हो गई है तो इस डीबीटी स्कीम को तुरंत खत्म किया जाना चाहिये.


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