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प्रमुख चेहरे

  • यूपी चुनाव 2017: क्या इस बार चलेगा बाहुबली धनंजय सिंह का जादू
    धनंजय का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाहुबली नेताओं में शुमार है. उन्होंने दो बार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है. उनका जौनपुर की राजनीति में अच्छा खासा प्रभाव है और उन्होंने अपना पहला चुनाव निर्दलीय लड़कर जीता था. इसके बाद 2007 के चुनाव में भी धनंजय ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की, लेकिन इस बार उन्होंने जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा.
  • यूपी चुनाव: बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्ला की साख भी लगी है दांव पर
    बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्ला अंसारी की साख भी 2017 के विधानसभा चुनाव में दांव पर लगी हुई है. सिबगतुल्ला को इस बार बहुजन समाज पार्टी ने मोहम्‍मदाबाद सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है. आपको बता दें कि बहुजन समाज पार्टी से मुख्तार अंसारी के रिश्ते खराब हो जाने के बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था. बीएसपी से निकाले जाने के बाद तीनों अंसारी भाइयों मुख्तार, अफजाल अंसारी और सिबगतुल्लाह अंसारी ने 2010 में खुद की राजनीतिक पार्टी कौमी एकता दल का गठन किया.
  • अलका राय: कड़ी चुनौती की बीच क्‍या लहरा पाएंगी जीत का परचम
    मोहम्मदाबाद सीट पर मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह के खिलाफ बीजेपी की अलका राय चुनाव लड़ रही हैं. आपको बता दें कि अलका राय के पति और विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में मुख्तार जेल में है.
  • अजय राय: विरोधियों के सामने गढ़ तोड़ने की चुनौती
    उत्तर प्रदेश में वाराणसी संसदीय सीट की पिंडरा विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक अजय राय भी पूर्वाचल के बाहुबलियों में ही शुमार किए जाते हैं. जिले की यह एकलौती विधानसभा है, जिसका इतिहास काफी रोचक रहा है. कभी कोलअसला के नाम से बहुचर्चित यह सीट कम्युनिस्टों का गढ़ हुआ करती थी, लेकिन सीपीआई नेता उदल के इस किले में अजय राय ने ऐसी सेंध लगाई कि पिछले 20 वर्षो से उन्हें हराने में यहां कोई कामयाब नहीं हो पाया.
  • इस बार बीजेपी से चुनावी मैदान में हैं दिग्गज नेता ज्वॉय सिंह
    कई पार्टियों के टिकट पर कई मर्तबा लंगथाबल विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके ओकराम ज्वॉय सिंह (ओ. ज्वॉय सिंह) इस बार बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. मणिपुर की सियासत में ओ. ज्वॉय सिंह विपक्ष में रहकर भी अहम भूमिका निभाते आए हैं. उनका ऊंचा राजनीतिक कद और लंबा-चौड़ा अनुभव बीजेपी के काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.  इस बार लंगथाबल विधानसभा सीट से ज्वॉय सिंह का मुकाबला कांग्रेस नेता एल. तिलोतमा देवी और मणिपुर नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एमएनडीएफ) के एम दिनेश से होगा.
  • मणिपुर: आसान नहीं होगा सुसिंद्रो मेती के लिए चुनाव जीतना
    बीजेपी ने मणिपुर विधानसभा चुनाव की खुरई सीट से इस बार भी एल सुसिंद्रो मेती पर भरोसा जताया है और उन्हें इसी सीट से टिकट दिया है. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस एन. बिजॉय सिंह ने 5089 मतों के अंतर से हरा दिया था. इस बार भी मेती के सामने बिजॉय सिंह ही हैं. पिछले कुछ समय में इस सीट से बीजेपी ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है, इसलिए इस बार मुकाबला कड़ा होगा. 
  • दिगंबर कामत: क्या करा पाएंगे कांग्रेस की सत्ता में वापसी?
    गोवा की मडगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे दिगंबर कामत के लिए ये चुनाव कड़ा इम्तिहान है. उन पर कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने की जिम्मेदारी है. साल 2007 से 2012 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे कामत के काम और उनके चेहरे को पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने नकार दिया था.  8 मार्च, 1954 को मडगांव में जन्मे कामत स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनके पास बीएससी की डिग्री है. 
  • गोवा चुनाव 2017: गोम्स की अगुवाई में कितना उभरेगी 'AAP'
    पूर्व नौकरशाह एल्विस गोम्स ने जुलाई, 2016 में आम आदमी पार्टी का दामन थामा. गोम्स ने गोवा प्रशासन में 20 साल से ज्यादा काम किया है. आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने गोम्स को गोवा में मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा की. गोम्स दक्षिणी गोवा की कुनकोलिम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. आप में शामिल होने के लिए उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. उस समय वह आईजी जेल तथा शहरी विकास सचिव थे.
  • गोवा चुनाव 2017: बीजेपी के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकते हैं वेलिंगकर
    सुभाष वेलिंगकर गोवा में आरएसएस के प्रमुख रह चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से बगावत कर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने के कारण उन्हें अगस्त, 2016 में पद से हटा दिया गया था.  उन्हें आरएसएस प्रमुख के पद से हटाए जाने के विरोध में आरएसएस के करीब 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया था. आपको बता दें कि वेलिंगकर करीब पिछले 54 सालों से आरएसएस से जुड़े हुए थे.
  • लक्ष्मीकांत पारसेकर: किस्मत का फैसला करेगा ये विधानसभा चुनाव
    इस बार गोवा विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर के भविष्य का फैसला करेंगे. वर्तमान में वह मेंड्रम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और इस बार भी बीजेपी ने इन्हें इसी सीट से उतारा है. 4 जुलाई, 1956 को गोवा के परनेम ताल्लुका के हर्मल गांव में जन्मे पारसेकर को मनोहर पर्रिकर के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद नवंबर, 2014 में मुख्यमंत्री बनाया गया था.  पारसेकर ने पणजी के सेंटर ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्ट्रक्शन एंड रिसर्च से एमएससी और बीएड किया है. वह हर्मल के एक स्कूल में प्रिंसिपल भी रहे हैं. मुख्यमंत्री बनाने जाने से पहले वह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रहे. वह आरएसएस के भी काफी करीब रहे हैं
  • सूरजकुमार: क्या मां के त्याग की लाज रख पाएंगे मुख्यमंत्री के पुत्र?
    इस बार मणिपुर विधानसभा की खंगाबोक सीट के नतीजों पर सबकी नजरें होंगी. खंगाबोक सीट से मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के 29 वर्षीय पुत्र सूरजकुमार ओकराम अपनी मां ओकराम लंधोनी की जगह चुनाव लड़ रहे हैं. खंगाबोक सीट से लगातार दो बार से विधायक लंधोनी ने अपने बेटे के लिए यह सीट छोड़ी है.  कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे सूरजकुमार इस चुनाव के साथ ही अपनी सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं. वह अबकी बार मणिपुर के चुनाव में सबसे युवा प्रत्‍याशी भी हैं. गौरतलब है कि पूर्वोत्‍तर के इस राज्‍य में मुख्‍यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्‍व में कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्‍ता में आने के लिए मैदान में है. 
  • नोंगथोमबम बिरेन सिंह: इस बार बीजेपी के टिकट पर इबोबी सिंह को जवाब देने के लिए तैयार
    नोंगथोमबम बिरेन सिंह के लिए यह मणिपुर विधानसभा चुनाव इसलिए अहम है क्योंकि इस बार वह कांग्रेस नहीं बल्कि बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल से पत्रकार और पत्रकार से राजनेता बने बिरेन सिंह को बीजेपी ने हेनगेंग विधानसभा सीट से चुनावी अखाड़े में उतारा है. 
  • इरोम शर्मिला: क्या ओकराम इबोबी सिंह को दे पाएंगी मात?
    इस बार थउबल विधानसभा सीट का चुनाव बेहद दिलचस्प होगा. वजह है यहां से इरोम शर्मिला का खड़ा होना. सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने थउबल विधानसभा सीट से पर्चा दाखिल किया है. पहली बार चुनाव लड़ रहीं शर्मिला ने पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस एलाइंस (पीआरजेए- (Peoples’ Resurgence and Justice Alliance)) की ओर से नामांकन पत्र दाखिल किया है. नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए इरोम ने अपने समर्थकों के साथ साइकिल पर इंफाल से 20 किलोमीटर की दूरी तय की और थाउबल पहुंचीं.
  • परवेज अहमद: क्‍या सपा की उम्‍मीदों पर खरे उतर पाएंगे
    इलाहाबाद दक्षिण में समाजवादी पार्टी ने विधायक परवेज अहमद को उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनावी मैदान में उतारा हैं. परवेज अहमद इंटर पास कर चुके हैं. यह इस समय इलाहाबाद दक्षिण सीट से विधायक हैं. इनके पास 8.33 करोड़ रुपए की संपत्ति है. हाल ही में दर्ज किए गए अपने हलफनामे में इसके नाम पर तेल टैंकरों का उल्लेख भी किया गया है.
  • स्वाति सिंह: मायावती के पक्ष में बह रही हवा का रुख मोड़ने वालीं, क्या खत्म कर पाएंगी बीजेपी का 'सूखा'? 
    दयाशंकर सिंह की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद जो राजनीतिक माहौल मायावती के पक्ष में बना, उसे स्वाति सिंह ने कुछ घंटों के भीतर बसपा के खिलाफ ही मोड़ दिया था. 
  • अरविन्‍द कुमार सिंह ‘गोप’: क्‍या सपा की चुनौती पर खरे उतर पाएंगे ये
    अरविन्‍द कुमार सिंह ‘गोप’ भारत के उत्तर प्रदेश की 15वीं विधानसभा सभा में विधायक रहे चुके हैं. 2007 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बतौर समाजवादी पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा था.
  • बीजेपी ने आशुतोष टंडन पर फिर जताया भरोसा, उपचुनाव में जीतकर बने थे विधायक
    भारतीय जनता पार्टी ने लखनऊ पूर्व से विधायक आशुतोष टंडन उर्फ गोपालजी टंडन पर एक बार फिर भरोसा जताया है और इसी सीट से उन्‍हें फिर से चुनाव मैदान में उतारा है। आशुतोष टंडन बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के बेटे हैं और 2013 में लखनऊ पूर्व सीट पर हुए उप-चुनाव में जीत हासिल करके विधानसभा पहुंचे थे.
  • नितिन अग्रवाल: सपा के इस नेता को पिता से विरासत में मिली थी राजनीति
    समाजवादी पार्टी ने समाजवादी पार्टी के नेता नितन अग्रवाल को पार्टी ने एक बाद फिर हरदोई सीट से टिकट दिया है. नितिन समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव और राज्‍यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के बेटे हैं और उन्‍हें राजनीतिक शुरुआत पिता से विरासत में मिली है.
  • अखिलेश के भाई अनुराग यादव ने कई साल जॉब करने के बाद राजनीति में रखा कदम
    मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव के बाद उनके भतीजे अनुराग यादव ने राजनीति में कदम रखा. समाजवादी पार्टी ने अनुराग को लखनऊ की सरोजनी नगर सीट से टिकट दिया है. अनुराग, मुलायम के खानदान के 22वें सदस्‍य हैं जो राजनीति में आए हैं.
  • तनुज पुनिया: जैदपुर से शुरू हो रहा है इनका चुनावी अभियान
    कांग्रेस के दिग्गज नेता, राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉक्टर पी.एल. पुनिया के बेटे तनुज पुनिया बाराबंकी के जैदपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं. इस चुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत कर रहे है. 32 साल के तनुज आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग कर चुके हैं.
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