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हर मर्द का दर्द: क्या महिलाओं के मुंह से ये 5 बातें सुनने को तरस गए हैं आप! 

एक लड़की की अलमारी कपड़ों से ओवरफ्लो भी क्यों न हो रही हो, वो कभी नहीं कहेगी कि उसे शॉपिंग करने या कपड़े खरीदने की ज़रूरत नहीं. ये अतिशयोक्ति नहीं. सच्चाई है और लड़कों की पीड़ा भी.

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हर मर्द का दर्द: क्या महिलाओं के मुंह से ये 5 बातें सुनने को तरस गए हैं आप! 

मानव सभ्यता के हज़ारों साल बीत जाने के बाद भी पुरुष को कुछ बातें सुनने को नहीं मिली!

'एक पुरुष अपने दफ्तर में सूरमा क्यों न हों, सोसाइटी में वो कितना ही लोकप्रिय क्यों न हो, लेकिन पत्नी और गर्लफ्रेंड की नज़रों में उसकी औकात 'घर की मुर्गी दाल बराबर'  जैसी ही होती. 'ये 'ओपन सीक्रेट' ही हर मर्द के दर्द की वजह है. वैसे एक लड़की होने के नाते इस टॉपिक पर 'डीप नॉलेज' तो है नहीं मुझे, लेकिन घर-दफ्तर में लड़कों की हालत देखकर, उनका दुखड़ा सुनकर यही प्रतीत होता है कि मानव सभ्यता के हज़ारों साल बीत जाने के बाद भी आजतक पुरुषों के कान कुछ बातें सुनने को तरस रहे हैं...

1. तुमने काम अच्छे से किया
आप किसी काम को 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' की तरह पूरा करने की कितनी ही इमानदार कोशिश क्यों न कर लें, यहां तक कि आप उसे अच्छे से पूरा कर भी लें, लेकिन पुरुषों को यहीं सुनने को मिलता है, 'तुम कोई काम ढंग से नहीं करते'. 

2 .मेरे वॉर्डरोब में बहुत कपड़े हो गए हैं
एक लड़की की अलमारी कपड़ों से ओवरफ्लो भी क्यों न हो रही हो, वो कभी नहीं कहेगी कि उसे शॉपिंग करने या कपड़े खरीदने की ज़रूरत नहीं. ये अतिशयोक्ति नहीं. सच्चाई है और लड़कों की पीड़ा भी.  

3. तुम थक गए होगे, हम कल बात करेंगे
दफ्तर से थककर घर लौटे व्यक्ति को, बॉस की फटकार झेलकर आए शख्स को अगर धर्मपत्नी या गर्लफ्रेंड के मुख से ऐसे बोल सुनने को मिल जाएं, तो उनकी सारी थकान पलभर में गायब हो जाए. लेकिन ऐसा होता है क्या?

4. मैं ठीक हूं
पुरुषों के बीच ये मानी हुई बात है कि 'औरतों की हां में हां और न में न' नहीं होती. पुरुषों की मानें तो महिलाओं को ये खुशफहमी होती है कि धरती का सारा बोझ उनके ही कंधों पर होता है. वो कभी नहीं कहतीं कि वो ठीक हैं.

5. तुम बिलकुल नहीं बदले
हर ब्वॉयफ्रेंड और पति को कभी न कभी या अक्सर ये ताने सुनने को मिलते हैं, 'तुम अब पहले जैसे नहीं रहे', 'तुम शादी से पहले कितना ख्याल रखते थे मेरा, अब मेरी फिक्र ही नहीं'. शायद ही कोई दिन पुरुषों के जीवन में ऐसा आया हो, जब उन्हें महिलाओं से सुनने को मिले कि वो पहले जैसा ही उनके साथ बर्ताव करते हैं. 
   


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