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छोटी-मोटी चोट और खुद से ली गई दवाएं आर्थराइटिस के लिए हैं हानिकारक, ध्यान रखें ये 7 बातें

बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में आर्थराइटिस की बीमारी आम हो जाती है. इन उपायों को अपनाकर आप आर्थराइटिस से पा सकती हैं हमेशा के लिए छुटकारा.

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छोटी-मोटी चोट और खुद से ली गई दवाएं आर्थराइटिस के लिए हैं हानिकारक, ध्यान रखें ये 7 बातें

महिलाओं में बढ़ते वजन और उम्र से होता है आर्थराइटिस, रहें सावधान!

नई दिल्ली:

अपनी खुशी से पहले अपने बच्चों की खुशी का ध्यान रखने वाली केवल मां होती है. हाल ही में 12 मई को मदर्स डे पूरी दुनिया में मनाया गया. सभी ने सोशल मीडिया पर अपनी मां के साथ फोटो शेयर की. लेकिन क्या सिर्फ एक दिन फोटो शेयर करने से आपकी अपनी मां के प्रति जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? बढ़ती उम्र के साथ ज्यादातर महिलाएं आर्थराइटिस (Arthritis) की गंभीर बीमारी से जूझने लगती हैं. ऐसे में आपकी जिम्मेदारी है कि अपनी मां की सेहत का ध्यान रखें और उनका सही इलाज करवाएं.

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अक्सर घर की महिलाएं खासतौर से मां अपनी बिगड़ती सेहत और शरीर की ओर से मिलने वाले अलार्म को नजरअंदाज करती हैं. ऐसे में आपकी यह जिम्‍मेदारी है कि आप अपनी मां की सेहत का ध्‍यान रखने की जिम्‍मेदारी उठाएं. यूं तो बढ़ती उम्र में महिलाओं को कई सारी शारीरिक समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन भारतीय महिलाएं 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते घुटने और बोन मास के डिजनरेशन की समस्या से जूझने लगती हैं. दिल्‍ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में आर्थोपेडिक्स की डायरेक्टर रमणीक महाजन के मुताबिक भारतीय महिलाओं में आर्थराइटिस के जल्दी होने की वजह पोषक तत्वों की कमी और मोटापा है.


आर्थराइटिस आपकी मां को परेशान न कर पाए इसके लिए आप इन टिप्‍स की मदद ले सकते हैं:

1. जोड़ों में दर्द और अकड़न को न करें नजरअंदाज
जोड़ों में दर्द और अकड़न जैसी शिकायतें बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में पनपने लगती हैं. इसलिए अगर कभी आपकी मां इस बीमारी को लेकर आपसे कुछ कहे तो उसे कभी नजरअंदाज न करें. बल्कि एक विशेषज्ञ डॉक्टर से उनकी बीमारी के बारे में सलाह लें. घुटनों में सुबह-सुबह दर्द, अकड़न, लॉकिंग एवं पॉपिंग से शुरुआत होने से लेकर जोड़ों में सूजन होने तक, यह आर्थराइटिस के संकेत हो सकते हैं जोकि एक प्रगतिशील ज्वाइंट स्थिति है और अधिकतर भारतीय महिलाएं इन संकेतों को नजरअंदाज करती हैं. तो इसलिए आपका फर्ज है कि ऐसे में अपनी मां का ध्यान रखें.

2. शुरुआती चरणों में कराएं आर्थराइटिस का इलाज
ज्यादातर महिलाएं तभी डॉक्टर के पास जाती हैं जब आर्थराइटिस की स्थिति बेहद खराब स्तर पर पहुंच जाती है. याद रखें कि देरी होने से जोड़ों को होने वाला नुकसान कई गुना बढ़ा सकता है. अगर इसका शुरुआती चरणों में इलाज हो जाए, तो पारंपरिक उपचारों की मदद से इस स्थिति को बढ़ने से रोका जा सकता है.

3. वजन बढ़ने पर रखें कड़ी नजर
बढ़ता वजन भारतीय महिलाओं में आर्थराइटिस के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है. हमारे जोड़ सिर्फ कुछ हद तक ही वजन उठाने के लिए बनाए गए हैं. प्रत्येक एक किलो अतिरिक्त वजन घुटनों पर चार गुना दबाव डाल सकता है. क्षमता से अधिक वजन जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए उचित वजन का मतलब है स्वस्थ जोड़.

4. रोजाना 30 मिनट करें वॉक
हर दिन 30 मिनट की वॉक आर्थराइटिस में बेहद लाभदायक होती हैं. ऐसा रोजाना करने से हड्डियां और जोड़ स्वस्थ रहते हैं. 
 

5. छोटी-मोटी चोटों को नहीं करें नजरअंदाज
हम जोड़ों के आसपास लगी छोटी-मोटी चोटों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. इससे हानिकारक स्थितियां पैदा हो सकती हैं. जैसे भविष्य में आर्थराइटिस हो सकता है. अगर दर्द बार-बार हो रहा है तो विशेषज्ञ की सलाह लें.

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6. शरीर के पॉश्चर पर रखें नजर 
गलत पॉश्चर से जोड़ों, खासतौर से घुटने पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. घुटने शरीर में सबसे अधिक भार सहन करने वाले जोड़ हैं. इससे घुटने में दर्द हो सकता है. सही पॉश्चर रखना, काम के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना, नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करना और अपने पॉश्चर को बीच-बीच में ठीक करने से घुटने के दर्द को कम करने में मदद मिलती है.

7. पेनकिलर्स लेने से बचें
हमारे देश में खुद से दवाएं लेना एक आम समस्या है. आमतौर पर, हम अक्सर शरीर में दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लिए बिना पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं. पेनकिलर्स भले ही हमें दर्द से फौरन राहत दिलाते हैं, पर वह स्थिति का उपचार नहीं करते. इससे कई को-मॉर्बिड स्थितियां पैदा हो सकती हैं. इसलिए अगर आप अपनी मां को जोड़ों के दर्द के लिए खुद से पेनकिलर्स लेते हुए देखें, तो फौरन ऑथोर्पेडिस्ट के पास जाकर उनका टेस्‍ट कराएं.

इनपुट- आईएएनएस

VIDEO: फिट रहे इंडिया : आर्थराइटिस से कैसे पाएं निजात

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