Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com
NDTV Khabar

बच्चों की आंखों का देरी से इलाज बन रही है मौत की वजह, हो रही है ये बीमारी

पांच साल से कम उम्र के बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा यानी रेटिना का कैंसर सामान्य है. इसमें भेंगापन व आंखों की पुतली के भीतर सफेद दाग रहता है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
बच्चों की आंखों का देरी से इलाज बन रही है मौत की वजह, हो रही है ये बीमारी

आंखों के कैंसर में लापरवाही से जान को खतरा

खास बातें

  1. पांच साल से कम उम्र के बच्चों में रेटिना का कैंसर सामान्य
  2. 20 हजार में से एक बच्चे में दिखता है ये रोग
  3. इलाज में देरी आंखों की रोशनी कर सकती है समाप्त
नई दिल्ली:

आंखों में दर्द, जलन, खुजली और पानी आने जैसी समस्याओं को हम सभी आम मानते हैं. हमारे इसी रवैये कि वजह से कई बार आंखों गंभीर दिक्कतें दे जाती हैं. डॉक्टरों का भी यही कहना है कि देश में आंखों के कैंसर के ज्यादातर मामलों के बारे में तब पता चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है. 

वज़न करे कम और बढ़ाए आंखों की रोशनी, जानें अमरूद के 5 फायदे

डॉक्टरों का कहना है इस प्रकार के रोग और उसके लक्षणों को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है, ताकि इसकी रोकथाम, जानकारी और इलाज सुनिश्चित हो सके. ज्यादा देर होने से आंखों की रोशनी जाने के साथ-साथ जान को भी खतरा पैदा हो जाता है. चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस है. इससे पहले शंकर नेत्रालय के नेत्र कैंसर विशेषज्ञ बिक्रमजीत पाल ने अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "लोगों को मालूम होना जाहिए कि शरीर के अन्य अंगों की तरह आंखों में भी कैंसर हो सकता है. यही नहीं अन्य अंगों के कैंसर से आंखों पर असर पड़ सकता है."

इन 7 चीज़ों से होता है कैंसर, जिन्हें आप रोज़ाना खा रहे हैं


उन्होंने बताया कि लोगों को बहुत देर हो जाने के बाद रोग का पता चलता है, तबतक रोग गहरा जाता है और वह तकरीबन अंतिम चरण में होता है. इसके अलावा बहुत सारे मरीज मेडिकल प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं करते हैं. 

उन्होंने बताया कि देश में आंखों में विभिन्न प्रकार के कैंसर के ट्यूमरों का उपचार करने के लिए देश में विशेषज्ञों की भी कमी है. 

फेफड़ों का कैंसर : सिगरेट और शराब ही नहीं आसपास का वातावरण भी हो सकता है वजह...

पाल ने कहा, "पांच साल से कम उम्र के बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा यानी रेटिना का कैंसर सामान्य है. इसमें भेंगापन व आंखों की पुतली के भीतर सफेद दाग रहता है. यह रोग 20 हजार में एक बच्चे में देखने को मिलता है."

उन्होंने बताया कि शुरूआती चरण में रोग का पता चलने पर बच्चे व उनकी दोनों आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है, लेकिन ज्यादा देर होने से आंखों की रोशनी समाप्त होने के साथ-साथ जान को खतरा भी पैदा हो जाता है.

INPUT -IANS 

टिप्पणियां

देखें वीडियो- ग्लूकोमा क्या है और ये बीमारी क्यों होती है?



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


 Share
(यह भी पढ़ें)... 'दंगल गर्ल' जायरा वसीम ने कसा तंज- यह मत पूछो आम कैसे खाते हैं बल्कि पूछो रात को सुकून की नींद कैसे...

Advertisement