ताकि आंखों को न लगे डायबिटीज की नजर...

क्‍या आप जानते हैं कि आंखों का ध्‍यान रखने के लिए उनमें गुलाबजल डालना या रोज पानी के छींटे मारना काफी नहीं। आपकी डायट और रोजमर्रा की कई आदतें या आपकी कोई छिपी बीमारी भी उन्‍हें नुकसान पहुंचा सकती है...

ताकि आंखों को न लगे डायबिटीज की नजर...

अगर आप अक्‍सर अपनी आंखों की तारीफ सुनने के आदि हैं और आप भी यह मानते है कि आंखें ही दिल का आईना होती हैं। तो यकीनन आप अपनी आंखों का बेहद ध्‍यान भी रखते होंगे। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आंखों का ध्‍यान रखने के लिए उनमें गुलाबजल डालना या रोज पानी के छींटे मारना काफी नहीं। आपकी डायट और रोजमर्रा की कई आदतें या आपकी कोई छिपी बीमारी भी उन्‍हें नुकसान पहुंचा सकती है...
 

मधुमेह यानी डायबिटीज के ज्यादातर मरीजों में रेटिनोपैथी की आखिरी स्टेज आने तक भी पता नहीं चलता और तब तक उचित इलाज की संभावना भी कम रह जाती है। बीमारी फैलने की रफ्तार तेज हो सकती है, इसलिए रेटिनल रोग का ध्यान रखने के लिए मधुमेह रोगियों की नियमित जांच होती रहनी चाहिए। पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि आखों, दिल के रोगों, छोटी रक्त शिराओं के क्षतिग्रस्त होने के बेहद शुरुआती संकेत अन्य लक्षणों के नजर आने से पहले ही देती हैं।
  रेटिनोपैथी वाले मधुमेह रोगियों की इस रोग के बिना वाले लोगों की तुलना में अगले बारह सालों में मौत होने की संभावना होती है।

आस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबोर्न व नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के अध्ययनों के मुताबिक, इस रोग से जो लोग पीड़ित नहीं है, उनकी तुलना में रेटिनोपैथी वाले रोगियों की दिल की बीमारी से मौत होने की संभावना करीब दोगुनी होती है।

आंखों में बदलाव से पीड़ितों को यह चेतावनी मिल सकती है कि उनकी रक्त धमनियों को क्षति पहुंच रही है और उनके लोअर कोलेस्ट्रॉल और लोअर ब्लडप्रेशर पर असर हो रहा है।

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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस बीमारी से रहित रोगियों की तुलना में रेटिनोपैथी वाले रोगियों को दिल के दौरे स्ट्रोक, रिव्सकुलराइजेशन व दिल के रोग से मौत होने की आशंका ज्यादा रहती है।
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)