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Hair Transplant सर्जरी के बारे में जानें सबकुछ, कैसे ये गंजेपन से छुटकारा पाने का है असरदार तरीका

50 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते करीब 50 फीसदी पुरुषों और महिलाओं को बालों की कमी की समस्या का सामना करना पड़ता है.

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Hair Transplant सर्जरी के बारे में जानें सबकुछ, कैसे ये गंजेपन से छुटकारा पाने का है असरदार तरीका

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नई दिल्ली: बालों के झड़ने और गंजेपन की समस्या से बहुत लोग परेशान रहते हैं. तमाम तेल, शैम्पू और नुस्ख अपनाने के बाद कई लोग बालों की सर्जरी का रुख करते हैं. क्योंकि आजकल बाज़ार में हर जगह सिर्फ Hair Transplants या Hair Implants के बही विज्ञापन देखने को मिलते हैं. इस वजह से भी लोग इस सर्जरी को अपनाते हैं. अगर आप भी इस सर्जरी के बारे में सोच रहे हैं तो पहले ये जरूर पढ़ें कि हेयर ट्रांसप्लांट आखिर है क्या?

आपको बता दें कि 50 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते करीब 50 फीसदी पुरुषों और महिलाओं को बालों की कमी की समस्या का सामना करना पड़ता है, इनमें से ज्यादातर मामलों की वजह जेनेटिक होती है. पुरुषों में बालों को पहुंचने वाले नुकसान को 'मेल पैटर्न हेयर लॉस' कहते हैं. इससे सिर का अगला और ऊपरी हिस्सा ही प्रभावित होता है. अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनूप धीर ने कहा कि हेयर इंप्लांटेशन सर्जरी के अंतर्गत सिर के पिछले और अगल बगल के हिस्से से बालों के कोश को स्थानांतरित किया जाता है जहां गंजेपन वाले क्षेत्रों के मुकाबले मजबूत बाल होते हैं.

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उन्होंने कहा कि हेयर इंप्लांटेशन खोपड़ी में आपके बाल की कुल संख्या को नहीं बढ़ाता है, क्योंकि यहां हम सिर के पिछले हिस्से से बाल का वितरण इस तरह से करते हैं ताकि गंजेपन वाले हिस्से में भी पर्याप्त मात्रा में बाल अच्छे से दिखाई दें और जिस जगह से बाल लिया गया है, वह भी खराब न दिखाई दे. 

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डॉ. धीर ने कहा, "हम इसमें स्थायी बाल की जड़ों का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें उन जगहों पर रोपते हैं. इसके लिए एफयूटी और एफयूई, दो विधियों का प्रयोग किया जा सकता है."

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उन्होंने कहा कि एफयूटी हेयर इंप्लांटेशन या स्ट्रिप विधि पुराना तरीका है जिसमें सिर के पिछले हिस्से से बाल वाली त्वचा के एक बारीक अंश को निकालकर ऐसे हिस्से में इस्तेमाल किया जाता है जहां बहुत कम बाल या ना के बराबर बाल होते हैं. एक छुरी की मदद से त्वचा के हिस्से को हटाने के बाद सर्जन सिर की त्वचा को बंद कर देते हैं. इस क्षेत्र को तत्काल ही आसपास के बालों से ढक दिया जाता है.

डॉ. धीर ने कहा कि अगले चरण में निकाली गई त्वचा के अंश को विभिन्न छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाता है, जिसमें से प्रत्येक में एक या कुछ बाल होते हैं. इस्तेमाल किए गए अंशों की संख्या और बालों के प्रकार, गुणवत्ता और रंग के साथ उस जगह के आकार पर भी निर्भर करता है जहां इसे इंप्लांटेशन किया जाना है.

उन्होंने कहा कि इसके बाद सर्जन उस क्षेत्र को साफ करते हैं और सुन्न करते हैं जहां बाल को इंप्लांट किया जाएगा, एक सुई या छुरी के साथ छेद बनाए जाते हैं और प्रत्येक छिद्र में बहुत ही सावधानी से प्रत्येक बाल को इंप्लांट किया जाता है.

डॉ. धीर ने बताया कि एफयूई या फालिक्यूलर यूनिट एक्सट्रैक्शन या रूट एक्सट्रैक्शन सबसे कम नुकसानदायक बाल इंप्लांटेशन तकनीक है, जिसमें फालिक्यूलर यूनिट ग्राफ्ट (हेयर फालिसल्स) को एक-एक कर मरीज के उस क्षेत्र से निकाला जाता है और इसके बाद एक-एक कर कम बाल वाली जगहों पर इंप्लांट किया जाता है.

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उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जिस जगह से बाल निकाले जाते हैं वहां न के बराबर दाग धब्बे या निशान देखने को मिलते हैं. कोई निशान नहीं होता, इसलिए टांकों की भी जरुरत नहीं होती है, इसलिए जिस जगह से बाल निकाले जाते हैं वह कुछ ही दिनों के भीतर सामान्य हो जाती है और यह तकनीक उन लोगों के लिए लाभदायक है जो अपने बालों को छोटा रखना चाहते हैं.

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हेयर इंप्लांटेशन के बाद आपको कुछ दिनों तक दर्द की दवाएं और एंटीबायोटिक लेनी पड़ सकती है. आपका सर्जन एक या दो दिनों के लिए आपको सिर पर पहनने के लिए एक सर्जिकल ड्रेसिंग देगा. ज्यादातर लोग सर्जरी के दो से पांच दिनों के भीतर ही काम पर लौट जाते हैं. हेयर इंप्लांटेशन के नतीजे सामान्य तौर पर संतोषजनक ही रहते हैं. कई बार अगर आपके बाल गिरते रहते हैं या फिर आपको मोटे बाल चाहिए होते हैं तो आपको कुछ अतिरिक्त सेशन लेने पड़ते हैं. (इनपुट -आईएएनस)

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