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रोजाना टूथ ब्रश करने से फूडपाइप में नहीं होगा कैंसर, रिसर्च में हुआ खुलासा

क्‍या आपने कभाी सोचा हे कि रोजाना दांतों की सफाई से एक और खतरे से बचा जा सकता है. दरअसल, एक स्‍टडी में पता चला है कि मसूढ़े की बीमारी के बैक्‍टीरिया से फूड पाइप में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.

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रोजाना टूथ ब्रश करने से फूडपाइप में नहीं होगा कैंसर, रिसर्च में हुआ खुलासा

रोजाना जरूरी है दांतों की सफाई

खास बातें

  1. रोजाना दांतों की सफाई फूड पाइप के कैंसर से बचा सकती है
  2. मुंह में पाए जाने वाले माइक्रोबायोटा से कैंसर का खतरा
  3. फूड पाइप का कैंसर आठवां सबसे सामान्य तौर पर होने वाला कैंसर है
नई द‍िल्‍ली : ब्रश यानी कि दांतों की सफाई करना किसी के भी रूटीन का अहम हिस्‍सा है. हम रोजाना दांतों की सफाई इसलिए करते हैं ताकि प्‍लाक हटाकर कैविटी यानी कि दांतों को कीड़े लगने से बचाया जा सके. प्‍लाक दांतों में लगने वाले बैक्‍टीरिया की एक पारदर्शी परत है जो आगे चलकर कैविटी बन जाती है. यही नहीं ब्रश करने से मुंह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलता है और दांत सफेद व हेल्‍दी बने रहते हैं. लेकिन क्‍या आपने कभाी सोचा हे कि रोजाना दांतों की सफाई से एक और खतरे से बचा जा सकता है. दरअसल, एक स्‍टडी में पता चला है कि मसूढ़े की बीमारी के बैक्‍टीरिया से फूड पाइप में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. कैंसर रिसर्च नाम की मैगजीन में छपी इस स्‍टडी में कहा गया है कि मुंह में पाए जाने वाले माइक्रोबायोटा (सूक्ष्म जीवों का समूह) और फूड पाइप कैंसर के खतरों के बीच संबंधों की जांच-परख की गई. 

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स्‍टडी में शामिल एक शोधकर्ता और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर जियांग अह्न् ने बताया कि फूड पाइप का कैंसर आठवां सबसे सामान्य तौर पर होने वाला कैंसर है और दुनियाभर में सबसे ज्यादा कैंसर से होने वाली मौत के मामले में इसका छठा स्थान है. दरअसल, रोग का पता तब तक नहीं चल पाता है, जब तक यह खतरनाक स्‍टेज में न पहुंच जाए. फूडपाइप का कैंसर होने के बाद पांच साल जीने की दर दुनियाभर में 15 से 25 फीसदी है.

उनका कहना है कि फूड पाइप का कैंसर बहुत ही घातक कैंसर है. इसलिए इसकी रोकथाम, खतरों का स्तरीकरण और शुरुआत में पता चलने को लेकर नए मार्ग तलाशने की सख्त जरूरत है.

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फूड पाइप में आमतौर पर जो कैंसर पाए जाते हैं, उनमें एसोफेजियल एडनोकारसिनोमा (EAC) और एसोफेजियल स्क्वेमस सेल कारसिनोमा (ESCC) हैं.

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स्‍टडी में यह भी पता चला कि टैनेरिला फोर्सिथिया नाम का बैक्‍टीरिया 21 फीसदी EAC कैंसर के खतरे को बढ़ाने में जिम्मेदार थे. वहीं, ESCC के खतरों के लिए पोरफाइरोमोनस जिंजिवलिस बैक्‍टीरिया उत्तरदायी थे. ये दोनों प्रकार के बैक्‍टीरिया आमतौर पर मसूढ़ों की बीमारियों में पाए जाते हैं.

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IANS इनपुट


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