Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में खीर रखने का वैज्ञानिक कारण, जानिए यहां

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की खीर बनाने की विधि, वैज्ञानिक कारण और उसके फायदे.

Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में खीर रखने का वैज्ञानिक कारण, जानिए यहां

शरद पूर्णिमा के दिन खीर क्यों बनाई जाती है, जानिए यहां

नई दिल्ली:

शरद पूर्णिमा 2019: शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) को कोजागरी पूर्णिमा (Kojagiri or Kojagara Purnima), 'महारास' या 'रास पूर्णिमा' (Maha Raas Leela or Raas Purnima), 'कौमुदी व्रत' (Kamudi Vrat) और 'कुमार पूर्णिमा' (Kumar Purnima) के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस पूर्णिमा के दिन धरती पर अमृत की वर्षा होती है. इसी अमृत को चखने के लिए शरद पूर्णिमा की रात खीर (Sharad Purnima Kheer) बनाकर चांद की रोशनी में रखी जाती है. अगर आप भी इस शरद पूर्णिमा की रात खीर को खुले आसमान में रखने का सोच रहे हैं तो पहले जानिए शरद पूर्णिमा की खीर बनाने की विधि, वैज्ञानिक कारण और उसके फायदे.

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शरद पूर्णिमा की खीर बनाने की विधि
1. एक मोटे तले वाले बर्तन में दूध डालें और इसे एक चौथाई भाग घटने तक पकाएं.
2. दूध तीन चौथाई रह जाने के बाद इसमें दूध की मात्रा के अनुसार चावल डालें.
3. एक करछी से इस मिक्स्चर को चावल पकने तक चलाते रहें.
4. चावल अच्छे से पक जाने के बाद इसमें आवश्यकतानुसार चीनी डालें.
5. कुछ देर बाद खीर में इलाइची पाउडर और मेवे डालें.
6. खीर को 5 मिनट और चलाएं फिर गैस बंद कर दें.

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शरद पूर्णिमा की खीर का वैज्ञानिक कारण :
दूध में भरपूर मात्रा में लैक्टिक एसिड होता है, जो चांद की तेज़ रोशनी में दूध के और अच्छे बैक्टिरिया को बनाने में सहायक होता है. वहीं, चावलों में मौजूद स्टार्च इस काम को और आसान बनाने में सहायक होता है. वहीं, चांदी के बर्तन में रोग-प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है. मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चांद की रोशनी सबसे तेज़ होती है. इन्हीं सब कारणों की वजह से शरद पूर्णिमा की रात बाहर खुले आसमान में रखी खीर फायदेमंद बताई जाती है. 

शरद पूर्णिमा की खीर खाने के फायदे
1. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की खीर अस्थमा रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद बताई जाती है. 
2. अस्थमा मरीजों के साथ-साथ शरद पूर्णिमा की खीर को चर्म रोग से परेशान लोगों के लिए भी अच्छा बताया जाता है. मान्यता है कि अगर किसी भी व्यक्ति को चर्म रोग हो तो वो इस दिन खुले आसमान में रखी हुई खीर खाए. 
3. यह खीर आंखों से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों को भी बहुत फायदा पहुंचाती है. इसे लेकर भी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का चांद बेहद चमकीला होता है इसीलिए आंखों की कम होती रोशनी वाले लोगों को इस चांद को एकटक देखते रहना चाहिए. क्योंकि इससे आंखों की रोशनी में सुधार होता है. इसी के साथ यह माना जाता है कि इस रात के चांद की चांदनी में आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए सुई में 100 बार धागा डालना चाहिए. 
4. आंखों, दमा और चर्म रोग में फायदा दिलाने के साथ शरद पूर्णिमा का चांद और खीर दिल के मरीज़ों और फेफड़े के मरीज़ों के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. 

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