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ताकि बरसात का मौसम त्वचा को न करे प्रभावित...

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए निजी साफ-सफाई का ध्यान रखें और फंगस रोधी सौंदर्य उत्पादों का प्रयोग करें.

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ताकि बरसात का मौसम त्वचा को न करे प्रभावित...
मानसून में उमस बढ़ने से त्वचा का संक्रमण एक आम समस्या है. एक विशेषज्ञ का कहना है कि इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए निजी साफ-सफाई का ध्यान रखें और फंगस रोधी सौंदर्य उत्पादों का प्रयोग करें. राजधानी दिल्ली के त्वचा रोग विशेषज्ञ नवीन तनेजा ने त्वचा के रोगों से बचने के कुछ उपाय बताए हैं :

घमौरियां :
 
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Photo Credit: iStock


घमौरी में लाल रंग के दाने निकल आते हैं. यह पसीने की वजह से होती है, जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं.
उपचार :
घमौरी में अगर खुजली करने से संक्रमण न हुआ हो, तो यह कुछ दिनों में ही छू हो जाती है. घमौरी को दूर रखने के लिए ढीले-ढाले सूती और सन के कप़डे पहनें. खुजली को शांत करने के लिए कैलेमाइन लोशन मददगार हो सकता है.

नाखून संक्रमण:
 
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Photo Credit: iStock


मानसून के दौरान नाखून में फंगस संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है. नाखून बदरंग, कांतिहीन और खुरदरे हो जाते हैं. बरसात में नाखून बढ़ाने नहीं चाहिए, क्योंकि बढ़े हुए नाखून गंदगी को न्योता देते हैं, जिससे कवकीय संक्रमण होता है.
उपचार : फंगस रोधी क्रीम या पाउडर का इस्तेमाल करें.

सोरायसिस (त्वचा रोग) :
 
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इस रोग में त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ने शुरू हो जाते हैं.
उपचार : बरसात में होने वाले रोगों के लिए ऐलोवेरा लाभकारी होता है. चने के आटे, गुलाब जल और दूध के मिश्रण से बना लेप जैसे घरेलू उपचार अपनाएं. बैक्टीरिया रोधी साबुन, पाउडर और फेसवॉश का इस्तेमाल करें.

पैरों में दाद पड़ना :
 
foot injuries

यह समस्या आमतौर पर गीले या तंग जूते पहनने से होती है.
उपचार : मानसून में प्लास्टिक, चम़डे या अन्य सख्त सतह वाले जूते नहीं पहनने चाहिए. इनकी बजाय चप्पल या फ्लिप-फ्लॉप पहनें. साफ-सुथरी सूती जुराब पहनें और साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें.


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