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आदर्श मॉम बनने के लिए जरूरी है बच्‍चों को समय देना...

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आदर्श मॉम बनने के लिए जरूरी है बच्‍चों को समय देना...
नई दिल्‍ली:

काम की भागदौड़, अच्‍छे लाइफस्‍टाइल की चाह और जिम्‍मेदारियों के चलते आज की महिला इतना व्‍यस्‍त हो चुकी है कि उसके पास अपने बच्‍चों के लिए वक्‍त नहीं रह गया है. वह इतनी बिजी हो चुकी है कि अनजाने में बच्‍चों को अपना वो साथ नहीं दे पा रही है कि जिसकी उन्‍हें दरकार है. भले ही आप यह सब अपने बच्‍चों के लिए ही कर रही हों, लेकिन ये न भूलें कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता, कभी- कभी आपके बच्‍चे आपका प्‍यार भी चाहते हैं, आपकी गोद में सिर रखकर सोना चाहते हैं. अगर आप चाहतीं है एक परफेक्‍ट मां बनना तो इन टिप्‍स को जरूर अपनाएं.

आप किस तरह की मां हैं, क्‍या आपने कभी सोचा है. क्या आप बच्चों को रोजाना क्वालिटी टाइम देती हैं? नहीं, तो एक आदर्श मां बनने के लिए आज से ही अपने बच्‍चों को क्वालिटी टाइम देना शुरू कर दें. लेकिन ये याद रखें कि इस क्वालिटी टाइम में आपको अपना पूरा समय केवल अपने बच्‍चे को ही देना है.

कुछ माताएं अपने बच्‍चों के सवालों का जवाब नहीं देती. बच्‍चे उनसे कुछ पूछते हैं तो या तो वह इग्‍नोर करने लगती हैं या उन्‍हें अपने पापा या भाई-बहन के पास भेज देती हैं. ऐसे में बच्‍चे अपनी मां से बात करना बंद करने लगते हैं. बेहतर होगा आप अपने बच्चों के मन में उठने वाली जिज्ञासा को शांत करने की कोशिश करें.
 


क्या जरुरत पड़ने पर आप बच्चे के सामने अपनी कमियों को बेझिझक स्वीकार कर लेती हैं या फिर उन्‍हें डांटकर चुप करवा देती हैं. अपने बच्‍चे को आदर्श बनाने के लिए खुद आदर्श बनना जरूरी है. आप चाहती हैं कि बच्‍चे अपनी गलती स्‍वीकार करें, तो आपको भी बच्‍चों के सामने अपनी गलती को मानना होगा.

क्‍या आप अपनी ही फ्रेंडस के साथ पार्टी में बिजी रहती हैं और आपके बच्‍चे किससे मिलते हैं, उनके फ्रेंड्स कौन हैं? इस बारे में आपको कुछ नहीं पता, तो आपको इसपर ध्‍यान देने की जरूरत है. अपनी पार्टी के साथ-साथ बच्‍चों के दोस्‍तों पर नजर रखें, टाइम-टू-टाइम ये देखती रहें कि बच्‍चे किससे बात कर रहे हैं या मिल रहे हैं.

कभी-कभी अपने दिनभर के काम निपटाकर बच्‍चों के साथ डांस करने का प्‍लान बनाएं. बच्‍चों की पसंद के फास्‍ट म्‍यूजिक चलाकर दिल खोलकर उनके साथ डांस करें. चाहें तो इस दौरान कुछ चिप्‍स और कोल ड्रिंक्‍स का भी अरेंजमेंट कर सकती हैं. बच्‍चों के साथ बच्‍चा बनकर जीवन का मजा लें.

बच्‍चों को अनुशासन में रखना, बच्‍चों को खेलने से ज्‍यादा पढ़ाई के लिए कहते रहना, ये सब आपको पंसद है. पर कभी-कभी बच्‍चों को आजादी भी दें. ए‍क दिन उनके साथ मिलकर खुद भी खेलें. आप देखेंगी कि बच्‍चे आपसे पहले से ज्‍यादा सरलता से अपनी बात कहने लगे हैं.
 

‘जो मैंने कहा, बस यही सही है. ज्‍यादा सवाल-जवाब मत किया करो. बहुत बोलने लगे हो तुम’ क्‍या आप भी अकसर इसी तरह से अपनी बच्‍चों को डांटती हैं. उनके मन में उठे सवालों को आप अपने गुस्‍से से दबा देना सही नहीं है. बेहतर होगा कि आप स्‍वीट मॉम बनने की कोशिश करें.
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क्या आप रोज बच्चे से उसके स्कूल में हुई सभी एक्टिविटिज के बारे में पूछती हैं या आपको इन सबसे कोई मतलब नहीं. आपको पंसद है शॉपिंग और अपने फ्रेंडस से मिलना-जुलना. अगर हां, तो ऐसे में खुद को आदर्श मां का तमगा देना सही नहीं होगा. आप अपनी लाइफ एंज्‍वॉय करें, लेकिन इस दौरान बच्‍चे का भी पूरा ख्‍याल रखें.

बच्चा आपसे अच्छी तरह घुला-मिला है और बेझिझक अपनी बातें कहता है? या फिर इस डर से कि आप उसे डांटेंगे वे अपने मन की बातें मन में ही रखता है, अगर हां, तो ये समझ लें कि आप आदर्श मां की कैटेगरी में सबसे लास्‍ट पायदान पर हैं. बच्‍चों को खुलकर बोलने की स्‍वतंत्रता दें. तभी वे अपने मन की बात सरलता से कह पाएंगे.
 



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