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World Health Day 2017, डिप्रेशन: कहीं 'खतरे की घंटी' को नज़रअंदाज़ तो नहीं कर रहे आप!

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World Health Day 2017, डिप्रेशन: कहीं 'खतरे की घंटी' को नज़रअंदाज़ तो नहीं कर रहे आप!

अवसाद की जांच के लिए विशेषज्ञ मेंटल स्टेटस एग्जैमिनेशन करते हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अवसाद ग्रसित लोगों की संख्या साल 2005 से लेकर 2015 के बीच करीब 18 फीसदी तक बढ़ी है. यह बीमारी दुनियाभर में अपंगता की सबसे बड़ी वजह मानी जाती है. फोर्टिस हॉस्पिटल की वरिष्ठ मनोविशेषज्ञ डॉ. समीर पारिख के अनुसार महिलाओं और पुरुषों में तनाव का स्तर, शारीरिक और मानसिक तौर पर, भिन्न होता है.' विशेषज्ञों के अनुसार एक से ज्यादा जिम्मेदारियां निभाने वाले शख्स में डिप्रेशन की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि उसपर एक से ज्यादा मौकों पर 'खुद को साबित' करने का दबाव होता है. 

...क्योंकि डिप्रेशन का मतलब सिर्फ उदास होना नहीं होता
डिप्रेशन का मतलब महज़ दुखी होना नहीं होता. लेकिन जब इसके साथ नाउम्मीदी, नींद न आना, भूख न लगना आदि जैसी समस्याएं भी जुड़ जाएं, तो समझिये मामाला 'खतरे के निशान' से ऊपर उठ चुका है. विश्व स्वास्थ्य दिवस 2017 के मौके पर एक नजर इस बीमारी के लक्षणों पर

1. दिनभर मन उदास और उखड़ा-उखड़ा रहना,
2. अपना पसंदीदा काम करने में भी मन न लगना,
3. ज़िंदगी और भविष्य के प्रति नाउम्मीद हो जाना, 
4. खुद को बेकार समझने लगना,
5. किसी अनजाने डर के काऱण धीरे-धीरे बोलना,
6. खान-पान में बदलाव ( ज़रूरत से ज्यादा/कम भूख लगना),
7. सोने के समय में बदलाव ( ज़रूरत से ज्यादा/कम नींद आना),
8. शरीर में ऊर्जा के स्तर में कमी, घबराहट महसूस करना,
9. ध्यान लगाने, फैसले लेने, सोच-विचार करने में अड़चन महसूस करना,
10. आत्महत्या करने जैसे ख्याल का आना

कोई शख्स अवसाद से ग्रसित है इसकी जांच के लिए विशेषज्ञ मेंटल स्टेटस एग्जैमिनेशन करते हैं. ये जितनी जल्दी हो जाए, समान्य ज़िंदगी की संभवना उतनी बढ़ जाती है.

ड्रिप्रेशन से आपकी जंग में मददगार साबित हो सकते हैं ये टिप्स...
  • 'मी-टाइम': भले काम का बोझ कितना ही क्यों न हो, अपने लिये वक्त ज़रूर निकालें. अपनी फिटनेस का ख्याल रखें और जिस चीज़ से आपको सबसे ज्यादा खुशी मिलती है, उसके करीब जाएं.
  • लोगों से मिलें: जितना हो सके परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं, छुट्टियों में  ट्रिप पर जाएं. भावनात्मक रूप से यह आपको मज़बूत करेगा.
  • स्वस्थ जीवनशैली: शारीरिक स्वास्थ्य का मानसिक स्वास्थ्य से सीधा कनेक्शन होता है. इसलिए अपने खान-पान, दिनचर्या और आदतों को दुरुस्त करें.
  • घर-दफ्तर में बैलेंस करें: वैसे तो तकनीकी विकास के कारण आज हम घर बैठे दफ्तर का काम और दफ्तर में बैठे घर का काम भी मैनेज कर सकते हैं. लेकिन अगर आपको फालतू के स्ट्रेस और प्रेशर से बचना है, तो एक रूल बनाएं. न तो दफ्तर में घर बसाएं, न ही घर पर दफ्तर को लेकर जाएं.
 


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